Chaitra Purnima 2026: भारतीय संस्कृति में कुछ तिथियां ऐसी होती हैं, जो सिर्फ कैलेंडर की तारीख नहीं बल्कि आस्था और विश्वास का प्रतीक बन जाती हैं। चैत्र पूर्णिमा भी उन्हीं खास दिनों में से एक है, जब श्रद्धालु पूरे मन से पूजा-पाठ, दान और व्रत के जरिए अपने जीवन में सुख-शांति की कामना करते हैं। यह दिन हिंदू नववर्ष की पहली पूर्णिमा होने के कारण और भी खास माना जाता है।
चैत्र पूर्णिमा की धार्मिक मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, चंद्रदेव और हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व होता है। कहा जाता है कि पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होता है, जिससे उसकी ऊर्जा का प्रभाव मन और शरीर पर सकारात्मक पड़ता है। इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य देने से मानसिक शांति, उत्तम स्वास्थ्य और जीवन में समृद्धि आती है।
तिथि और शुभ मुहूर्त
तिथि और शुभ मुहूर्त की बात करें तो साल 2026 में चैत्र पूर्णिमा 1 और 2 अप्रैल, दोनों दिन पड़ रही है। पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 1 अप्रैल की सुबह 7:06 बजे से हो रही है और इसका समापन 2 अप्रैल को सुबह 7:41 बजे होगा। शास्त्रों के अनुसार, जिस दिन शाम और रात के समय पूर्णिमा रहती है, उसी दिन व्रत और चंद्र पूजन करना श्रेष्ठ माना जाता है। इसलिए 1 अप्रैल को व्रत और चंद्र पूजा की जाएगी, जबकि 2 अप्रैल को स्नान-दान और हनुमान जयंती मनाई जाएगी।
चैत्र पूर्णिमा की पूजा विधि
चैत्र पूर्णिमा में शाम के समय चंद्रोदय के दौरान चंद्रमा को अर्घ्य देना बेहद शुभ माना जाता है। इसके लिए एक पात्र में जल, कच्चा दूध, अक्षत, सफेद फूल और थोड़ी चीनी मिलाकर अर्घ्य तैयार किया जाता है। चंद्रमा को देखते हुए “ॐ सोमाय नमः” मंत्र का जाप करते हुए अर्घ्य अर्पित किया जाता है। इसके बाद हाथ जोड़कर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
इन बातों का रखें खास ख्याल
इस दिन भगवान विष्णु की सत्यनारायण कथा सुनना या पढ़ना भी अत्यंत फलदायी माना गया है। साथ ही सफेद वस्तुओं जैसे चावल, चीनी, दूध या वस्त्र का दान करना विशेष पुण्य देता है।
हालांकि इस दिन कुछ सावधानियां भी रखनी जरूरी हैं। तामसिक भोजन जैसे लहसुन, प्याज और मांस-मदिरा से दूर रहें। मन को शांत रखें और किसी भी प्रकार के विवाद से बचें, क्योंकि पूर्णिमा का प्रभाव मन पर अधिक होता है।