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खड़गपुर से दिलीप घोष का चुनावी शंखनाद “प्रचार तो औपचारिकता है, मैं साल भर जनता से जुड़ा रहता हूं”

Dilip Ghosh Kharagpur law and order Bengal: खड़गपुर में दिलीप घोष ने बंगाल की कानून-व्यवस्था और कालियाचक हिंसा पर ममता सरकार को घेरा, चुनाव से पहले बड़े आरोप। (File photo)

Dilip Ghosh Kharagpur election campaign West Bengal: भाजपा नेता दिलीप घोष ने खड़गपुर चुनाव को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि प्रचार उनके लिए औपचारिक है और वह सालभर लोगों से जुड़े रहते हैं। विरोधियों पर निशाना साधते हुए उन्होंने भाजपा की मजबूत स्थिति का दावा किया। साथ ही उत्तर बंगाल में 40 से 45 सीट जीतने की उम्मीद जताई।

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Asfi Shadab
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खड़गपुर चुनाव को लेकर दिलीप घोष का बड़ा बयान

Dilip Ghosh Kharagpur election campaign West Bengal: खड़गपुर/न्यूटाउन इकोपार्क। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने न्यूटाउन इकोपार्क से मीडिया से बात करते हुए खड़गपुर में अपना जमीनी चुनाव अभियान शुरू करने का ऐलान किया। उन्होंने कहा, “प्रचार तो बस एक औपचारिकता है। मैं साल भर जनता से जुड़े रहने में विश्वास रखता हूं – सामाजिक कार्यक्रमों में, पूजा-पाठ में। वहां सैकड़ों मंदिर हैं, आज मैं तीन मंदिरों में जाऊंगा। मैं बड़ी-बड़ी सभाओं और भाषणों में यकीन नहीं रखता।” उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के दौरे का फैसला केंद्रीय नेतृत्व करेगा।

प्रतिद्वंद्वी पर ‘बाहरी’ का टैग विपक्षी प्रत्याशी पर निशाना साधते हुए घोष ने कहा, “उनका स्कोर 1-1 है – एक बार जीते, एक बार हारे। मैं दो बार लड़ा और दोनों बार जीता। बीजेपी वहां जीतती है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्तिगत प्रत्याशी से नहीं, बल्कि तृणमूल दल से है। घोष ने खड़गपुर में मतदान प्रतिशत बढ़ाकर 1 लाख तक पहुंचाने को पार्टी का लक्ष्य बताया।

नंदीग्राम में पवित्र कर की उम्मीदवारी पर नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ तृणमूल द्वारा पवित्र कर को मैदान में उतारे जाने पर घोष ने कहा, “चुनाव आते ही दलबदल होता है – हमारे दल में भी होता है। जिन्हें टिकट नहीं मिलता, वे कई बार पाला बदल लेते हैं। तृणमूल के पास नंदीग्राम में लड़ने लायक कोई योग्य प्रत्याशी नहीं है। ममता बनर्जी तो नंदीग्राम नहीं जाएंगी – न्हाड़ा बेलतला में बार-बार नहीं जाता। इसलिए हमारे ही दल से प्रत्याशी ‘उधार’ लेकर वहां लड़ाई लड़नी पड़ रही है। उल्टे हम ही मुख्यमंत्री का पीछा करते हुए भवानीपुर तक पहुंच गए, उन्हें रोकने के लिए।”

विरोधियों पर निशाना और जीत का भरोसा जताया

दागी प्रत्याशियों पर तृणमूल को घेरा भर्ती घोटाले और राशन घोटाले में दागी नामों के तृणमूल की प्रत्याशी सूची में शामिल होने के सवाल पर घोष ने कहा, “तृणमूल में दागी न हो, ऐसा ढूंढना मुश्किल है – चोर बाछते गाँ उजड़ जाए। ममता बनर्जी बेहद मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। वरना 74 विदाई विधायकों को सूची से क्यों बाहर करतीं? पहले कहती थीं – मैं ही 294 सीटों पर प्रत्याशी हूं। वो दिन गए। अब वो खुद को ईमानदारी का प्रतीक नहीं कह सकतीं। उनकी पार्टी भ्रष्टाचार का प्रतीक बन चुकी है और उसका चेहरा ममता बनर्जी हैं। वो समझ नहीं पा रहीं कि किससे लड़ें – चुनाव आयोग से, अदालत से, या केंद्रीय बलों से? हालात बहुत खराब हैं। परिवर्तन होगा।”

उत्तर बंगाल में बीजेपी का दावा स्वप्ना बर्मन की उम्मीदवारी को लेकर उत्तर बंगाल में तृणमूल में उभरे असंतोष को बीजेपी के लिए फायदेमंद बताते हुए घोष ने कहा, “उत्तर में वैसे भी बीजेपी का फायदा है। हम वहां लगातार जीत रहे हैं। इस बार उत्तर बंगाल में हम 40 से 45 सीटें लाएंगे।”

चुनावी मौसम में दिलीप घोष की यह आक्रामक रणनीति और खड़गपुर से उनका सीधा मैदान में उतरना आने वाले दिनों में पश्चिम मेदिनीपुर की सियासत को गरमाए रखेगा।


रिपोर्ट: एकबाल, पश्चिम बंगाल

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