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कोलकाता आईसीआईसीआई बैंक कर्मचारी द्वारा साढ़े 34 लाख की धोखाधड़ी, 3 आरोपी गिरफ्तार

Kolkata Bank Employee Fraud: आईसीसीआई बैंक कर्मचारी ने ग्राहकों को बनाया निशाना, साढ़े 34 लाख की ठगी का मामला सामने आया
Kolkata Bank Employee Fraud: आईसीसीआई बैंक कर्मचारी ने ग्राहकों को बनाया निशाना, साढ़े 34 लाख की ठगी का मामला सामने आया

कोलकाता में आईसीसीआई बैंक के डिप्टी मैनेजर चंदन मंडल ने दो अन्य आरोपियों के साथ मिलकर नकली म्यूचुअल फंड और एफडी सर्टिफिकेट बनाए और ग्राहकों के खातों से 34.75 लाख रुपये की धोखाधड़ी की। पुलिस ने तीनों आरोपियों को 17 दिसंबर को गिरफ्तार किया। आरोपियों को अदालत में पेश कर रिमांड की मांग की गई है।

Updated:

कोलकाता में बैंक कर्मचारी द्वारा ग्राहकों के साथ की गई धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है। आईसीसीआई बैंक की सारत बोस रोड शाखा में कार्यरत एक कर्मचारी ने नकली दस्तावेज बनाकर ग्राहकों के खातों से साढ़े चौंतीस लाख रुपये की धोखाधड़ी की। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें दो बैंक कर्मचारी भी शामिल हैं।

शेक्सपियर सारानी पुलिस स्टेशन में 16 सितंबर 2025 को दर्ज की गई इस शिकायत में आईसीसीआई बैंक के जोनल मैनेजर इंद्रनील आचार्य ने बताया कि बैंक के कर्मचारी चंदन मंडल ने अन्य लोगों के साथ मिलकर एक आपराधिक साजिश रची और ग्राहकों को ठगने का काम किया।

कैसे हुई धोखाधड़ी की शुरुआत

मार्च 2022 के बाद से चंदन मंडल ने अपनी योजना को अंजाम देना शुरू किया। उसने नकली म्यूचुअल फंड और फिक्स्ड डिपॉजिट के प्रमाणपत्र तैयार किए और इन्हें असली बताकर ग्राहकों के सामने पेश किया। इन जाली दस्तावेजों के जरिए उसने ग्राहकों के खातों से पैसे निकाले और अपने नियंत्रण वाले खातों में ट्रांसफर कर दिए। इससे न केवल ग्राहकों को बल्कि बैंक को भी बड़ा नुकसान हुआ।

पीड़ितों की कहानी

जांच के दौरान यह सामने आया कि चंदन मंडल ने पार्थ सारथी घोषाल और बानी घोषाल नामक दो ग्राहकों को म्यूचुअल फंड में निवेश करने की सलाह दी। उसने दोनों को विश्वास दिलाया कि यह निवेश उनके लिए फायदेमंद होगा। भरोसा करके दोनों ग्राहक तैयार हो गए। इसके बाद चंदन ने उनके खातों से पैसे ट्रांसफर किए, लेकिन यह रकम म्यूचुअल फंड में नहीं गई। बल्कि यह पैसा कुछ तीसरे पक्ष के खातों में चला गया जो चंदन के नियंत्रण में थे।

नकली प्रमाणपत्र का खेल

आगे की जांच से यह पता चला कि आईसीसीआई होम फाइनेंस और आईसीसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड के नाम पर जो डिपॉजिट प्रमाणपत्र चंदन ने पीड़ितों को दिए थे, वे पूरी तरह से नकली और जाली थे। एक अन्य ग्राहक मालाबिका नंदी को भी इसी चंदन ने फिक्स्ड डिपॉजिट बनाने के नाम पर 1.25 लाख रुपये की ठगी की। इस मामले में भी पैसा चंदन के खाते में चला गया और उसने पीड़िता को नकली एफडी का प्रमाणपत्र दे दिया।

