Tej Pratap meets Prashant Kishor: राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव और राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर के बीच हुई मुलाकात ने एक बार फिर बिहार की सियासत में हलचल मचा दी है। इस मुलाकात की कुछ तस्वीरें सामने आई है, जिसने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। इस मुलाकात को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या राज्य में कोई नया सियासी समीकरण आकार ले रहा है।
तेज प्रताप यादव ने खुद शेयर किया वीडियो
इस मुलाकात की खास बात यह रही कि तेज प्रताप यादव ने खुद इसका वीडियो अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर साझा किया। आमतौर पर नेताओं की ऐसी मुलाकातों को औपचारिक या शिष्टाचार भेंट बताया जाता है, लेकिन तेज प्रताप ने साफ कर दिया कि यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक नहीं थी, बल्कि इसमें गंभीर राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा हुई है।
अपने पोस्ट में तेज प्रताप यादव ने लिखा कि उनकी प्रशांत किशोर के साथ बातचीत जनहित, जनता की अपेक्षाओं और भविष्य की राजनीति को लेकर केंद्रित रही। उन्होंने इसे अपने राजनीतिक जीवन का एक महत्वपूर्ण अनुभव बताया और कहा कि इस संवाद ने उन्हें सकारात्मक सोच और जनसेवा के प्रति और मजबूती से आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है।
आज का दिन राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण रहा। मेरी मुलाकात Prashant Kishor जी से हुई, जहाँ हमने जनहित और भविष्य की राजनीति को लेकर गहन चर्चा की।
इस दौरान जनता की अपेक्षाओं और बदलते राजनीतिक समीकरणों पर विस्तार से बात हुई। यह मुलाकात केवल औपचारिक नहीं थी, बल्कि इसमें कई ऐसे… pic.twitter.com/ARcOHdbjHx
— Tej Pratap Yadav (@TejYadav14) April 21, 2026
तेज प्रताप ने तेजस्वी यादव और सम्राट चौधरी को किया टैग
सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि तेज प्रताप यादव ने इस पोस्ट में अपने छोटे भाई और बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव, मौजूदा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी को टैग किया। यह कदम अपने आप में कई राजनीतिक संकेत दे रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह का टैग करना महज संयोग नहीं हो सकता, बल्कि इसके पीछे कोई बड़ा संदेश छिपा हो सकता है।
क्या बन रहा कोई नया गठबंधन ?
बिहार की राजनीति में पहले भी ऐसे कई मौके आए हैं जब नेताओं की मुलाकातों ने बड़े सियासी बदलावों की नींव रखी है। ऐसे में तेज प्रताप और प्रशांत किशोर की यह मुलाकात भी भविष्य में किसी नए गठबंधन या रणनीति की ओर इशारा कर सकती है।
हालांकि, अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से औपचारिक रूप से कोई राजनीतिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन जिस तरह से इस मुलाकात को ‘औपचारिक नहीं’ बताया गया है, उसने अटकलों को और हवा दे दी है।