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One Nation One Election: 2029 में बदल सकता है भारत का चुनावी नक्शा!, ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर तेज हुई कवायद

One Nation One Election: 2029 में बदल सकता है भारत का चुनावी नक्शा!
One Nation One Election: 2029 में बदल सकता है भारत का चुनावी नक्शा! ( Image - AI )

One Nation One Election 2029 : ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर तेज चर्चा जारी है। 2029 में देशभर के चुनाव एक साथ कराने की संभावना से भारत की चुनावी व्यवस्था बदल सकती है।

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कई राज्यों के चुनाव एक साथ कराने पर मंथन

One Nation One Election: क्या 2029 का आम चुनाव भारत की चुनावी राजनीति का सबसे बड़ा मोड़ साबित होगा? केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ को लेकर राजनीतिक और संवैधानिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है। संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) इस विषय पर लगातार विचार-विमर्श कर रही है और माना जा रहा है कि आगामी वर्षों में देश की चुनावी व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

सूत्रों और विभिन्न नीति चर्चाओं के अनुसार, सरकार चरणबद्ध तरीके से लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने की दिशा में आगे बढ़ रही है। चर्चाओं में यह संभावना भी सामने आई है कि 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ बड़ी संख्या में राज्यों के विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं। हालांकि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

आखिर क्यों जरूरी माना जा रहा है ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’?

केंद्र सरकार का तर्क है कि देश में लगभग हर साल किसी न किसी राज्य में चुनाव होते रहते हैं। इससे प्रशासनिक मशीनरी लंबे समय तक चुनावी प्रक्रिया में व्यस्त रहती है और बार-बार लागू होने वाली आदर्श आचार संहिता के कारण विकास परियोजनाएं प्रभावित होती हैं। समर्थकों का कहना है कि यदि पूरे देश में एक साथ चुनाव होते हैं तो सरकारी खर्च में बड़ी कमी आ सकती है, सुरक्षा बलों पर दबाव घटेगा और नीतिगत फैसलों में तेजी आएगी।

1952 से 1967 तक पहले भी लागू थी यह व्यवस्था

बहुत कम लोग जानते हैं कि स्वतंत्रता के बाद शुरुआती चार आम चुनावों तक देश में लोकसभा और अधिकांश राज्यों के विधानसभा चुनाव एक साथ ही होते थे। 1952, 1957, 1962 और 1967 में यही व्यवस्था लागू थी। लेकिन बाद में कई राज्य सरकारों के समय से पहले गिरने, राष्ट्रपति शासन लगने और लोकसभा के कार्यकाल में बदलाव के कारण चुनावी चक्र टूट गया। इसके बाद अलग-अलग समय पर चुनाव होने लगे।

क्या है प्रस्तावित मॉडल?

चर्चाओं के अनुसार, सरकार दो चरणों वाला मॉडल तैयार कर सकती है। पहले चरण में लोकसभा चुनाव के साथ उन राज्यों को जोड़ा जा सकता है जिनके चुनावी कार्यक्रम समय के आसपास आते हैं। इसके बाद दूसरे चरण में शेष राज्यों को भी एक समान चुनावी चक्र में लाने की कोशिश हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके लिए कुछ राज्यों के कार्यकाल में सीमित बदलाव, संवैधानिक संशोधन और व्यापक राजनीतिक सहमति की आवश्यकता होगी।

जेपीसी कर रही है व्यापक अध्ययन

‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों की समीक्षा कर रही संयुक्त संसदीय समिति विभिन्न राज्यों का दौरा कर रही है। समिति प्रशासनिक अधिकारियों, चुनाव विशेषज्ञों, विधि विशेषज्ञों और राज्य सरकारों से सुझाव ले रही है। कई राज्यों ने समिति के सामने यह तर्क रखा है कि बार-बार चुनाव होने से विकास कार्य प्रभावित होते हैं और चुनावी खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है।

चुनौतियां भी कम नहीं

हालांकि इस योजना के विरोध में भी कई तर्क दिए जा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि राष्ट्रीय और राज्य स्तर के मुद्दों की प्रकृति अलग होती है। यदि चुनाव एक साथ होंगे तो क्षेत्रीय मुद्दे राष्ट्रीय राजनीति के शोर में दब सकते हैं। इसके अलावा यदि किसी राज्य सरकार का बहुमत बीच कार्यकाल में समाप्त हो जाए तो ऐसी स्थिति में चुनावी चक्र को बनाए रखना भी एक बड़ी संवैधानिक चुनौती होगी।

अब सबकी नजर 2026 की रिपोर्ट पर

One Nation One Election: संयुक्त संसदीय समिति को अपनी रिपोर्ट संसद के आगामी सत्रों में पेश करनी है। इसके बाद संविधान संशोधन, राजनीतिक सहमति और कानूनी प्रक्रियाओं पर आगे फैसला होगा। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो 2029 का चुनाव केवल सरकार चुनने का नहीं बल्कि भारत की चुनावी व्यवस्था को नए ढांचे में ढालने का ऐतिहासिक अवसर बन सकता है।


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Priyanka C. Mishra

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