जांच में मिले सबूत

जांच के दौरान पुलिस ने कई जरूरी दस्तावेज जब्त किए। इनमें नकली डेबिट अधिकार फॉर्म, जाली फिक्स्ड डिपॉजिट प्रमाणपत्र, म्यूचुअल फंड सर्टिफिकेट, खाते के स्टेटमेंट और खाता खोलने के फॉर्म शामिल हैं। ये सभी दस्तावेज इस बात का सबूत हैं कि यह पूरी तरह से एक सोची-समझी साजिश थी।

तीन आरोपियों की गिरफ्तारी

17 दिसंबर 2025 को पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। पहला आरोपी चंदन मंडल (32 वर्ष) है, जो बलाई मंडल का बेटा है और 78/3/2, रामचंद्रपुर, कबरडांगा, हरिदेवपुर, कोलकाता-700104 का रहने वाला है। उसे 17 दिसंबर 2025 को दोपहर 3 बजकर 10 मिनट पर उल्टाडांगा पुलिस स्टेशन क्षेत्र के संध्या बैंक्वेट से गिरफ्तार किया गया।

दूसरा आरोपी सुरेश भगत (33 वर्ष) है, जो राम एकबाल भगत का बेटा है और 32/1, नेताजी सुभाष रोड, हावड़ा, पश्चिम बंगाल-711101 का रहने वाला है। उसे भी 17 दिसंबर 2025 को दोपहर 3 बजकर 35 मिनट पर संध्या बैंक्वेट से ही गिरफ्तार किया गया।

तीसरा आरोपी राजू थापा (36 वर्ष) है, जो लाल बहादुर थापा का बेटा है और 10/1/2, प्रियनाथ घोष लेन, चटर्जीहाट, हावड़ा-711104 का रहने वाला है। उसे 17 दिसंबर 2025 को शाम 6 बजकर 30 मिनट पर हावड़ा से गिरफ्तार किया गया।

आरोपियों की भूमिका

चंदन मंडल आईसीसीआई बैंक की सारत बोस रोड शाखा में डिप्टी मैनेजर के पद पर कार्यरत था। उसके निर्देश पर ही पीड़ित पार्थ सारथी घोषाल और बानी घोषाल ने 33.50 लाख रुपये निवेश किए थे। लेकिन यह पैसा बैंक के खाते में नहीं गया, बल्कि चंदन के नियंत्रण वाले खातों में चला गया। इसके अलावा उसने मालाबिका नंदी के खाते से एफडी खोलने के नाम पर 1.25 लाख रुपये की ठगी की। यह पैसा भी अंत में चंदन के खाते में ही गया।

सुरेश भगत भी आईसीसीआई बैंक में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर था। उसने वह खाता व्यवस्थित किया जिसमें ठगी की गई रकम जमा की गई। वह भी ठगी की गई राशि का एक लाभार्थी है।

राजू थापा ने उस खाते की व्यवस्था की जहां पैसा सबसे पहले ट्रांसफर किया गया था। वह अन्य दो आरोपियों के साथ अपने आर्थिक लाभ के लिए संपर्क बनाए रखता था। उसने ठगी की गई राशि का 20 फीसदी कमीशन के रूप में लिया।

कानूनी कार्रवाई

तीनों आरोपियों को कलकत्ता के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया जा रहा है। पुलिस ने उनकी रिमांड की मांग की है। यह मामला आईपीसी की धारा 120बी (आपराधिक साजिश), 409 (आपराधिक विश्वासघात), 420 (धोखाधड़ी), 467 (जालसाजी), 468 (धोखे के उद्देश्य से जालसाजी) और 471 (नकली दस्तावेज को असली के रूप में इस्तेमाल करना) के तहत दर्ज किया गया है। जांच अभी भी जारी है और पुलिस अन्य संभावित आरोपियों की तलाश में है।

बैंकिंग सुरक्षा पर सवाल

यह घटना बैंकिंग क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जब बैंक के अपने ही कर्मचारी ग्राहकों को ठगने लगें तो आम लोगों का भरोसा कहां जाएगा। यह जरूरी है कि बैंक अपने कर्मचारियों की जांच मजबूती से करें और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त नियम बनाएं। ग्राहकों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। किसी भी निवेश से पहले सभी दस्तावेजों की जांच जरूर करें और बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या हेल्पलाइन से पुष्टि करें।

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Asfi Shadab

असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है।

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