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ToggleBihar Cabinet Expansion: बिहार की राजनीति में एक बड़ा और दिलचस्प मोड़ सामने आ रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार बनने के 22 दिन बाद अब मंत्रिमंडल विस्तार की तारीख तय हो गई है। 7 मई को राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में भव्य शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होगा, जहां नए मंत्री पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे।
इस आयोजन को लेकर प्रशासनिक तैयारियां जोरों पर हैं। वीवीआईपी मूवमेंट को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह समेत कई बड़े नेता शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री भी इस खास मौके के गवाह बनेंगे।
बिहार में 7 मई को कैबिनेट विस्तार!
बंगाल चुनाव जीत के बाद तैयारी तेज.!
पहली बार बंगाल में बीजेपी की सरकार—बिहार में भी पहला बीजेपी CM,इस शपथ समारोह को भव्य बनाने की तैयारी, बीजेपी के सारे बड़े नेता मौजूद होंगे समारोह में .! #Bihar #cabinet pic.twitter.com/tpTTvJDK48
— Mukesh singh (@Mukesh_Journo) May 5, 2026
50-50 फॉर्मूले पर होगा कैबिनेट विस्तार
दिलचस्प बात यह है कि इस बार बिहार की सत्ता का समीकरण “50-50 फॉर्मूले” पर तय हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा और जदयू के बीच मंत्रियों की संख्या बराबर रखी जाएगी। जदयू प्रमुख नीतीश कुमार द्वारा मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद यह संतुलन साधा गया है। ऐसे में सम्राट सरकार में भाजपा और जदयू के लगभग बराबर मंत्री होंगे, जबकि सहयोगी दलों—लोजपा (आर), हम और अन्य को भी प्रतिनिधित्व मिलेगा।
कुल 33 पद खाली
मंत्रिमंडल में कुल 33 पद अभी खाली हैं, जिन्हें इस विस्तार में भरा जाएगा। खास बात यह है कि कई नए चेहरों को मौका मिलने की संभावना जताई जा रही है। जातीय और क्षेत्रीय संतुलन के साथ-साथ संगठन में सक्रिय नेताओं को भी प्राथमिकता दी जा सकती है। वहीं, कुछ पुराने मंत्रियों के विभागों में बदलाव की चर्चा भी तेज है।
अमित शाह समेत कई शीर्ष नेताओं से मुलाकात
इससे पहले सम्राट चौधरी ने दिल्ली में अमित शाह और भाजपा के अन्य शीर्ष नेताओं से मुलाकात की थी। पटना लौटने के बाद उन्होंने नीतीश कुमार से भी मुलाकात कर विस्तार को लेकर अंतिम रणनीति पर चर्चा की। माना जा रहा है कि दिल्ली से मिले निर्देशों के बाद ही अब इस कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया गया है।
गांधी मैदान रचेगा इतिहास
गांधी मैदान में इस तरह का आयोजन अपने आप में खास है। आमतौर पर यहां मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण होता रहा है, लेकिन पहली बार ऐसा होगा जब सिर्फ मंत्रियों का सामूहिक शपथ ग्रहण आयोजित किया जाएगा। इसे सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि शक्ति प्रदर्शन और आने वाले राजनीतिक संकेतों के तौर पर भी देखा जा रहा है।