महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला
महाराष्ट्र सरकार ने 27 जनवरी 2026 को एक अहम बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। इनमें सबसे खास फैसला राज्य की औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं में पीएम सेतू योजना को लागू करने का है। यह योजना राज्य के युवाओं के भविष्य को संवारने में एक बड़ी भूमिका निभाएगी। इसके साथ ही मंत्रिमंडल ने ठेकेदारों के भुगतान, सहकारी सूतगिरणी के पुनरुद्धार और भूमि पट्टे से जुड़े कई अन्य फैसले भी लिए हैं।
राज्य सरकार का यह कदम युवाओं को कौशल विकास और रोजगार के नए अवसर प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। पीएम सेतू योजना के माध्यम से आईटीआई में पढ़ने वाले छात्रों को आधुनिक तकनीक और उद्योग की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण मिलेगा।
पीएम सेतू योजना क्या है
पीएम सेतू का पूरा नाम प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एंप्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई है। यह केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है जिसका उद्देश्य देश की औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं को आधुनिक बनाना और युवाओं को रोजगार के लायक बनाना है। इस योजना के तहत आईटीआई में नए पाठ्यक्रम, आधुनिक उपकरण और उद्योग से जुड़े प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी।
इस योजना की खासियत यह है कि इसमें छात्रों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान नहीं, बल्कि व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। उन्हें उद्योगों में काम करने का मौका मिलेगा जिससे वे अपने कौशल को निखार सकेंगे। यह योजना युवाओं को स्वरोजगार के लिए भी तैयार करेगी।
पहले चरण में तीन जिलों में शुरुआत
महाराष्ट्र सरकार ने पीएम सेतू योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का फैसला किया है। पहले चरण में नागपुर, छत्रपति संभाजीनगर और पुणे जिलों की औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं में इस योजना को शुरू किया जाएगा। इन तीन जिलों का चयन इसलिए किया गया है क्योंकि यहां औद्योगिक गतिविधियां अधिक हैं और युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध हो सकते हैं।
नागपुर महाराष्ट्र का दूसरा सबसे बड़ा शहर है और यहां कई बड़े उद्योग स्थापित हैं। पुणे शिक्षा और उद्योग का एक प्रमुख केंद्र है जहां आईटी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में काफी संभावनाएं हैं। छत्रपति संभाजीनगर भी औद्योगिक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इन जिलों में योजना की सफलता के बाद इसे राज्य के अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा।
युवाओं को मिलेंगे बेहतर रोजगार के अवसर
पीएम सेतू योजना से राज्य के युवाओं को कई फायदे होंगे। सबसे पहले, उन्हें आधुनिक तकनीक के अनुसार प्रशिक्षण मिलेगा जो उन्हें नौकरी बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाएगा। दूसरा, उद्योगों से सीधे जुड़ाव के कारण उन्हें प्लेसमेंट में भी मदद मिलेगी। तीसरा, जो युवा अपना खुद का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए भी यह योजना मददगार साबित होगी।
आज के दौर में केवल पारंपरिक शिक्षा से काम नहीं चलता। युवाओं को ऐसे कौशल की जरूरत है जो बाजार की मांग के अनुकूल हों। पीएम सेतू योजना इसी जरूरत को पूरा करने के लिए बनाई गई है। इससे न केवल युवाओं को रोजगार मिलेगा बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
ठेकेदारों के भुगतान के लिए नई व्यवस्था
मंत्रिमंडल ने एक और महत्वपूर्ण फैसला लिया है जो सार्वजनिक निर्माण विभाग से जुड़े सूक्ष्म, लघु और मध्यम ठेकेदारों के लिए राहत भरा है। अक्सर छोटे ठेकेदारों को उनके काम का भुगतान समय पर नहीं मिल पाता जिससे उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार ने टीआरईडीएस प्लेटफॉर्म के उपयोग को मंजूरी दी है।
टीआरईडीएस प्लेटफॉर्म क्या है
टीआरईडीएस यानी ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम एक ऑनलाइन मंच है जहां छोटे और मध्यम उद्यमी अपने लंबित बिलों को बेच सकते हैं और तुरंत पैसे प्राप्त कर सकते हैं। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से ठेकेदारों को अपने भुगतान के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। वे अपने बिलों को इस प्लेटफॉर्म पर डाल सकते हैं और वित्तीय संस्थानों से तुरंत धन प्राप्त कर सकते हैं।
यह व्यवस्था छोटे ठेकेदारों और उद्यमियों के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगी। इससे उन्हें अपने व्यवसाय को सुचारू रूप से चलाने में मदद मिलेगी और वे नए प्रोजेक्ट्स भी ले सकेंगे।
धुले की सहकारी सूतगिरणी का पुनरुद्धार
महाराष्ट्र का वस्त्र उद्योग राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। धुले जिले में स्थित जवाहर शेतकरी सहकारी सूतगिरणी कई वर्षों से बंद पड़ी है। इस मिल को फिर से चालू करने के लिए सरकार ने राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम, नई दिल्ली को सिफारिश भेजने का निर्णय लिया है।
किसानों और मजदूरों को मिलेगी राहत
इस सूतगिरणी के पुनरुद्धार से क्षेत्र के कपास उत्पादक किसानों को फायदा होगा। उन्हें अपनी फसल के लिए बेहतर दाम मिल सकेंगे। साथ ही, सैकड़ों मजदूरों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। यह फैसला धुले जिले की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में सहायक होगा।
भूमि पट्टे की अवधि बढ़ाने का निर्णय
सरकार ने विभिन्न प्रयोजनों के लिए दी जाने वाली शासकीय भूमि के पट्टे की अवधि बढ़ाने का भी फैसला किया है। विशेष रूप से 30 वर्षों के लिए दिए जाने वाले पट्टों की अवधि महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता, 1966 और महाराष्ट्र भूमि राजस्व नियम, 1971 के अंतर्गत बढ़ाई जाएगी।
पट्टेदारों को मिलेगी सुरक्षा
यह निर्णय उन लोगों के लिए राहत भरा है जिन्होंने शासकीय भूमि पर पट्टा लेकर व्यवसाय या अन्य गतिविधियां शुरू की हैं। पट्टे की अवधि बढ़ने से उन्हें दीर्घकालिक सुरक्षा मिलेगी और वे अपने निवेश को लेकर आश्वस्त रहेंगे।
शत्रु संपत्ति पर मुद्रांक शुल्क में छूट
मंत्रिमंडल ने एक और महत्वपूर्ण फैसला लिया है जो शत्रु संपत्ति से संबंधित है। केंद्र सरकार या राज्य सरकार के अधीन शत्रु संपत्ति की खरीद-बिक्री पर लगने वाले मुद्रांक शुल्क को माफ करने का निर्णय लिया गया है। यह कदम ऐसी संपत्तियों के निपटान को आसान बनाएगा और कानूनी प्रक्रियाओं को सरल करेगा।
महाराष्ट्र सरकार के ये फैसले राज्य के विकास और युवाओं के भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। पीएम सेतू योजना विशेष रूप से युवाओं के लिए एक वरदान साबित होगी। यह उन्हें न केवल रोजगार के अवसर प्रदान करेगी बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर भी बनाएगी। ठेकेदारों के भुगतान की नई व्यवस्था, सहकारी सूतगिरणी का पुनरुद्धार और भूमि पट्टे से जुड़े फैसले भी राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक होंगे। सरकार की इन पहलों से महाराष्ट्र में विकास की नई इबारत लिखी जाएगी और आम जनता को इसका सीधा लाभ मिलेगा।