Taslima Nasreen: तसलीमा नसरीन ने बेगम रुकैया को दी श्रद्धांजलि, बांग्लादेश पर जताई चिंता

Taslima Nasreen: लेखिका तसलीमा नसरीन ने सोदपुर में बेगम रुकैया को श्रद्धांजलि दी। जानें छात्राओं संग संवाद, महिला सुरक्षा और बांग्लादेश के हालात पर उन्होंने क्या कहा।
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स्वदेश वापसी और शेख हसीना के समर्थन पर तसलीमा नसरीन का बयान
Taslima Nasreen: बांग्लादेश से निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन मंगलवार को पानीहाटी के सोदपुर पहुंचीं। यहां उन्होंने नारी शिक्षा की अग्रदूत बेगम रुकैया सखावत हुसैन की प्रतिमा (मजार) पर जाकर फूल चढ़ाए और श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्होंने स्थानीय कॉलेज की छात्राओं से बातचीत की और महिला सशक्तिकरण पर अपने विचार रखे।
असली आजादी शिक्षा से मिलती है
श्रद्धांजलि देने के बाद तसलीमा ने कहा कि बेगम रुकैया ने जिस दौर में महिलाओं की शिक्षा के लिए आवाज उठाई वह अपने आप में एक बड़ी बात थी। उन्होंने कहा, 100 साल पहले जिस हिम्मत से उन्होंने पर्दा और अंधविश्वास के खिलाफ लड़ाई लड़ी वह आज भी हर महिला के लिए प्रेरणा है। छात्राओं से बात करते हुए तसलीमा ने उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ सवाल पूछने और तर्क करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि असली आजादी कलम और शिक्षा से ही मिलती है।
स्वदेश न लौट पाने का जताया दुख
पत्रकारों से बातचीत में तसलीमा नसरीन ने बांग्लादेश में बढ़ती कट्टरपंथी राजनीति को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा, बांग्लादेश में कट्टरपंथी ताकतों का बढ़ना महिलाओं की आजादी और तरक्की के लिए सबसे बड़ा खतरा है। जिस देश में कभी बेगम रुकैया जैसी सोच पनपी वहां आज लड़कियों की पढ़ाई और आजादी पर हमले हो रहे हैं यह दुखद है। इस दौरान उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की देश वापसी का भी समर्थन किया। अपनी खुद की वतन वापसी को लेकर उन्होंने कहा, मैं भी अपने देश लौटना चाहती हूं लेकिन अभी हालात ऐसे नहीं हैं। यह मेरे लिए बहुत दुख की बात है।
रिपोर्ट: शिंकी सिंह, कोलकाता

