‘सुराज्य अभियान’ ने उठाए गंभीर सवाल
NGT Violation Tree Protection India: शहरी विकास और सौंदर्यीकरण के नाम पर पेड़ों को नुकसान पहुंचाने के आरोपों के बीच ‘सुराज्य अभियान’ ने गंभीर सवाल उठाए हैं और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के नियमों का उल्लंघन करने वालों पर आपराधिक कार्रवाई की मांग की है। यह मुद्दा ‘विश्व पृथ्वी दिवस’ के अवसर पर मुंबई मराठी पत्रकार संघ में आयोजित पत्रकार परिषद में प्रमुखता से उठाया गया।

सड़क निर्माण में पेड़ों को नुकसान का आरोप
NGT Violation Tree Protection India: इस दौरान ‘सुराज्य अभियान’ के राज्य समन्वयक अभिषेक मुरुकटे ने कहा कि सड़क और फुटपाथ निर्माण के दौरान पेड़ों के तनों तक कंक्रीट भर दिया जाता है, जिससे उनकी जड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब यह स्पष्ट रूप से राष्ट्रीय हरित अधिकरण के दिशानिर्देशों का उल्लंघन है, तो दोषी ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 (एनजीटी एक्ट 2010) की धारा 26 के तहत आपराधिक कार्रवाई क्यों नहीं की जाती। इस पत्रकार परिषद में डॉ. उदय धुरी, प्रथमेश गायकवाड़ और गणेश कोली भी उपस्थित थे।

महाराष्ट्र और कर्नाटक में निरीक्षण में गंभीर स्थिति उजागर
NGT Violation Tree Protection India: सुराज्य अभियान के अनुसार, महाराष्ट्र के मुंबई, पुणे, नागपुर, नाशिक, सोलापुर, सांगली, सातारा, कोल्हापुर और जळगांव सहित कर्नाटक के कुछ क्षेत्रों में किए गए निरीक्षण में यह पाया गया कि कई स्थानों पर पेड़ों के चारों ओर कंक्रीट डालकर उनकी जड़ों को दबाया जा रहा है। संगठन का कहना है कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण के उन स्पष्ट निर्देशों का उल्लंघन है, जिनमें पेड़ों के आसपास कम से कम खुली मिट्टी छोड़ना अनिवार्य बताया गया है।
सार्वजनिक धन के उपयोग पर उठते सवाल
NGT Violation Tree Protection India: इस पूरे मामले में सबसे गंभीर तथ्य पुणे से सामने आया है, जहां पुणे महानगरपालिका ने स्वीकार किया है कि पिछले दो वर्षों में लगाए गए 17,533 पेड़ों के जीवित रहने (सर्वाइवल) से संबंधित कोई अद्यतन आधिकारिक डेटा उपलब्ध नहीं है। अभियान का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में लगाए गए पेड़ों का रिकॉर्ड न होना प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है तथा इससे सार्वजनिक धन के उपयोग पर भी प्रश्न उठते हैं।
पर्यावरणीय प्रभाव और वैज्ञानिक चिंता
NGT Violation Tree Protection India: विशेषज्ञों के अनुसार, पेड़ों के आसपास कंक्रीट होने से उनकी जड़ों तक हवा और पानी का प्रवाह बाधित हो जाता है, जिससे उनका विकास रुक सकता है और वे धीरे-धीरे नष्ट भी हो सकते हैं। इसके साथ ही यह स्थिति भूजल पुनर्भरण को प्रभावित करती है और शहरी क्षेत्रों में बढ़ते तापमान, जिसे ‘अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट’ कहा जाता है, को और गंभीर बना सकती है।

वृक्ष संजीवनी अभियान पर सवाल
NGT Violation Tree Protection India: मुंबई में 1 अप्रैल 2026 से शुरू किए गए ‘वृक्ष संजीवनी’ अभियान, जिसके तहत पेड़ों के आसपास जमा कंक्रीट हटाने का कार्य किया जा रहा है, पर भी सवाल उठाए गए हैं। अभियान का कहना है कि यदि निर्माण कार्य के दौरान ही नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित नहीं किया गया, तो ऐसे अभियान केवल अस्थायी समाधान बनकर रह जाते हैं।
कानूनी कार्रवाई और मांगें
NGT Violation Tree Protection India: सुराज्य अभियान ने मांग की है कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 की धारा 26 के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाले ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों पर आपराधिक मामले दर्ज किए जाएं। साथ ही सड़क और फुटपाथ निर्माण के ठेकों में यह अनिवार्य शर्त जोड़ी जाए कि पेड़ों के आसपास कम से कम एक मीटर क्षेत्र खुला और कच्चा छोड़ा जाएगा। इसके अतिरिक्त, पिछले तीन वर्षों में किए गए वृक्षारोपण का स्वतंत्र थर्ड-पार्टी ऑडिट कर वास्तविक आंकड़े सार्वजनिक करने की भी मांग की गई है।
चेतावनी और आगे की कार्रवाई
NGT Violation Tree Protection India: अभियान ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वह नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (राष्ट्रीय हरित अधिकरण) में शिकायत दर्ज कराने के साथ-साथ अवमानना याचिका दायर करने जैसे कानूनी विकल्पों का सहारा लेगा।