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AAP Rajya Sabha split 2026: राज्यसभा में ‘आप’ को बड़ा झटका, 7 सासंद गये अब 3 ही बचे

AAP Rajya Sabha split 2026: राज्यसभा में ‘आप’ को बड़ा झटका, 7 सासंद गये अब 3 ही बचे
AAP Rajya Sabha split 2026: राज्यसभा में ‘आप’ को बड़ा झटका, 7 सासंद गये अब 3 ही बचे ( image- FB/@Santosh Kumar Singh )

Political Crisis : राज्यसभा में ‘आप’ की अचानक हुई बड़ी टूट ने राजनीति में हलचल मचा दी है। 7 सांसदों के अलग होने के बाद पार्टी कमजोर हो गई है और सत्ता समीकरण बदलते दिख रहे हैं। राघव चड्ढा के इस कदम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या यह सिर्फ राजनीतिक असहमति है या इससे भी बड़ा कोई बदलाव शुरू हो चुका है। अब सबकी नजर इस पर है कि आगे ‘आप’ और भारतीय राजनीति में क्या नया मोड़ आता है।

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‘आप’ की ताकत अब कमजोर

AAP Rajya Sabha split 2026: अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी को राज्यसभा में बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के 10 सांसदों में से 7 सांसदों ने राघव चड्ढा के साथ मिलकर पार्टी से अलग होने का फैसला किया है। इसके बाद अब राज्यसभा में ‘आप’ के पास केवल 3 सांसद बचे हैं। इस बदलाव के बाद संसद के ऊपरी सदन में ‘आप’ की ताकत काफी कमजोर हो गई है। राघव चड्ढा और उनके साथ कई अन्य सांसदों ने पार्टी से अलग होकर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का फैसला किया। राघव चड्ढा ने राज्यसभा में ‘आप’ के भीतर एक बड़े गुट का नेतृत्व करते हुए यह कदम उठाया।

AAP Rajya Sabha split 2026
AAP Rajya Sabha split 2026 ( image- FB/@Raghav Chadha )

लंबे समय से चल रहा था अंदरूनी तनाव

AAP Rajya Sabha split 2026: यह विवाद अचानक नहीं हुआ बल्कि पिछले कई महीनों से पार्टी के भीतर तनाव बढ़ रहा था। राघव चड्ढा और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेद लगातार गहराते जा रहे थे। सबसे बड़ा टकराव तब सामने आया जब राघव चड्ढा को राज्यसभा में ‘आप’ के डिप्टी लीडर पद से हटा दिया गया। उनकी जगह अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद पार्टी के भीतर असंतोष और बढ़ गया, जो धीरे-धीरे खुली बगावत में बदल गया।

क्या दल-बदल कानून से बच सकते हैं ?

AAP Rajya Sabha split 2026: राज्यसभा में ‘आप’ के कुल 10 सांसदों में से 7 सांसदों ने राघव चड्ढा के साथ मिलकर भाजपा में शामिल होने का निर्णय लिया। इनमें संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता और विक्रमजीत सिंह सहनी जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं। इन सांसदों ने दावा किया कि वे संविधान के तहत “दो-तिहाई बहुमत” के नियम के अनुसार पार्टी से अलग होकर एक नई राजनीतिक दिशा में जा रहे हैं, ताकि दल-बदल कानून के तहत अयोग्यता से बचा जा सके। इस फैसले के बाद ‘आप’ के पास राज्यसभा में केवल 3 सांसद बचे हैं, जिससे उसकी संसद में स्थिति काफी कमजोर हो गई है।

ईमानदार राजनीति से भटक गई ‘आप’

AAP Rajya Sabha split 2026: राघव चड्ढा ने कहा कि आम आदमी पार्टी अपने मूल सिद्धांतों और ईमानदार राजनीति से भटक गई है। उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्टी को वर्षों तक मजबूत करने में योगदान दिया, लेकिन अब पार्टी अपने मूल उद्देश्य से दूर चली गई है। वे खुद को “गलत पार्टी में सही व्यक्ति” महसूस कर रहे थे, इसलिए उन्होंने यह कठिन फैसला लिया। पार्टी में निर्णय लेने की प्रक्रिया, नेतृत्व शैली और आंतरिक लोकतंत्र में गंभीर समस्याएं थीं, जिसके कारण यह स्थिति बनी।

