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कश्मीरी विद्यार्थियों की कथित प्रताड़ना पर संगठन की पुकार, प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप का आग्रह

J&K Students Delhi Blast
J&K Students Delhi Blast: उत्तरी राज्यों में कश्मीरी विद्यार्थियों की कथित प्रोफाइलिंग और परेशानियों पर संगठन की गंभीर चिंता (Photo: IANS)

दिल्ली विस्फोट के बाद उत्तर भारत में कश्मीरी विद्यार्थियों की कथित प्रताड़ना और प्रोफाइलिंग ने जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन को गंभीर चिंता में डाल दिया। संगठन ने प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की अपील की है। विद्यार्थियों ने सुरक्षा, निष्पक्षता और सम्मान की माँग करते हुए सामूहिक संदेह को देश की एकता के लिए हानिकारक बताया।

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कश्मीरी विद्यार्थियों की कथित प्रताड़ना और प्रोफाइलिंग पर संगठन का हस्तक्षेप हेतु आग्रह

दिल्ली में हाल ही में हुए रेड फोर्ट विस्फोट के बाद उत्तरी भारत के अनेक राज्यों में कश्मीरी विद्यार्थियों को जिन परिस्थितियों और आशंकाओं का सामना करना पड़ रहा है, उसने जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन को गंभीर चिंता के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है। संगठन ने आरोप लगाया है कि विस्फोट की घटना के उपरांत उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली में अनेक कश्मीरी विद्यार्थियों को कथित रूप से निशाना बनाया जा रहा है। संगठन ने इसे समुदाय के विरुद्ध अवांछनीय दृष्टिकोण और अनावश्यक संदेह का प्रतीक बताया है।

संगठन ने सोमवार को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, नई दिल्ली में संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर यह आरोप और चिंताएँ सार्वजनिक रूप से सामने रखीं। संगठन के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुहामी के अनुसार, विस्फोट के बाद छात्रों के साथ व्यवहार में अचानक आए बदलाव ने भय और असहजता को जन्म दिया है। उन्होंने कहा कि कई मकान मालिकों ने कश्मीरी किरायेदारों को कमरा खाली करने के लिए कहा, जिसके कारण अनेक विद्यार्थी भयवश अपने घर लौटने को विवश हुए।

शिक्षा और सुरक्षा के बीच खड़ी हुई नई चुनौतियाँ

नासिर खुहामी ने कहा कि कुछ विश्वविद्यालय परिसरों और आवासीय क्षेत्रों में विद्यार्थियों से आक्रामक पूछताछ और अनावश्यक सत्यापन प्रक्रियाएँ संचालित की जा रही हैं, जिससे शिक्षा का वातावरण प्रभावित हो रहा है। विद्यार्थियों के अनुसार, यह परिस्थितियाँ न केवल उनके अध्ययन को बाधित कर रही हैं, बल्कि मानसिक रूप से असुरक्षा और अलगाव की भावना भी पैदा कर रही हैं।

उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि कुछ लोगों द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से ऐसी पोस्टें साझा की जा रही हैं जो कश्मीरियों के प्रति पूर्वाग्रह और सांप्रदायिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देती हैं। ऐसे माहौल में विद्यार्थियों का असहज होना स्वाभाविक है।

विस्फोट की निंदा और राष्ट्रीय एकता के प्रति प्रतिबद्धता

नासिर खुहामी ने संवाददाता सम्मेलन में यह भी स्पष्ट किया कि कश्मीरी विद्यार्थी और कश्मीर की आम जनता किसी भी प्रकार की आतंकवादी गतिविधि के खिलाफ हैं और आतंकवाद को घोर अमानवीय कृत्य मानते हैं। उन्होंने कहा कि इस विस्फोट की घटना को कश्मीरी समुदाय ने गंभीरता से लिया है और पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।

उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि कश्मीर के लोगों ने हमेशा देश की लोकतांत्रिक परंपराओं पर भरोसा किया है और राष्ट्रीय एकता तथा अखंडता के प्रति अविचल निष्ठा दिखाई है। उन्होंने याद दिलाया कि कश्मीरी परिवारों ने सीमाओं पर तैनात रहकर देश की सेवा भी की है तथा पीढ़ियों से राष्ट्रीय प्रगति का हिस्सा रहे हैं।

सामूहिक संदेह से उत्पन्न संभावित संकट

संगठन ने चेतावनी दी कि यदि इस प्रकार की सामूहिक प्रोफाइलिंग और अविश्वास पर आधारित दृष्टिकोण जारी रहता है, तो इससे विद्यार्थियों के भविष्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। नासिर खुहामी ने कहा कि इस प्रकार का संदेहपूर्ण व्यवहार न केवल व्यक्तिगत स्तर पर, बल्कि समग्र सामाजिक एकता और सद्भाव के लिए भी घातक है।

उन्होंने कहा कि कुछ विद्यार्थी अचानक ही परिसर छोड़कर चले गए हैं क्योंकि उन्हें सामान्य बातचीत और सत्यापन थोपे जाने में भी भय महसूस हो रहा है। इस स्थिति ने उनके मन में यह आशंका भी पैदा कर दी है कि कहीं उन्हें केवल पहचान के आधार पर अपराधी की तरह न देखा जाए।

प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की अपील

इन सभी घटनाओं को ध्यान में रखते हुए संगठन ने प्रधानमंत्री को एक औपचारिक पत्र भी भेजा है। इसमें अनुरोध किया गया है कि वे सार्वजनिक रूप से विद्यार्थियों को आश्वस्त करें और यह स्पष्ट संदेश दें कि देश के सभी नागरिक समान रूप से सुरक्षित हैं और उन्हें समान अधिकार प्राप्त हैं।

नासिर खुहामी ने कहा कि प्रधानमंत्री की एक अपील विभिन्न समुदायों के बीच व्याप्त संदेह को दूर कर सकती है और समाज में सकारात्मक संदेश प्रसारित करेगी। उन्होंने कहा कि ऐसी अपील न केवल कश्मीरी विद्यार्थियों के मनोबल को बढ़ाएगी, बल्कि राष्ट्र के भीतर संवाद और विश्वास की नई दिशा भी स्थापित करेगी।

सामुदायिक सौहार्द और न्यायपूर्ण प्रक्रिया की आवश्यकता

संगठन ने यह भी कहा कि देश में किसी भी नागरिक की पहचान को लेकर सामूहिक आरोप लगाना या किसी समुदाय को एक इकाई के रूप में दोषी ठहराना लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद का कोई धर्म, समुदाय या क्षेत्र नहीं होता, और किसी भी जघन्य कृत्य के लिए दोषी व्यक्ति को कानून के तहत दंडित किया जाना चाहिए, न कि किसी पूरे समुदाय को निशाना बनाकर।

संगठन ने केंद्र सरकार, विश्वविद्यालय प्रशासन, नियोक्ताओं और स्थानीय प्रशासन से समन्वय स्थापित करने की अपील की है ताकि कश्मीरी विद्यार्थियों की सुरक्षा, सम्मान और समान अवसर सुनिश्चित किए जा सकें। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति और सामाजिक सौहार्द तभी संभव है जब नागरिकों के बीच विश्वास और सामंजस्य बना रहे।

ये न्यूज IANS एजेंसी के इनपुट के साथ प्रकाशित हो गई है।

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Asfi Shadab

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