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जम्मू-कश्मीर में जबरदस्त बर्फबारी: ठंड ने तोड़े रिकॉर्ड, तापमान माइनस में, जम्मू-श्रीनगर हाईवे बंद

जम्मू-कश्मीर में जबरदस्त बर्फबारी: ठंड ने तोड़े रिकॉर्ड, तापमान माइनस में, जम्मू-श्रीनगर हाईवे बंद
जम्मू-कश्मीर में जबरदस्त बर्फबारी (Source- X @kaankit)

उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में भारी बर्फबारी से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में सड़कें बंद हैं, उड़ानें रद हुई हैं और राहत-बचाव कार्य जारी है। ठंड और फिसलन ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

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Dipali Kumari
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Snowfall Jammu Kashmir: उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में इस बार सर्दी ने अपनी पूरी ताकत दिखा दी है। जम्मू-कश्मीर से लेकर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश तक पहाड़ों पर हो रही लगातार बर्फबारी ने जहां पर्यटकों को रोमांच से भर दिया है, वहीं स्थानीय लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं। ऊंचाई वाले इलाकों में दो से तीन फुट तक बर्फ जमने से सड़कें, बिजली, पानी और संचार सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।

सुबह उठते ही पहाड़ों के शहर सफेद चादर में लिपटे नजर आए। खूबसूरत नजारे जितने मन मोहने वाले हैं, उतनी ही भयावह स्थिति रोजमर्रा की जिंदगी के लिए बन गई है। स्कूल बंद हैं, बाजार सूने पड़े हैं और लोग जरूरी कामों के लिए भी घरों से निकलने में हिचक रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर में रिकॉर्ड बर्फबारी, तापमान शून्य से नीचे

जम्मू-कश्मीर के मैदानी इलाकों में करीब एक फुट बर्फबारी दर्ज की गई है, जबकि ऊपरी पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फ की मोटाई दो से तीन फुट तक पहुंच गई है। लगातार बर्फ गिरने से कई इलाकों में तापमान शून्य से नीचे चला गया है। कड़ाके की ठंड और फिसलन ने लोगों की आवाजाही लगभग ठप कर दी है।

भूस्खलन, पेड़ गिरने और भारी बर्फ जमने की वजह से कई आंतरिक मार्ग पूरी तरह बंद हो चुके हैं। गांवों का संपर्क जिला मुख्यालयों से कटता नजर आ रहा है, जिससे आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर भी असर पड़ा है।

जम्मू-श्रीनगर हाईवे बंद, यात्रियों की बढ़ी परेशानी

भारी बारिश और बर्फबारी के कारण शुक्रवार को जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे (NH-44) को बंद कर दिया गया। उधमपुर के जखानी चौक पर भी सुरक्षा कारणों से आवाजाही रोक दी गई है। यह हाईवे कश्मीर घाटी की जीवन रेखा माना जाता है और इसके बंद होने से हजारों यात्रियों और मालवाहक वाहनों को रास्ते में ही रुकना पड़ा है।

प्रशासन की ओर से यात्रियों को सलाह दी गई है कि मौसम सामान्य होने तक अनावश्यक यात्रा से बचें और आधिकारिक सूचनाओं पर नजर बनाए रखें।

हवाई सेवाओं पर भी असर, कई उड़ानें रद्द

बर्फबारी का असर हवाई यातायात पर भी साफ दिखाई दे रहा है। बारामूला, बडगाम और रामबन के अलावा बटोटे जैसे पहाड़ी पर्यटन स्थलों में भारी बर्फ गिरने से पूरा इलाका सफेद नजर आया। इसी बीच श्रीनगर एयरपोर्ट से आने-जाने वाली कई उड़ानों को अस्थायी रूप से रद और सस्पेंड किया गया है।

श्रीनगर एयरपोर्ट प्रशासन ने यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए कहा है कि खराब मौसम और दिल्ली एयरपोर्ट पर लागू NOTAM के चलते उड़ानों का संचालन प्रभावित हुआ है। यात्रियों से अपील की गई है कि वे एयरपोर्ट पहुंचने से पहले अपनी एयरलाइन से फ्लाइट की स्थिति जरूर जांच लें।

हिमाचल प्रदेश में सड़कों का जाल बर्फ में कैद

हिमाचल प्रदेश में भी बर्फबारी ने हालात गंभीर कर दिए हैं। पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट के अनुसार राज्य में चार नेशनल हाईवे समेत कुल 535 सड़कें बंद हो गई हैं। कई इलाकों में बर्फ हटाने का काम युद्ध स्तर पर जारी है, लेकिन लगातार गिरती बर्फ राहत कार्यों में बाधा बन रही है।

विभाग ने अनुमान लगाया है कि बर्फबारी से प्रदेश को करीब छह करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। छोटे कस्बों और गांवों में लोग जरूरी सामान के लिए परेशान हैं।

उत्तराखंड में वाहन फंसे, SDRF का रेस्क्यू अभियान तेज

उत्तराखंड के नैनीताल, उत्तरकाशी और टिहरी गढ़वाल जिलों के ऊंचाई वाले इलाकों में हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। कई जगहों पर पर्यटकों की गाड़ियां और स्थानीय लोग रास्तों में फंस गए। जिला आपदा प्रबंधन विभाग और SDRF की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और राहत कार्य शुरू किया गया।

रामगढ़-मुक्तेश्वर और धनाचूली बैंड जैसे इलाकों में JCB मशीनों की मदद से बर्फ हटाई गई। करीब 20 से 25 वाहनों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जिससे यात्रियों ने राहत की सांस ली।

प्रशासन अलर्ट, मौसम को लेकर चेतावनी जारी

मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और ठंड बढ़ने की संभावना जताई है। प्रशासन ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से सतर्क रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

पहाड़ों पर यह बर्फबारी जहां पर्यटन के लिहाज से आकर्षण बढ़ा रही है, वहीं आम जनजीवन के लिए यह एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।