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परिसीमन बिल पर सियासी घमासान, तमिलनाडु के CM ने जलाई बिल की कॉपी

परिसीमन बिल पर सियासी घमासान, तमिलनाडु के CM ने जलाई बिल की कॉपी
परिसीमन बिल पर सियासी घमासान, तमिलनाडु के CM ने जलाई बिल की कॉपी (Pic Credit- X @mkstalin)

लोकसभा में परिसीमन बिल पेश होने के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इसका विरोध तेज कर दिया। उन्होंने बिल की कॉपी जलाकर इसे “काला कानून” बताया और आरोप लगाया कि इससे तमिलों का प्रतिनिधित्व प्रभावित होगा। इस कदम से सियासी विवाद और गहरा गया है।

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Dipali Kumari
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Delimitation Bill: केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा लोकसभा में परिसीमन बिल पेश किए जाने के बाद देशभर में सियासी हलचल तेज हो गई है। परिसीमन बिल के पेश होते ही संसद में हंगामा शुरू हो गया. विपक्ष इस बिल का कड़ा विरोध कर रहे हैं. वहीं अब राज्यों में भी इसका विरोध खुलकर सामने आ रहा है। इसी कड़ी में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इस प्रस्तावित कानून के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए इस बिल की प्रति सार्वजनिक रूप से जला दी।

सीएम ने कहा यह “काला कानून”

सीएम स्टालिन ने इस बिल को “काला कानून” करार देते हुए कहा कि अगर यह लागू होता है, तो तमिलनाडु के लोगों को अपनी ही जमीन पर हाशिये पर धकेल दिया जाएगा। उनका आरोप है कि इससे राज्य की राजनीतिक हिस्सेदारी कमजोर होगी और तमिल समाज को नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने यहां तक कहा कि यह कानून तमिलों को उनकी ही धरती पर “शरणार्थी” बना सकता है।

मुख्यमंत्री का सोशल मीडिया पोस्ट

मुख्यमंत्री ने अपने विरोध को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी साझा किया। उन्होंने बीजेपी पर तीखा हमला करते हुए लिखा कि “फासीवादी बीजेपी का घमंड चकनाचूर होगा।” स्टालिन ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि जैसे हिंदी विरोधी आंदोलन ने दिल्ली को झुकने पर मजबूर किया था, वैसे ही यह नई ‘आग’ भी द्रविड़ भूमि में फैलकर बड़ा आंदोलन बनेगी।

काले झंडे लगाकर जताया विरोध

सिर्फ बयान ही नहीं, बल्कि जमीन पर भी विरोध के संकेत साफ दिख रहे हैं। चेन्नई में डीएमके मुख्यालय ‘अन्ना अरिवालयम’ समेत कई जगहों पर काले झंडे लगाए गए। सहयोगी दलों मक्कल निधि मय्यम और एमडीएमके के दफ्तरों पर भी काले झंडे नजर आए। शहर के कई प्रमुख इलाकों में लोगों ने इस बिल के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की।

यहां तक कि डीएमके के दिवंगत नेता एम. करुणानिधि के गोपालपुरम स्थित आवास पर भी काला झंडा लगाया गया। मुख्यमंत्री के आवास और उनके मंत्रियों के घरों पर भी विरोध के प्रतीक के रूप में काले झंडे लगाए गए।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।