
नागपुर के कोतवाली थाना क्षेत्र में 14 साल की नाबालिग से दुष्कर्म, गर्भवती होने पर खुला मामला नागपुर के कोतवाली थाना क्षेत्र से एक गंभीर और सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक 14 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म का आरोप उसी मकान में किराए पर रहने वाले एक युवक पर लगाया गया है। पीड़िता के गर्भवती पाए जाने के बाद इस मामले का खुलासा हुआ। कैसे आया मामला सामने पीड़िता की माँ को जब अपनी नाबालिग बेटी के गर्भवती होने की जानकारी हुई, तब उन्होंने कोतवाली पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि आरोपी

नागपुर के कोतवाली थाना क्षेत्र में 14 साल की नाबालिग से दुष्कर्म, गर्भवती होने पर खुला मामला नागपुर के कोतवाली थाना क्षेत्र से एक गंभीर और सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक 14 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म का आरोप उसी मकान में किराए पर रहने वाले एक युवक पर लगाया गया है। पीड़िता के गर्भवती पाए जाने के बाद इस मामले का खुलासा हुआ। कैसे आया मामला सामने पीड़िता की माँ को जब अपनी नाबालिग बेटी के गर्भवती होने की जानकारी हुई, तब उन्होंने कोतवाली पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि आरोपी

उत्तर प्रदेश के उन्नाव रेप केस ने एक बार फिर से सुर्खियां बटोरी हैं। भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट ने जो सशर्त जमानत दी थी, उस पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। यह मामला देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि इसमें एक नाबालिग के साथ रेप और सत्ता के दुरुपयोग के गंभीर आरोप शामिल हैं। 29 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाते हुए कुलदीप सिंह सेंगर को मिली राहत पर विराम लगा दिया। इस फैसले से पीड़िता पक्ष को

उत्तर प्रदेश के उन्नाव रेप केस ने एक बार फिर से सुर्खियां बटोरी हैं। भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट ने जो सशर्त जमानत दी थी, उस पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। यह मामला देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि इसमें एक नाबालिग के साथ रेप और सत्ता के दुरुपयोग के गंभीर आरोप शामिल हैं। 29 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाते हुए कुलदीप सिंह सेंगर को मिली राहत पर विराम लगा दिया। इस फैसले से पीड़िता पक्ष को

सर्वोच्च न्यायालय का तिहासिक फैसला देश की सर्वोच्च अदालत ने एक बार फिर न्याय की उम्मीद जगाई है। उत्तर प्रदेश के उन्नाव में 2017 में हुए दुष्कर्म मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को रोक दिया जिसमें पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत को मंजूरी दी गई थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली छुट्टी की पीठ ने यह अहम फैसला सुनाया। इस पीठ में जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह भी शामिल थे। सेंगर को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने पीड़िता

सर्वोच्च न्यायालय का तिहासिक फैसला देश की सर्वोच्च अदालत ने एक बार फिर न्याय की उम्मीद जगाई है। उत्तर प्रदेश के उन्नाव में 2017 में हुए दुष्कर्म मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को रोक दिया जिसमें पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत को मंजूरी दी गई थी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली छुट्टी की पीठ ने यह अहम फैसला सुनाया। इस पीठ में जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह भी शामिल थे। सेंगर को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने पीड़िता