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बंगाल चुनाव की खास बातें: दूसरों के घरों में बर्तन धोने वाली महिला बनी विधायक, रेप पीड़िता की मां को मिली बड़ी जीत

बंगाल चुनाव की खास बातें: दूसरों के घरों में बर्तन धोने वाली महिला बनी विधायक, रेप पीड़िता की मां को मिली बड़ी जीत
बंगाल चुनाव की खास बातें: दूसरों के घरों में बर्तन धोने वाली महिला बनी विधायक (Pic Credit-@scribe9104)

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला। भाजपा ने प्रचंड बहुमत हासिल किया। घरेलू कामगार कलिता माझी विधायक बनीं, जबकि रेप पीड़िता की मां को भी जीत मिली। यह चुनाव आम लोगों की ताकत और सामाजिक बदलाव का प्रतीक बनकर उभरा।

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Dipali Kumari
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West Bengal Election Result: पश्चिम बंगाल की राजनीति में 4 मार्च 2026 एक ऐतिहासिक तारीख बन गई। 15 साल तक सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) को जनता ने सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया और भाजपा को स्पष्ट बहुमत देकर एक नए दौर की शुरुआत की। लेकिन इस चुनाव की सबसे खास बात सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि समाज के उस वर्ग की जीत है, जो अक्सर हाशिए पर रहता है।

दूसरों के घरों में काम करने वाली बनी विधायक

आउसग्राम विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार कलिता माझी की जीत इस बदलाव की सबसे मजबूत तस्वीर बनकर उभरी है। महज 2,500 रुपये महीने कमाने वाली एक घरेलू कामगार का विधायक बनना सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि उस सोच को जवाब है जो कुछ पेशों को छोटा समझती है। गुस्कारा नगरपालिका क्षेत्र की रहने वाली कलिता चार घरों में काम करके अपना और अपने परिवार का गुजारा चलाती थीं।

TMC उम्मीदवार को 12,535 वोटों से हराया

जब चुनाव में उनका नाम सामने आया, तो कई लोगों ने इसे एक सामान्य उम्मीदवारी माना, लेकिन नतीजों ने सबको चौंका दिया। कलिता माझी ने 1,07,692 वोट हासिल कर टीएमसी के श्यामा प्रसन्न लोहार को 12,535 वोटों से हराया। उनकी जीत में सिर्फ वोटों की संख्या नहीं, बल्कि जनता का भरोसा और अपने जैसे व्यक्ति को आगे बढ़ाने की भावना झलकती है।

 2021 में भी कलिता माझी ने आजमाई थी किस्मत

यह पहली बार नहीं था जब उन्होंने चुनाव लड़ा। 2021 में भी उन्होंने अपनी किस्मत आजमाई थी, लेकिन तब हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और इस बार जनता ने उन्हें सिर आंखों पर बैठा लिया।

आरजी कर रेप पीड़िता की मां को मिली बड़ी जीत

इस चुनाव में कई ऐसी कहानियां सामने आईं, जो बदलाव की गवाही देती हैं। संदेशखाली की रेखा पात्रा और आरजी कर अस्पताल की घटना से जुड़ी पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ जैसी महिलाओं की जीत ने यह साफ कर दिया कि इस बार जनता ने सिर्फ सरकार नहीं बदली, बल्कि व्यवस्था के चेहरे भी बदल दिए हैं।

भाजपा के नाम  206 सीटें, ममता को मिली हार

भाजपा ने 294 में से 206 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत हासिल किया और 15 साल पुराने शासन का अंत कर दिया। वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी भवानीपुर सीट से हार का सामना करना पड़ा, जो इस चुनाव का सबसे बड़ा उलटफेर माना जा रहा है।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।