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दिशोम गुरु शिबू सोरेन को आज मरणोपरांत मिलेगा पद्मभूषण, पत्नी रूपी सोरेन करेंगी सम्मान ग्रहण; जानिए गुरु जी की संघर्ष गाथा

दिशोम गुरु शिबू सोरेन को आज मरणोपरांत मिलेगा पद्मभूषण, पत्नी रूपी सोरेन करेंगी सम्मान ग्रहण; जानिए गुरु जी की संघर्ष गाथा
दिशोम गुरु शिबू सोरेन को आज मरणोपरांत मिलेगा पद्मभूषण, पत्नी रूपी सोरेन करेंगी सम्मान ग्रहण

झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता और झामुमो संस्थापक दिशोम गुरु शिबू सोरेन को आज मरणोपरांत पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में उनकी पत्नी रूपी सोरेन यह सम्मान ग्रहण करेंगी। बहू कल्पना सोरेन भी उनके साथ मौजूद रहेंगी। यह झारखंड के लिए गौरव का क्षण माना जा रहा है।

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Dipali Kumari
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Shibu Soren: झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक दिशोम गुरु शिबू सोरेन को आज 23 जून को मरणोपरांत देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मभूषण से सम्मानित किया जाएगा। राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में यह सम्मान उनकी पत्नी रूपी सोरेन ग्रहण करेंगी। इस दौरान उनकी बहू और झारखंड सरकार में मंत्री कल्पना सोरेन भी उनके साथ मौजूद रहेंगी। दोनों सोमवार को इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए दिल्ली रवाना हो गईं।

इससे पहले चर्चा थी कि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने पिता की ओर से यह सम्मान ग्रहण करेंगे। हालांकि, झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में रूपी सोरेन और कल्पना सोरेन ही शामिल होंगी और सम्मान प्राप्त करेंगी।

दिशोम गुरु शिबू सोरेन का संघर्ष

शिबू सोरेन को यह सम्मान सार्वजनिक जीवन में उनके लंबे और उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जा रहा है। उन्होंने आदिवासियों के अधिकारों, जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा और अलग झारखंड राज्य की मांग को लेकर दशकों तक संघर्ष किया। उनके नेतृत्व में झारखंड आंदोलन को नई दिशा मिली और आदिवासी समाज को राष्ट्रीय राजनीति में मजबूत पहचान मिली।

झारखंड राज्य के गठन में शिबू सोरेन की भूमिका को ऐतिहासिक माना जाता है। उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर लगातार आंदोलन चलाकर राज्य निर्माण की मांग को मजबूती से उठाया। उनके संघर्ष और नेतृत्व ने झारखंड की राजनीति को नई पहचान दी। यही कारण है कि उन्हें झारखंड की राजनीति में ‘दिशोम गुरु’ के नाम से जाना जाता है।

 25 जनवरी को हुई थी पद्मभूषण सम्मान देने की घोषणा

गृह मंत्रालय ने 25 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्मभूषण सम्मान देने की घोषणा की थी। इस घोषणा के बाद से ही झारखंड में उनके समर्थकों और झामुमो कार्यकर्ताओं के बीच खुशी का माहौल था। अब राष्ट्रपति भवन में होने वाले सम्मान समारोह के साथ यह सम्मान औपचारिक रूप से उनके परिवार को सौंपा जाएगा।

4 अगस्त को हुआ था निधन

गौरतलब है कि शिबू सोरेन का निधन 4 अगस्त 2025 को लंबी बीमारी के बाद हुआ था। उनके निधन के बाद देशभर के राजनीतिक नेताओं और सामाजिक संगठनों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी थी। अब पद्मभूषण सम्मान के जरिए राष्ट्र उनके योगदान को औपचारिक रूप से नमन करेगा।

झारखंड के लिए यह एक गौरवपूर्ण क्षण माना जा रहा है। राज्य के लोगों का मानना है कि यह सम्मान न केवल शिबू सोरेन के संघर्षों और उपलब्धियों को मान्यता देता है, बल्कि झारखंड आंदोलन के इतिहास को भी राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करता है।

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।