पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। राज्य में सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। एक तरफ सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस अपनी जमीन मजबूत करने में लगी है, तो दूसरी तरफ बीजेपी भी पूरी ताकत से चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद न्यायिक निगरानी में SIR का काम शुरू हो गया है। साथ ही चुनाव आयोग ने केंद्रीय बलों की तैनाती की योजना को अंतिम रूप दे दिया है।
बंगाल की सियासत में नया मोड़
पश्चिम बंगाल की राजनीति में हमेशा से तीखी लड़ाई देखने को मिलती है। इस बार भी चुनाव से पहले राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति तय कर ली है। तृणमूल कांग्रेस की मुख्यमंत्री अपनी महिला वोटरों को साधने में जुटी हैं। वहीं बीजेपी भी महिला मतदाताओं को अपनी तरफ खींचने के लिए विशेष योजना बना रही है।
शुभेंदु अधिकारी की राष्ट्रवादी महिलाओं से अपील
बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने राज्य की राष्ट्रवादी महिलाओं से एकजुट होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बंगाल में जीतने के लिए राष्ट्रवादी महिलाओं को एकजुट होना जरूरी है। उनका कहना है कि तृणमूल कांग्रेस ने महिला मुख्यमंत्री के जरिए महिला मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश की है। अब बीजेपी को भी इसी रणनीति पर काम करना होगा। यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या बीजेपी तृणमूल के दिखाए रास्ते पर चलेगी।
न्यायिक निगरानी में SIR का काम शुरू
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक अब SIR यानी Special Summary Revision का काम न्यायिक निगरानी में होगा। अब तक चुनाव आयोग के खिलाफ SIR के काम को लेकर कई राजनीतिक दलों ने शिकायतें की थीं। विपक्षी दलों का आरोप था कि SIR का काम पारदर्शी तरीके से नहीं हो रहा है। अब न्यायिक निगरानी शुरू होने से उम्मीद है कि स्थिति बदलेगी और मतदाता सूची में सुधार का काम निष्पक्ष तरीके से होगा।
केंद्रीय बलों की तैनाती की तैयारी
चुनाव आयोग ने पुलिस और केंद्रीय बलों के साथ बैठक की है। 1 मार्च से पश्चिम बंगाल में केंद्रीय बल तैनात किए जाएंगे। चुनाव में केंद्रीय बलों की भूमिका और उनके इस्तेमाल को लेकर अतीत में विपक्षी और सत्तारूढ़ दल दोनों ने कई बार आरोप लगाए हैं। कुछ दलों का कहना है कि केंद्रीय बल एक पक्ष का साथ देते हैं, तो कुछ का कहना है कि बल की मौजूदगी से निष्पक्ष चुनाव होता है। अब केंद्रीय बलों की भूमिका को लेकर सभी दलों की निगाहें लगी हैं।
सुप्रीम कोर्ट में डेरेक ओ ब्रायन बनाम चुनाव आयोग केस
सुप्रीम कोर्ट में डेरेक ओ ब्रायन बनाम चुनाव आयोग का मामला भी चर्चा में है। इस मामले में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए गए हैं। अदालत के फैसले से चुनाव की प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है। राजनीतिक दल इस मामले के नतीजे का इंतजार कर रहे हैं।
मुकुल रॉय का निधन
इसी बीच पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा नाम मुकुल रॉय का 72 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। मुकुल रॉय कभी तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। बाद में वे बीजेपी में शामिल हुए और फिर दोबारा तृणमूल में लौट गए। उनके निधन से राज्य की राजनीति में एक खालीपन आ गया है। विभिन्न राजनीतिक दलों ने उनके निधन पर शोक जताया है।
चुनाव की तैयारियां और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
चुनाव की तैयारियों के बीच राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीति बना रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस अपनी विकास योजनाओं को आगे बढ़ा रही है। बीजेपी विपक्ष की भूमिका मजबूत करने के साथ-साथ जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने में जुटी है। कांग्रेस और वाम दल भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश कर रहे हैं।
राज्य के विभिन्न हिस्सों में राजनीतिक रैलियां और सभाएं हो रही हैं। नेता जनता से सीधा संवाद कर रहे हैं। हर दल यह दावा कर रहा है कि इस बार जीत उसी की होगी। लेकिन असली फैसला तो मतदाता ही करेंगे।
आने वाले दिनों में क्या होगा
West Bengal Election 2026 Central Forces Deployment: अगले कुछ महीनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति और भी गरमाने वाली है। केंद्रीय बलों की तैनाती के बाद सुरक्षा का माहौल कैसा रहता है, यह देखना दिलचस्प होगा। न्यायिक निगरानी में SIR का काम कितना पारदर्शी होता है, इस पर भी सबकी नजर है। चुनाव आयोग की तैयारियां और राजनीतिक दलों की रणनीति, दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।