युवतियों को निशाना बनाया
Nashik IT Company Case: महाराष्ट्र के नासिक में स्थित एक मल्टीनेशनल आईटी कंपनी से जुड़ा कथित यौन शोषण, उत्पीड़न और धार्मिक दबाव का मामला सामने आने के बाद राज्यभर में हलचल मच गई है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि कंपनी में कार्यरत कुछ कर्मचारियों ने महिला सहकर्मियों, विशेष रूप से 18 से 25 वर्ष आयु वर्ग की युवतियों को निशाना बनाया। आरोप है कि उन्हें नौकरी और करियर में आगे बढ़ाने का लालच दिया गया, शादी का झांसा दिया गया और इसके बाद उनके साथ शारीरिक संबंध बनाए गए। कई शिकायतों में यह भी कहा गया है कि पीड़ित महिलाओं का मानसिक उत्पीड़न किया गया, उन्हें ब्लैकमेल किया गया और कुछ मामलों में उन पर धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने तथा धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डाला गया।

6 से अधिक आरोपी को गिरफ्तार
Nashik IT Company Case: पुलिस के अनुसार इस मामले में अब तक कई एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और छह से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि यह घटनाएं पिछले कुछ वर्षों से लगातार चल रही थीं और इसमें शामिल कई आरोपी कंपनी में टीम लीडर या वरिष्ठ पदों पर थे, जिससे उन्हें जूनियर कर्मचारियों तक आसानी से पहुंच मिलती थी। एक शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर संबंध बनाए और बाद में पीड़िता का शोषण किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है और अन्य संभावित पीड़ितों से भी आगे आकर शिकायत दर्ज कराने की अपील की है।
एचआर विभाग पर उठते सवाल
Nashik IT Company Case: इस पूरे प्रकरण में कंपनी के मानव संसाधन (एचआर) विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। एक पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसने ईमेल के माध्यम से एचआर को शिकायत दी थी, लेकिन उसे गंभीरता से लेने के बजाय यह कहकर टाल दिया गया कि इस तरह की घटनाएं बड़ी कंपनियों में आम होती हैं। पुलिस ने इस पहलू को भी जांच में शामिल किया है और संबंधित अधिकारियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
नितेश राणे ने कहा – ‘कॉर्पोरेट जिहाद’
Nashik IT Company Case: मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नितेश राणे ने इस पूरे प्रकरण को “कॉर्पोरेट जिहाद” करार देते हुए इसे एक संगठित साजिश बताया है। उनका कहना है कि यह केवल एक आपराधिक घटना नहीं हो सकती, बल्कि इसके पीछे विशेष रूप से हिंदू महिलाओं को निशाना बनाने की योजना हो सकती है। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने की मांग की है। उनके इस बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कंपनी के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और मामले की व्यापक जांच की मांग उठाई। कुछ नेताओं ने इस घटना को “लव जिहाद” जैसे मुद्दों से भी जोड़ते हुए समाज को सतर्क रहने की सलाह दी।
धर्म से जोड़ने पर उद्धव ठाकरे की आपत्ति
Nashik IT Company Case: दूसरी ओर, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) के मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित संपादकीय में इस तरह की घटनाओं को धर्म से जोड़ने पर कड़ी आपत्ति जताई गई है। संपादकीय में कहा गया कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को किसी धर्म विशेष के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। इसमें आरोप लगाया गया कि जब आरोपी किसी विशेष धर्म से जुड़ा होता है, तब “जिहाद” जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर माहौल को भड़काया जाता है, लेकिन जब इसी तरह के आरोप किसी अन्य धर्म के व्यक्ति पर लगते हैं, तब वही लोग चुप्पी साध लेते हैं।
पुराने मामलों से तुलना और उठते सवाल
Nashik IT Company Case: संपादकीय में नासिक के ही एक अन्य चर्चित मामले, अशोक खरात प्रकरण का भी उल्लेख किया गया, जिसमें एक तथाकथित बाबा पर कई महिलाओं के साथ यौन शोषण और ब्लैकमेलिंग के गंभीर आरोप लगे थे। लेख में कहा गया कि वह मामला भी उतना ही गंभीर था, लेकिन उस समय इस तरह की राजनीतिक आक्रामकता या बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन नहीं हुए थे। इस तुलना के जरिए यह सवाल उठाया गया कि क्या अपराधों को धर्म के आधार पर अलग-अलग तरीके से देखा जा रहा है।
SIT की जांच जारी
Nashik IT Company Case: फिलहाल यह पूरा मामला जांच के अधीन है और पुलिस सभी पहलुओं की गहराई से जांच कर रही है, जिसमें यौन शोषण, कार्यस्थल उत्पीड़न, ब्लैकमेलिंग और कथित धार्मिक दबाव जैसे आरोप शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि एसआईटी की रिपोर्ट के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई स्पष्ट हो पाएगी। इस बीच, यह घटना एक बार फिर इस बहस को सामने लेकर आई है कि क्या आपराधिक मामलों को धर्म और राजनीति से जोड़ना उचित है या फिर उन्हें केवल कानून और न्याय के नजरिए से ही देखा जाना चाहिए।