नागपुर: राज्य सरकार द्वारा अनुसूचित जातियों (SC) के उपवर्गीकरण को लेकर चल रही प्रक्रिया पर पूर्व ऊर्जा मंत्री एवं उत्तर नागपुर के विधायक डॉ. नितिन राऊत ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर इस प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
डॉ. राऊत ने कहा कि न्यायमूर्ति अनंत बदर समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक किए बिना मात्र 5 दिनों में आपत्तियां और सुझाव मांगना संदेहास्पद है। उन्होंने कहा — “जब रिपोर्ट ही उपलब्ध नहीं है, तो जनता अपनी प्रतिक्रिया कैसे दे सकती है?”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जयंती के दौरान इस प्रक्रिया को लागू कर समाज को अपनी बात रखने से वंचित किया जा रहा है।
डॉ. राऊत ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार उपवर्गीकरण के लिए ठोस ‘एम्पिरिकल डेटा’ आवश्यक है, जबकि सरकार ने अब तक कोई जातिवार शैक्षणिक या रोजगार संबंधी आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं।
डॉ. राऊत की प्रमुख मांगें: यदि उपवर्गीकरण किया जाना है तो इसे केवल नौकरियों तक सीमित न रखा जाए — बल्कि राजनीति, उच्च शिक्षा, विदेश छात्रवृत्ति और अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जाए। साथ ही राज्यव्यापी जातिगत जनगणना, डेटा सार्वजनिक करने, विशेष शैक्षणिक पैकेज और आपत्तियों के लिए कम से कम 60 दिन की समयसीमा देने की मांग की।
उन्होंने चेतावनी दी कि जल्दबाजी में लिया गया निर्णय समाज की एकता को कमजोर कर सकता है।
यह मामला राज्य की राजनीति में तूल पकड़ सकता है — विपक्ष ने सरकार से रिपोर्ट तत्काल सार्वजनिक करने की मांग तेज कर दी है।
रिपोर्ट: Jassi, नागपुर