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10वीं टॉपर प्राची निगम के 12वीं में कितने आए मार्क्स? चेहरे पर बाल के कारण हुई थीं वायरल

10वीं टॉपर प्राची निगम के 12वीं में कितने आए मार्क्स? चेहरे पर बाल के कारण हुई थीं वायरल
10वीं टॉपर प्राची निगम के 12वीं में कितने आए मार्क्स? चेहरे पर बाल के कारण हुई थीं वायरल (File Photo)

यूपी बोर्ड 10वीं की टॉपर प्राची निगम ने 12वीं में 91.20% अंक हासिल किए हैं। कभी चेहरे पर बाल को लेकर ट्रोल हुई प्राची अब अपने शानदार प्रदर्शन से फिर चर्चा में हैं। उन्होंने गणित, हिंदी और साइंस में बेहतरीन अंक लाकर साबित किया कि मेहनत ही असली पहचान होती है।

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Prachi Nigam: दो साल पहले यूपी बोर्ड 10वीं परीक्षा में पूरे प्रदेश में टॉप करने वाली प्राची निगम अपने अंकों से ज्यादा चेहरे पर बाल होने के कारण सुर्खियों में आ गयी थी. वहीं प्राची निगम एक बार फिर से चर्चा में है, इस बार वजह है उनका 12वीं का रिजल्ट, जिसमें उन्होंने 91.20 प्रतिशत अंक हासिल कर अपनी मेहनत और लगन का लोहा फिर मनवाया है। सीतापुर की रहने वाली प्राची ने यह साबित कर दिया कि असली पहचान चेहरे से नहीं, बल्कि काबिलियत और मेहनत से बनती है। प्राची का सपना है कि वह आईआईटी से पढ़ाई कर एक सफल इंजीनियर बनें।

चेहरे पर बाल के कारण ट्रोल हुई थी प्राची

प्राची का नाम 2024 में तब पूरे देश में चर्चा का विषय बना था, जब उन्होंने यूपी बोर्ड हाईस्कूल परीक्षा में टॉप किया था। हालांकि उस समय उनकी सफलता के साथ-साथ उन्हें सोशल मीडिया पर चेहरे पर बाल होने को लेकर ट्रोलिंग का भी सामना करना पड़ा था। कई लोगों ने उनकी उपलब्धि को नजरअंदाज कर उनकी शक्ल पर टिप्पणी की, लेकिन प्राची ने उस वक्त भी हिम्मत नहीं हारी और अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखा।

कैसा है 12वीं का रिजल्ट ?

अब 12वीं के नतीजों में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया है। गणित में 99 अंक, हिंदी में 96, केमिस्ट्री में 95 और फिजिक्स में 93 अंक लाकर उन्होंने अपने मजबूत विषयों में बेहतरीन पकड़ दिखाई। हालांकि अंग्रेजी में उन्हें 73 अंक मिले, जिसकी वजह से वह मेरिट लिस्ट में जगह बनाने से थोड़ी दूर रह गईं। खुद प्राची का कहना है कि उनका फोकस जेईई और आईआईटी एंट्रेंस की तैयारी पर ज्यादा रहा, जिससे अंग्रेजी विषय पर उतना ध्यान नहीं दे पाईं।

ट्रोलिंग से फर्क नहीं पड़ता

ट्रोलिंग के दौर को याद करते हुए प्राची ने पहले ही साफ कर दिया था कि उन्हें ऐसे कमेंट्स से कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने कहा था कि लोगों को उनके चेहरे से नहीं, बल्कि उनके काम और अंकों से उन्हें आंकना चाहिए। उन्होंने चाणक्य का उदाहरण देते हुए यह भी बताया था कि महान बनने के लिए बाहरी रूप नहीं, बल्कि सोच और मेहनत जरूरी होती है।

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Dipali Kumari

दीपाली कुमारी पिछले तीन वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में कार्यरत हैं। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर लिखने में उनकी विशेष रुचि है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को धारदार लेखन के माध्यम से सामने लाना उनका प्रमुख लक्ष्य है।