नागपुर में डीजे प्रतिबंध पर भाजपा में मतभेद, संचालकों के विरोध से बढ़ा विवाद

नागपुर डीजे प्रतिबंध भाजपा विवाद: नागपुर में डीजे प्रतिबंध को लेकर राजनीतिक और सामाजिक विवाद बढ़ गया है। भाजपा के कुछ नेता प्रतिबंध का समर्थन कर रहे हैं, जबकि दयाशंकर तिवारी और प्रवीण दटके ने नियमों के समान इस्तेमाल और ध्वनि सीमा लागू करने की बात कही है। डीजे कारोबारियों ने आजीविका पर असर की चिंता जताई है। मामला उच्च न्यायालय तक पहुंच चुका है।
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डीजे प्रतिबंध को लेकर बढ़ा राजनीतिक और कारोबारी विरोध
नागपुर डीजे प्रतिबंध भाजपा विवाद: नागपुर शहर में डीजे बजाने पर लगे प्रतिबंध को लेकर पिछले करीब 10 दिनों से राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज है। शनिवार को हजारों डीजे संचालकों ने शहर के मध्य से विशाल मोर्चा निकालकर संविधान चौक पर प्रदर्शन किया।
कुछ आमदारों का कहना है कि ध्वनि प्रदूषण और नियमों को देखते हुए डीजे पर प्रतिबंध जरूरी है। वहीं भाजपा के कुछ नेताओं का तर्क है कि प्रतिबंध लागू करना है तो यह पूरे वर्ष होना चाहिए, केवल हिंदू त्योहारों के दौरान नहीं।
इस मुद्दे पर भाजपा नेताओं में ही मतभेद सामने आए हैं। शहर भाजपा अध्यक्ष दयाशंकर तिवारी सहित कुछ नेताओं ने प्रतिबंध पर सवाल उठाते हुए कहा कि नियम सभी के लिए समान होने चाहिए, किसी विशेष समुदाय या त्योहार को ध्यान में रखकर नहीं।

भाजपा नेताओं के अलग-अलग रुख से बढ़ा विवाद
डीजे व्यवसाय से जुड़े संचालकों का विरोध भी तेज हो गया है। जानकारी के अनुसार इस व्यवसाय से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 10 हजार परिवार जुड़े हैं। संचालकों का कहना है कि लगातार प्रतिबंध से उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की और नियमों का पालन करते हुए व्यवसाय चलाने की अनुमति मांगी।
इसी बीच डीजे से होने वाले ध्वनि प्रदूषण को लेकर हाई कोर्ट में भी याचिका दायर हो चुकी है, जिससे इस मामले में कानूनी पहलू भी अहम हो गया है।
आने वाले दिनों में प्रशासन, न्यायालय और डीजे व्यवसायियों के बीच इस मुद्दे पर क्या फैसला होता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र

