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प्रेमानंद महाराज के जन्मदिन पर भक्तिमय हुई वृंदावन की गलियां, जानिए कितने वर्ष के हुए महाराज

प्रेमानंद महाराज के जन्मदिन पर भक्तिमय हुई वृंदावन की गलियां
प्रेमानंद महाराज के जन्मदिन पर भक्तिमय हुई वृंदावन की गलियां (File Photo)

वृंदावन में प्रेमानंद महाराज का जन्मोत्सव भक्ति और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। संतों के संगम, फूलों की सजावट और भजन-कीर्तन से माहौल दिव्य बना हुआ है।

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Premanand Maharaj Birthday: वृंदावन की गलियां इन दिनों भक्ति और श्रद्धा के रंग में पूरी तरह रंगी हुई हैं। वजह है श्री हित प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज का जन्मोत्सव, जो 18 और 19 मार्च को बड़े ही भव्य और आध्यात्मिक अंदाज में मनाया जा रहा है। इस खास अवसर पर देशभर से श्रद्धालु और संत यहां पहुंचे हैं, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय हो गया है।

चैत्र नवरात्रि के पहले दिन जन्मदिन मानते हैं महाराज

चैत्र नवरात्रि के पहले दिन जन्म लेने वाले प्रेमानंद महाराज का यह उत्सव केवल एक जन्मदिन नहीं, बल्कि भक्ति, प्रेम और समर्पण का महापर्व बन चुका है। जैसे ही उत्सव की शुरुआत हुई, संतों के स्वागत के साथ ही वातावरण में मंत्रोच्चार और भजन-कीर्तन गूंज उठे।

जन्मोत्सव के दौरान संतों का अद्भुत संगम देखने को मिला। देश के विभिन्न आश्रमों से आए पीठाधीश्वर और जटाधारी संत पीले और सफेद वस्त्रों में सजे नजर आए। सभी ने महाराज के चरणों में नमन कर उन्हें माला पहनाई और तिलक लगाकर सम्मान दिया। यह दृश्य श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर था।

 

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फूलों से हुआ भव्य स्वागत

उत्सव का सबसे आकर्षक हिस्सा रहा फूलों से सजा स्वागत। भक्तों ने गुलाब और गेंदे के फूलों से जमीन पर खूबसूरत रंगोली और कालीन तैयार की। जैसे ही महाराज वहां पहुंचे, फूलों की वर्षा ने पूरे माहौल को दिव्यता से भर दिया। साथ ही कलाकारों ने राधा रानी और कृष्ण का रूप धारण कर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया, जिसने भक्तों को भाव-विभोर कर दिया।

30 मार्च को कानपुर में हुआ था जन्म

प्रेमानंद महाराज का जन्म 30 मार्च 1969 को कानपुर में हुआ था। उनका बचपन का नाम अनिरुद्ध कुमार पांडे था। स्वास्थ्य चुनौतियों—खासकर दोनों किडनियों के खराब होने—के बावजूद उनका उत्साह और भक्ति अद्भुत है। आज वे करीब 57 वर्ष के हो चुके हैं, हालांकि वे अपनी उम्र को लेकर चर्चा से दूर ही रहते हैं।

इस अवसर पर महाराज ने भक्तों को खास संदेश देते हुए कहा कि जीवन में दिखावे से दूर रहकर केवल भगवान के नाम का स्मरण करना ही सच्चा सुख देता है। उनके इस संदेश ने श्रद्धालुओं के दिलों को छू लिया। भक्तों ने भी उनके अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए विशेष प्रार्थना की।

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Dipali Kumari

दीपाली कुमारी पिछले तीन वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में कार्यरत हैं। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर लिखने में उनकी विशेष रुचि है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों को धारदार लेखन के माध्यम से सामने लाना उनका प्रमुख लक्ष्य है।