नागपुर में मनाई गई राष्ट्रसंत गाडगे बाबा की 150वीं जयंती
Gadge Baba 150th Jayanti Nagpur: नागपुर शहर में सोमवार के दिन एक ऐतिहासिक दिन मनाया गया। महात्मा ज्योतिबा फुले संशोधन व प्रशिक्षण संस्था, जिसे महाज्योती के नाम से जाना जाता है, में महान संत और समाज सुधारक राष्ट्रसंत गाडगे बाबा की 150वीं जयंती बड़ी धूमधाम से मनाई गई। यह कार्यक्रम संस्था परिसर में आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित हुए।
गाडगे बाबा ऐसे महापुरुष थे जिन्होंने अपना पूरा जीवन समाज सेवा में लगा दिया। उन्होंने स्वच्छता, शिक्षा और समानता का संदेश पूरे महाराष्ट्र में फैलाया। उनकी 150वीं जयंती पर आयोजित इस कार्यक्रम में उनके विचारों और कार्यों को याद किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत और श्रद्धांजलि
कार्यक्रम की शुरुआत महाज्योती संस्था के व्यवस्थापकीय संचालक मिलिंद नारिंगे ने की। उन्होंने गाडगे बाबा के चित्र पर पुष्पहार अर्पित करके उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान सभी उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर संत के प्रति अपना सम्मान व्यक्त किया। संस्था परिसर को विशेष रूप से सजाया गया था और गाडगे बाबा के जीवन से जुड़ी तस्वीरें और उनके उपदेशों को प्रदर्शित किया गया।
नारिंगे ने अपने संबोधन में कहा कि गाडगे बाबा ने समाज में फैली कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई और लोगों को सही रास्ता दिखाया। उन्होंने कहा कि आज भी उनके विचार और उनकी शिक्षाएं प्रासंगिक हैं।
गाडगे बाबा के सामाजिक कार्यों को किया याद
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने गाडगे बाबा के विभिन्न सामाजिक कार्यों को याद किया। उन्होंने बताया कि गाडगे बाबा ने स्वच्छता को सबसे अधिक महत्व दिया। वे गांव-गांव जाकर लोगों को साफ-सफाई का महत्व समझाते थे। उन्होंने कई स्थानों पर कुएं, तालाब और धर्मशालाएं बनवाईं जो आज भी मौजूद हैं।
वक्ताओं ने बताया कि गाडगे बाबा ने अंधविश्वास और रूढ़िवादी परंपराओं के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई। उन्होंने लोगों को शिक्षा की ओर प्रेरित किया और कहा कि शिक्षा ही समाज में बदलाव ला सकती है। उन्होंने जाति-पाति के भेदभाव को दूर करने के लिए भी काम किया और समाज में समानता का संदेश दिया।
स्वच्छता अभियान और समाज सुधार का संदेश
गाडगे बाबा का सबसे बड़ा योगदान स्वच्छता अभियान में रहा। वे खुद झाड़ू लेकर सड़कों और सार्वजनिक स्थानों को साफ करते थे। उनका मानना था कि स्वच्छता केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए ही नहीं बल्कि मानसिक शुद्धि के लिए भी जरूरी है। उन्होंने लोगों को सिखाया कि साफ-सफाई रखना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में मुख्य लेखा एवं वित्त अधिकारी प्रशांत वावगे ने कहा कि गाडगे बाबा ने समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर करने के लिए कीर्तन का माध्यम चुना। उनके कीर्तन सरल भाषा में होते थे जो आम लोगों को आसानी से समझ आते थे। उन्होंने अपने कीर्तनों के माध्यम से शिक्षा, स्वच्छता और समाज सेवा का संदेश फैलाया।
अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति
इस विशेष अवसर पर महाज्योती संस्था के कई वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। मुख्य लेखा एवं वित्त अधिकारी प्रशांत वावगे, लेखाधिकारी रश्मी तेलेवार, सहायक लेखाधिकारी वर्षा अहिर और परियोजना निदेशक कुणाल शिरसाठे ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया। सभी ने गाडगे बाबा के जीवन से प्रेरणा लेने और उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया।
कर्मचारियों ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया और कार्यक्रम को सफल बनाया। सभी ने मिलकर गाडगे बाबा के प्रिय भजन गाए और उनके विचारों पर चर्चा की।
गाडगे बाबा के आदर्शों पर चलने का संकल्प
Gadge Baba 150th Jayanti Nagpur: कार्यक्रम के समापन पर सभी उपस्थित लोगों ने गाडगे बाबा के आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। संस्था के संचालक मिलिंद नारिंगे ने कहा कि हमें गाडगे बाबा के दिखाए रास्ते पर चलकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाना चाहिए। उन्होंने सभी से अपील की कि वे अपने दैनिक जीवन में स्वच्छता का पालन करें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
उन्होंने कहा कि गाडगे बाबा की 150वीं जयंती केवल एक औपचारिकता नहीं बल्कि उनके विचारों को आत्मसात करने का अवसर है। हमें उनकी शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारना होगा तभी यह कार्यक्रम सार्थक होगा।
राष्ट्रसंत का महाराष्ट्र में योगदान
गाडगे बाबा को राष्ट्रसंत की उपाधि इसलिए दी गई क्योंकि उन्होंने पूरे देश में विशेषकर महाराष्ट्र में समाज सेवा का काम किया। उन्होंने हजारों लोगों की जिंदगी बदली और उन्हें सही दिशा दिखाई। उनका जीवन सादगी और त्याग का प्रतीक था। वे कभी भी अपने लिए कुछ नहीं चाहते थे और हमेशा दूसरों की भलाई के बारे में सोचते थे।
महाज्योती संस्था ने यह कार्यक्रम आयोजित करके गाडगे बाबा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की है। संस्था का मानना है कि ऐसे कार्यक्रमों से नई पीढ़ी को महापुरुषों के बारे में जानकारी मिलती है और वे उनसे प्रेरणा लेते हैं।