जॉर्ज कुरियन ने केंद्रीय मंत्री पद से दिया इस्तीफा, राष्ट्रपति ने किया स्वीकार; जानिए क्या है वजह

केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों और मत्स्य पालन राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राज्यसभा सदस्यता समाप्त होने के बाद संवैधानिक प्रावधानों के तहत उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ा। राष्ट्रपति ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है, जिसके साथ उनका मंत्री पद का कार्यकाल भी समाप्त हो गया।
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George Kurian: केंद्र सरकार में अल्पसंख्यक मामलों और मत्स्य पालन राज्य मंत्री रहे जॉर्ज कुरियन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद संवैधानिक प्रावधानों के तहत उनका मंत्री पद पर बने रहना संभव नहीं था। राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है।
राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत राष्ट्रपति ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद से जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल भी समाप्त हो गया। जॉर्ज कुरियन केंद्र सरकार में अल्पसंख्यक मामलों और मत्स्य पालन राज्य मंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे थे।
कौन है जॉर्ज कुरियन?
65 वर्षीय जॉर्ज कुरियन अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल के दौरान केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल किए गए थे। उन्हें भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिना जाता है। वे पार्टी की स्थापना के शुरुआती दौर से ही उससे जुड़े रहे हैं और लंबे समय से संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। राजनीतिक जीवन के अलावा जॉर्ज कुरियन ने कानूनी क्षेत्र में भी अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में वकील के रूप में काम किया है और विभिन्न कानूनी मामलों में अपनी सेवाएं दी हैं। भाजपा संगठन में उनकी छवि एक अनुभवी और समर्पित नेता की रही है।
दरअसल, जॉर्ज कुरियन का राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्यकाल समाप्त हो गया था। संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार मंत्री बने रहने के लिए संसद के किसी एक सदन का सदस्य होना आवश्यक है। उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें दोबारा राज्यसभा नहीं भेजा गया, जिसके चलते उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।
राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं
राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को लेकर कई तरह की चर्चाएं भी चल रही हैं। माना जा रहा है कि हाल के राजनीतिक समीकरणों और संगठनात्मक रणनीतियों के तहत पार्टी ने उन्हें राज्यसभा के लिए दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि केरल में पार्टी के अपेक्षित प्रदर्शन न कर पाने को भी इस फैसले से जोड़कर देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि हाल ही में हुए राज्यसभा चुनावों में केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन को उम्मीदवार नहीं बनाया गया था। कुरियन केंद्र सरकार में ईसाई समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख चेहरों में शामिल थे। उनके इस्तीफे के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र सरकार और भाजपा संगठन में उनकी आगे की भूमिका क्या रहती है।

