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अमृता फडणवीस पर आपत्तिजनक टिप्पणी: गायिका अंजली भारती के बयान पर मचा बवाल, डॉ. नीलम गोऱ्हे ने की कड़ी निंदा

Amruta Fadnavis Controversy: गायिका अंजली भारती की आपत्तिजनक टिप्पणी पर बवाल, नीलम गोऱ्हे की प्रतिक्रिया
Amruta Fadnavis Controversy: गायिका अंजली भारती की आपत्तिजनक टिप्पणी पर बवाल, नीलम गोऱ्हे की प्रतिक्रिया (Image Source: IG/@amruta.fadnavis)

Amruta Fadnavis Controversy: भंडारा में गायिका अंजली भारती ने अमृता फडणवीस के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की। शिवसेना नेत्री डॉ. नीलम गोऱ्हे ने इसे संविधान विरोधी बताते हुए कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि न्याय के नाम पर हिंसक भाषा स्वीकार्य नहीं। महिला आयोग और गृह विभाग से तुरंत संज्ञान की मांग की गई।

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Amruta Fadnavis Controversy: मुंबई, 27 जनवरी 2026: महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। भंडारा जिले में आयोजित एक गायन कार्यक्रम के दौरान प्रसिद्ध गायिका अंजली भारती ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस के बारे में जो टिप्पणी की, उसने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया को जन्म दिया है। शिवसेना की वरिष्ठ नेत्री और विधान परिषद की उपसभापति डॉ. नीलम गोऱ्हे ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए गायिका की टिप्पणी को संविधान विरोधी और महिला विरोधी बताया है।

विवाद की शुरुआत

भंडारा में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के मंच से गायिका अंजली भारती ने बलात्कार जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बोलते हुए अमृता फडणवीस के संदर्भ में ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया जो पूरी तरह से आपत्तिजनक और अमर्यादित थी। उनकी इस टिप्पणी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने इसकी कड़ी निंदा शुरू कर दी।

गायिका ने अपने बयान में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर चर्चा करते हुए प्रतिशोध की भाषा का उपयोग किया था, जो न केवल कानूनी रूप से गलत है बल्कि सामाजिक सद्भाव के लिए भी खतरनाक है।

डॉ. नीलम गोऱ्हे की कड़ी प्रतिक्रिया

विधान परिषद की उपसभापति डॉ. नीलम गोऱ्हे ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी भी महिला के बारे में, वह भी एक महिला द्वारा, इस प्रकार की भाषा का प्रयोग बेहद शर्मनाक है। उन्होंने कहा, “न्याय के नाम पर हिंसक और अमानवी भाषा को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। यह संविधान की मर्यादा के खिलाफ है और महिलाओं के सम्मान के विरुद्ध है।”

डॉ. गोऱ्हे ने यह भी कहा कि बलात्कार जैसे गंभीर अपराध के बदले बलात्कार की बात करना या पुरुषों के निजी अंगों को नुकसान पहुंचाने जैसी बातें समाज को गलत दिशा में ले जाती हैं। ऐसे बयान हिंसा की श्रृंखला को बढ़ावा देते हैं और कानून व्यवस्था को कमजोर करते हैं।

संविधानिक मर्यादाओं का सवाल

शिवसेना नेत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय संविधान में हर नागरिक को सम्मान के साथ जीने का अधिकार है। किसी भी व्यक्ति, विशेषकर महिलाओं के खिलाफ इस तरह की भाषा का प्रयोग मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के आयोजकों की भी जिम्मेदारी बनती है कि मंच से दिए जाने वाले वक्तव्य संविधानिक मर्यादाओं और सामाजिक संवेदनशीलता के अनुरूप हों।

डॉ. गोऱ्हे ने कहा कि दलित समाज और महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों की निंदा जरूरी है, लेकिन इसके लिए संवैधानिक और कानूनी रास्ते मौजूद हैं। न्याय की मांग के लिए अमानवी भाषा का सहारा लेना किसी भी हालत में उचित नहीं ठहराया जा सकता।

महिला सम्मान और सामाजिक जिम्मेदारी

यह घटना महिला सम्मान और सार्वजनिक मंचों पर जिम्मेदार भाषा के इस्तेमाल के सवाल को फिर से उठाती है। विशेष रूप से तब जब एक महिला ही दूसरी महिला के खिलाफ इतनी आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करती है, तो यह समाज के लिए चिंता का विषय बन जाता है।

डॉ. गोऱ्हे ने कहा कि महिला सशक्तिकरण का मतलब यह नहीं है कि महिलाएं एक-दूसरे के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करें। समाज में महिलाओं की स्थिति को मजबूत करने के लिए एकजुटता और सम्मान की भाषा जरूरी है, न कि हिंसा और नफरत की।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

इस विवाद पर विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेताओं ने गायिका अंजली भारती की टिप्पणी को निंदनीय बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है। कुछ महिला संगठनों ने भी इस घटना के खिलाफ आवाज उठाई है और कहा है कि ऐसी भाषा महिलाओं के खिलाफ अप्रत्यक्ष रूप से हिंसा को बढ़ावा देती है।

हालांकि, कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा है कि गायिका ने दलित महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों के संदर्भ में यह टिप्पणी की थी, लेकिन इसका तरीका गलत था। उन्होंने कहा कि संवेदनशील मुद्दों पर बोलते समय भाषा और शब्दों का चयन बेहद सावधानी से करना चाहिए।

कानूनी कार्रवाई की मांग

डॉ. नीलम गोऱ्हे ने राज्य महिला आयोग और गृह विभाग से इस मामले में तुरंत संज्ञान लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जब तक इस तरह के बयानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक सार्वजनिक मंचों पर जिम्मेदार भाषा का इस्तेमाल सुनिश्चित नहीं किया जा सकता।

उन्होंने यह भी कहा कि कानून सभी के लिए समान है और किसी को भी संविधान की मर्यादा का उल्लंघन करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। गायिका अंजली भारती के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

समाज को सही दिशा देना जरूरी

Amruta Fadnavis Controversy: डॉ. गोऱ्हे ने अपने बयान में इस बात पर भी जोर दिया कि समाज को सही दिशा दिखाना बेहद जरूरी है। बलात्कार जैसे जघन्य अपराध के खिलाफ सख्त कानून और त्वरित न्याय की व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन इसके लिए प्रतिशोध की भाषा का सहारा लेना सही रास्ता नहीं है।

उन्होंने कहा कि न्याय प्रणाली को मजबूत बनाने, महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अपराधियों को सख्त सजा दिलाने की दिशा में काम करना होगा। हिंसा से हिंसा का जवाब देना समाधान नहीं है।

भंडारा में हुई इस घटना ने एक बार फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सार्वजनिक मंचों पर कितनी जिम्मेदारी से भाषा का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। महिलाओं के सम्मान, संविधानिक मर्यादाओं और सामाजिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए ही किसी भी मुद्दे पर बोलना चाहिए। डॉ. नीलम गोऱ्हे की कड़ी प्रतिक्रिया ने इस मामले को गंभीरता से लेने की जरूरत को रेखांकित किया है।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।