
कुछ घंटों में बिछ गई लाशें, पूरे पुणे में मचा हड़कंप
Pune Toxic Liquor Case: महाराष्ट्र के पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में सामने आया जहरीली शराब कांड पूरे राज्य को हिला देने वाली घटना बन गया है। कुछ ही घंटों के भीतर कई लोगों की मौत और दर्जनों लोगों के बीमार पड़ने से प्रशासन में अफरा-तफरी मच गई। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि अवैध देशी शराब में मेथेनॉल जैसे जहरीले रसायन की मिलावट की गई थी। यही मिलावटी शराब लोगों की मौत का कारण बनी। पुलिस, राज्य आबकारी विभाग और सीआईडी अब इस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटे हैं।
फुगेवाड़ी और हडपसर से शुरू हुई मौतों की श्रृंखला
घटना की शुरुआत पिंपरी-चिंचवड़ के फुगेवाड़ी इलाके और पुणे के हडपसर क्षेत्र से हुई, जहां एक के बाद एक लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। कई लोगों को चक्कर आना, सांस लेने में तकलीफ, बेचैनी, उल्टी और मुंह से झाग निकलने जैसी शिकायतें हुईं। कुछ लोगों की हालत इतनी गंभीर हो गई कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो गई।
शुरुआत में मौतों का आंकड़ा कम बताया गया, लेकिन बाद में यह संख्या लगातार बढ़ती गई। अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 15 से 18 तक बताई गई, जबकि कुछ स्थानीय दावों और सोशल मीडिया पोस्टों में यह आंकड़ा 20 तक बताया गया। प्रशासन का कहना है कि अंतिम संख्या पोस्टमार्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
जहरीले एसिड में बदल जाता है मेथेनॉल
जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि अवैध शराब में मेथेनॉल मिलाया गया था। मेथेनॉल एक बेहद खतरनाक औद्योगिक रसायन है जिसका इस्तेमाल पेंट, केमिकल और सॉल्वेंट बनाने में होता है। इसे पीना इंसानी शरीर के लिए जानलेवा साबित होता है। डॉक्टरों के मुताबिक मेथेनॉल शरीर में जाकर जहरीले एसिड में बदल जाता है, जिससे आंखों की रोशनी जा सकती है, दिमाग और नसों पर असर पड़ता है और कुछ ही घंटों में मौत तक हो सकती है। यही वजह है कि इस मामले में कई लोगों की हालत अचानक बिगड़ी और मौतें तेजी से हुईं।
योगेश वानखेड़े मास्टरमाइंड
पुलिस जांच में योगेश वानखेड़े नाम के व्यक्ति को मुख्य सप्लायर बताया गया है। आरोप है कि उसी ने अवैध शराब की सप्लाई पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ के अलग-अलग इलाकों में करवाई। पुलिस ने उसके समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह कोई छोटा धंधा नहीं था, बल्कि एक संगठित अवैध शराब नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था। पुलिस ने उरुली कांचन और आसपास के इलाकों में छापेमारी कर अवैध शराब बनाने का सामान भी जब्त किया है।
प्रशासन पर उठे सवाल, विपक्ष ने सरकार को घेरा
इस पूरे मामले ने प्रशासन और सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि इलाके में लंबे समय से अवैध शराब का कारोबार चल रहा था, लेकिन पुलिस और आबकारी विभाग ने समय रहते कार्रवाई नहीं की। एनसीपी (एसपी) नेता रोहित पवार ने हडपसर क्षेत्र में जाकर अवैध शराब के अड्डे पर कार्रवाई की और सरकार पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अगर पहले कार्रवाई हुई होती तो इतनी जानें नहीं जातीं।
महाराष्ट्र में पहले भी मौत बन चुकी है जहरीली शराब
- महाराष्ट्र में यह पहली बार नहीं हुआ है जब जहरीली शराब ने लोगों की जान ली हो। राज्य में पहले भी कई बड़ी त्रासदियां हो चुकी हैं।
- 2015 में मुंबई के मालवणी इलाके में जहरीली शराब पीने से 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। उस मामले में भी मेथेनॉल मिलावट सामने आई थी।
- लातूर और मराठवाड़ा क्षेत्र में भी अवैध शराब से कई लोगों की जान जा चुकी है।
- देश के दूसरे राज्यों में भी ऐसी घटनाएं होती रही हैं। गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु में भी मेथेनॉल मिश्रित शराब ने बड़ी संख्या में लोगों की जान ली थी।
सस्ती शराब का लालच और मौत का कारोबार
Pune Toxic Liquor Case: बार-बार होने वाली इन घटनाओं के पीछे सबसे बड़ी वजह सस्ती शराब की मांग और अवैध शराब माफिया का नेटवर्क माना जाता है। गरीब और मजदूर वर्ग के लोग कम दाम में शराब खरीदते हैं और माफिया ज्यादा मुनाफे के लिए उसमें जहरीले केमिकल मिला देते हैं। कई बार स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक लापरवाही और संरक्षण के आरोप भी सामने आते हैं। इस मामले में भी यह सवाल उठ रहा है कि आखिर अवैध शराब का कारोबार इतने लंबे समय तक खुलेआम कैसे चलता रहा।

ई-कॉमर्स से खरीदा गया मेथेनॉल, जांच में बड़ा खुलासा
इस घटना ने एक और गंभीर पहलू उजागर किया है कि मेथेनॉल जैसे खतरनाक रसायन आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं। जांच में यह बात सामने आई कि आरोपी ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए मेथेनॉल खरीदा था। इससे ऑनलाइन केमिकल बिक्री की निगरानी पर भी सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मेथेनॉल जैसी चीजों की खरीद-बिक्री पर सख्त डिजिटल ट्रैकिंग होनी चाहिए ताकि उनका गलत इस्तेमाल रोका जा सके।
सिर्फ छापेमारी नहीं, सिस्टम बदलने की जरूरत
सरकार ने मामले की जांच सीआईडी को सौंप दी है और अवैध शराब के खिलाफ बड़े अभियान की बात कही है। लेकिन हर बार किसी बड़ी त्रासदी के बाद कार्रवाई होना और कुछ समय बाद मामला ठंडा पड़ जाना भी एक बड़ी समस्या रही है। अगर सच में ऐसी घटनाओं को रोकना है तो सिर्फ छापेमारी काफी नहीं होगी। शराब की सप्लाई चेन पर निगरानी, अवैध भट्टियों पर लगातार कार्रवाई, मेथेनॉल बिक्री पर नियंत्रण और स्थानीय पुलिस की जवाबदेही तय करना जरूरी होगा। साथ ही लोगों को भी जागरूक करना होगा कि बिना लेबल और बेहद सस्ती शराब जानलेवा हो सकती है।
आखिर कब रुकेगा मौत का यह कारोबार?
Pune Toxic Liquor Case: पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ की यह घटना सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि सिस्टम की कई कमजोरियों को उजागर करने वाली त्रासदी बन गई है। कई परिवारों ने अपने लोगों को खो दिया, कई लोग अस्पतालों में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं और पूरा राज्य इस सवाल का जवाब ढूंढ रहा है कि आखिर ऐसी घटनाएं बार-बार क्यों दोहराई जाती हैं।