AAP Rajya Sabha split 2026
AAP Rajya Sabha split 2026 ( image – FB/@Arvind Kejriwal )

राजनीतिक बदलाव एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा : केजरीवाल

AAP Rajya Sabha split 2026: इस पूरे घटनाक्रम पर आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरा राजनीतिक बदलाव एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है और इसके पीछे भारतीय जनता पार्टी का हाथ है। केजरीवाल ने कहा कि ‘आप’ को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है क्योंकि पार्टी ने राष्ट्रीय राजनीति में तेजी से जगह बनाई है, खासकर दिल्ली और पंजाब में मजबूत प्रदर्शन के बाद।

‘स्टार्टअप से टूट तक’ का सफर

AAP Rajya Sabha split 2026: राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ‘आप’ का यह संकट उसकी तेजी से बढ़ती राजनीतिक यात्रा में एक बड़ा मोड़ है। जिस पार्टी को कभी “भारत का सबसे तेजी से बढ़ता राजनीतिक स्टार्टअप” कहा जाता था, वही पार्टी अब गंभीर अंदरूनी टूट का सामना कर रही है। ‘आप’ ने दिल्ली में तीन बार सरकार बनाई और पंजाब में भी बड़ी जीत हासिल की थी। लेकिन हाल के वर्षों में दिल्ली चुनावों में हार और नेतृत्व विवादों ने पार्टी की छवि को प्रभावित किया है। अब राज्यसभा में यह बड़ी टूट पार्टी की राष्ट्रीय राजनीति में स्थिति को और कमजोर कर सकती है।

AAP Rajya Sabha split 2026
AAP Rajya Sabha split 2026- ( image- FB/@Raghav Chadha )

चुनावों पर भी पड़ सकता है असर

AAP Rajya Sabha split 2026: विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटनाक्रम का असर केवल संसद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव आने वाले चुनावों पर भी पड़ सकता है। राज्यसभा में संख्या घटने के बाद ‘आप’ की विधायी ताकत कम हो गई है, जिससे उसकी राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका सीमित हो सकती है। वहीं भाजपा के लिए यह एक बड़ी राजनीतिक बढ़त मानी जा रही है, क्योंकि इससे ऊपरी सदन में उसकी स्थिति और मजबूत होगी। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी कहना है कि यह बदलाव आने वाले समय में विपक्षी राजनीति के संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

नए राजनीतिक समीकरण बनने की संभावना

AAP Rajya Sabha split 2026: ‘आप’, जो अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से निकली थी, हमेशा “नई और ईमानदार राजनीति” के दावे के साथ आगे बढ़ी थी। लेकिन अब वही पार्टी अपने ही नेताओं के आरोपों और बगावत का सामना कर रही है। राघव चड्ढा का पार्टी छोड़ना और राज्यसभा में इतनी बड़ी संख्या में सांसदों का अलग होना, ‘आप’ के लिए संगठनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ा झटका माना जा रहा है। राघव चड्ढा का यह कदम और राज्यसभा में ‘आप’ की बड़ी टूट भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। यह न केवल ‘आप’ के भविष्य को प्रभावित करेगा, बल्कि संसद में सत्ता संतुलन को भी बदल सकता है। राजनीतिक स्थिति अभी भी विकसित हो रही है और आने वाले दिनों में इस घटनाक्रम से जुड़े और भी नए राजनीतिक समीकरण सामने आ सकते हैं।


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Priyanka C. Mishra

प्रियंका सी. मिश्रा वरिष्ठ हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें समाचार लेखन, स्क्रिप्टिंग, रिपोर्टिंग और विश्लेषण में व्यापक अनुभव है। वे सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक विषयों के साथ-साथ बॉलीवुड, ज्योतिष, स्वास्थ्य और लाइफस्टाइल जैसे विविध क्षेत्रों पर लेखन करती हैं। जटिल मुद्दों को सरल और स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना उनकी विशेषता है। तथ्यों की सटीकता, निष्पक्ष दृष्टिकोण और संवेदनशील शैली के कारण उन्होंने पाठकों का विश्वास अर्जित किया है। पत्रकारिता, हिंदी कंटेंट निर्माण और यूट्यूब स्क्रिप्ट लेखन के प्रति वे समर्पित हैं।