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25,000 के आसपास झूलता निफ्टी, बजट से पहले बाजार में घबराहट

25,000 के आसपास झूलता निफ्टी
25,000 के आसपास झूलता निफ्टी
निफ्टी 50 बजट से पहले 25,000 के स्तर के आसपास उतार-चढ़ाव में है। एफआईआई बिकवाली और सतर्कता से दबाव बना है, लेकिन यूरोप-भारत फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, कमजोर डॉलर और तकनीकी ओवरसोल्ड संकेतों से बाजार को सीमित राहत मिलने की उम्मीद है।
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Nifty 25000: शेयर बाजार इन दिनों असमंजस के दौर से गुजर रहा है। निफ्टी 50 एक बार फिर 25,000 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर के आसपास झूलता नजर आ रहा है। कारोबार की शुरुआत में ही निफ्टी करीब 0.2 प्रतिशत फिसल गया और लंबे समय बाद अपने 200-दिवसीय मूविंग एवरेज से नीचे चला गया।

बीते आठ महीनों में यह पहला मौका है जब निफ्टी ने इस अहम तकनीकी सपोर्ट को तोड़ा है। अपने हालिया शिखर से निफ्टी लगभग 5 प्रतिशत नीचे आ चुका है। बाजार में यह कमजोरी ऐसे समय पर दिख रही है, जब निवेशक केंद्रीय बजट से पहले किसी भी बड़े दांव से बच रहे हैं।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बढ़ाया दबाव

बाजार पर दबाव की सबसे बड़ी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की लगातार बिकवाली है। पिछले कुछ सत्रों से विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे हैं।

इसका एक कारण वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता है, तो दूसरा कारण अमेरिका और यूरोप के बाजारों में मिल रहे बेहतर रिटर्न के मौके हैं। एफआईआई की बिकवाली का असर सीधे-सीधे बड़े शेयरों पर पड़ा है, जिससे निफ्टी और सेंसेक्स दोनों दबाव में आए हैं।

बजट से पहले क्यों सतर्क हैं निवेशक

1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट से पहले बाजार में आमतौर पर सतर्कता देखी जाती है, लेकिन इस बार माहौल कुछ ज्यादा ही सावधान नजर आ रहा है।

निवेशक जानना चाहते हैं कि सरकार राजकोषीय घाटा, महंगाई, टैक्स और बुनियादी ढांचे पर क्या रुख अपनाती है। बजट से पहले किसी भी नकारात्मक संकेत से बाजार में बड़ी गिरावट आ सकती है, इसलिए ट्रेडर्स फिलहाल सीमित दायरे में ही सौदे कर रहे हैं।

यूरोप-भारत फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से मिली राहत

इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर खुशी जताई है। इस समझौते को भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।

इस समझौते के तहत यूरोपीय कारों पर लगने वाला आयात शुल्क 110 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे भारत में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा और विदेशी कंपनियां भारत में निवेश के लिए प्रोत्साहित होंगी।

मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार पर क्या होगा असर

यूरोप-भारत ट्रेड डील से ऑटोमोबाइल, स्टील, मेटल्स और इंजीनियरिंग सेक्टर को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। कम टैरिफ से लागत घटेगी, तकनीक का आदान-प्रदान बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर तुरंत भले न दिखे, लेकिन मध्यम और लंबी अवधि में यह समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक साबित हो सकता है।

ग्लोबल संकेत क्या कह रहे हैं

वैश्विक स्तर पर कुछ सकारात्मक संकेत भी बाजार को सहारा दे रहे हैं। डॉलर में कमजोरी देखने को मिल रही है, जिससे उभरते बाजारों के लिए माहौल थोड़ा बेहतर हुआ है।

इसके अलावा मेटल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है, जिसका फायदा भारतीय मेटल कंपनियों को मिल सकता है। हालांकि, इन सकारात्मक संकेतों के बावजूद घरेलू बाजार फिलहाल पूरी तरह आश्वस्त नजर नहीं आ रहा।

तकनीकी संकेत दे रहे हैं क्या इशारा

तकनीकी विश्लेषण की बात करें तो निफ्टी अब ओवरसोल्ड ज़ोन के करीब पहुंच गया है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यहां से बाजार में सीमित रिकवरी देखने को मिल सकती है।

हालांकि, जब तक निफ्टी 25,300 के ऊपर मजबूती से नहीं टिकता, तब तक बड़ी तेजी की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी। नीचे की ओर 24,900 का स्तर अहम सपोर्ट माना जा रहा है।

ट्रेडर्स की नजर किस रेंज पर

फिलहाल बाजार विशेषज्ञ 24,900 से 25,300 के दायरे को अहम मान रहे हैं। इसी रेंज में बजट तक निफ्टी के घूमने की संभावना जताई जा रही है।

बजट के दिन और उसके बाद सरकार के ऐलानों के आधार पर ही बाजार की अगली दिशा तय होगी।

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Dipali Kumari

दीपाली कुमारी पिछले तीन वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में कार्यरत हैं। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर लिखने में उनकी विशेष रुचि है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को धारदार लेखन के माध्यम से सामने लाना उनका प्रमुख लक्ष्य है।