Nipah virus Outbreak: म्यांमार ने अपने यांगून अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर स्वास्थ्य जांच और निगरानी को तेज कर दिया है। यह कदम निपाह वायरस के संभावित प्रवेश को रोकने के लिए उठाया गया है। सोमवार को सरकारी अखबार द ग्लोबल न्यू लाइट ऑफ म्यांमार ने यह जानकारी दी। भारत के पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के मामले बढ़ने के बाद म्यांमार ने यह फैसला लिया है। भारत से आने वाले यात्रियों पर खास ध्यान दिया जा रहा है और उनकी बुखार तथा निपाह से जुड़े अन्य लक्षणों की जांच की जा रही है।
म्यांमार सरकार ने क्यों बढ़ाई सतर्कता
म्यांमार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि विदेश से आने वाले यात्रियों की स्वास्थ्य जांच संक्रामक रोगों के लिए बनाए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार की जा रही है। ये वो बीमारियां हैं जो सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल पैदा कर सकती हैं। चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने इस बारे में विस्तार से रिपोर्ट दी है। मंत्रालय का कहना है कि निपाह वायरस एक गंभीर बीमारी है जो तेजी से फैल सकती है। इसलिए हवाई अड्डे पर सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं ताकि यह वायरस म्यांमार में प्रवेश न कर सके।
हवाई अड्डे पर क्या हो रही है व्यवस्था
यांगून हवाई अड्डे पर स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने के लिए खास कदम उठाए गए हैं। यात्रियों को जानकारी देने के लिए पर्चे बांटे जा रहे हैं। हवाई अड्डे पर कई जगहों पर पोस्टर लगाए गए हैं जिनमें निपाह वायरस के बारे में जानकारी दी गई है। साथ ही बीमारी की रोकथाम और नियंत्रण के उपाय भी किए जा रहे हैं। इसके लिए हवाई अड्डे पर काम करने वाले सभी विभागों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है। यह पूरी प्रक्रिया बहुत सावधानी से चलाई जा रही है ताकि कोई भी संदिग्ध मामला छूटे नहीं।
मांडले हवाई अड्डे पर भी शुरू हुई जांच
स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि केवल यांगून ही नहीं बल्कि मांडले अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी ऐसी ही बढ़ी हुई निगरानी और जांच के उपाय लागू किए गए हैं। म्यांमार के दोनों प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। यह दिखाता है कि म्यांमार सरकार इस मामले को कितनी गंभीरता से ले रही है। अभी तक म्यांमार में निपाह वायरस का एक भी संदिग्ध मामला सामने नहीं आया है। लेकिन सरकार पहले से ही सावधानी बरत रही है ताकि किसी भी तरह की समस्या से बचा जा सके।
निपाह वायरस क्या है और कैसे फैलता है
निपाह वायरस एक जूनोटिक बीमारी है जो जानवरों और इंसानों के बीच फैलती है। कुछ मामलों में यह एक इंसान से दूसरे इंसान में भी फैल सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे प्राथमिकता वाले रोगजनक की श्रेणी में रखा है। इसकी वजह यह है कि यह महामारी फैला सकता है और बहुत गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है। यह वायरस चमगादड़ों से इंसानों में आता है और फिर इंसानों के बीच भी फैल सकता है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, सिर दर्द, उल्टी और सांस लेने में दिक्कत शामिल हैं।
निपाह का इतिहास और पुराने प्रकोप
निपाह वायरस की पहली बार पहचान 1998 में हुई थी। यह मलेशिया में सूअर पालने वाले किसानों के बीच फैला था। 1999 में सिंगापुर में भी इसका प्रकोप देखा गया था जो मलेशिया से बीमार सूअरों के आयात के बाद हुआ था। लेकिन 1999 के बाद से मलेशिया या सिंगापुर में निपाह के कोई नए मामले नहीं मिले हैं। साल 2001 में भारत और बांग्लादेश में निपाह वायरस संक्रमण के प्रकोप का पता चला। बांग्लादेश में तब से लगभग हर साल इसके मामले सामने आते हैं। भारत में भी समय-समय पर देश के कई हिस्सों में इसके मामले रिपोर्ट किए जाते हैं। 2026 में भी भारत में इसका ताजा प्रकोप देखा गया है।
लोगों के बीच कैसे फैलता है निपाह
निपाह वायरस लोगों के बीच भी फैल सकता है। यह स्वास्थ्य केंद्रों में और बीमार लोगों के परिवार के सदस्यों और देखभाल करने वालों में करीबी संपर्क के माध्यम से फैलने की रिपोर्ट मिली है। स्वास्थ्य सुविधाओं में इसके फैलने का खतरा तब बढ़ जाता है जब भीड़भाड़ हो, हवा का आवागमन सही न हो और संक्रमण रोकथाम के उपाय ठीक से लागू न किए गए हों। इनमें व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण का उपयोग, सफाई और कीटाणुशोधन तथा हाथ धोना जैसी बातें शामिल हैं। इसलिए अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में खास सावधानी बरतनी जरूरी है।
अभी तक नहीं है कोई टीका या इलाज
फिलहाल निपाह वायरस संक्रमण के लिए कोई लाइसेंस प्राप्त टीका या विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है। यही वजह है कि इस बीमारी से बचाव ही एकमात्र उपाय है। संक्रमित व्यक्ति को सहायक उपचार दिया जाता है जिसमें लक्षणों को कम करने की कोशिश की जाती है। इसलिए दुनिया भर के देश इस वायरस को अपनी सीमाओं में घुसने से रोकने के लिए कड़े कदम उठा रहे हैं। म्यांमार का यह कदम भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
भारत में निपाह की स्थिति
Nipah virus Outbreak: भारत में पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के मामले सामने आए हैं। यहां स्वास्थ्य अधिकारी पूरी सतर्कता के साथ काम कर रहे हैं। संक्रमित मरीजों को अलग रखा गया है और उनके संपर्क में आए लोगों की पहचान करके उन्हें निगरानी में रखा गया है। केरल में भी पहले निपाह के कई मामले देखे गए हैं। भारत सरकार ने राज्यों को अलर्ट जारी किया है और सभी जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि वे इस बीमारी की पहचान और इलाज में सक्षम हों।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी
निपाह जैसी बीमारियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बहुत जरूरी है। एक देश में फैली बीमारी जल्दी ही दूसरे देशों में पहुंच सकती है। इसलिए म्यांमार जैसे देशों का सतर्क रहना और सही कदम उठाना बहुत महत्वपूर्ण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इस मामले पर नजर रख रहा है और जरूरत पड़ने पर देशों को मदद देने के लिए तैयार है। हवाई अड्डों पर जांच और निगरानी इस दिशा में एक प्रभावी कदम है जो रोग के प्रसार को रोकने में मदद करता है।
म्यांमार का यह कदम दिखाता है कि वैश्विक स्वास्थ्य खतरों से निपटने के लिए सभी देशों को मिलकर काम करना होगा। हवाई अड्डों पर मजबूत जांच प्रणाली और जनता को जागरूक बनाना इस लड़ाई के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। भारत और म्यांमार दोनों देशों के बीच अच्छा समन्वय इस संकट से निपटने में मददगार साबित होगा।