Supriya Sule on Women’s Reservation: सुप्रिया सुले ने की सरकार से 33% आरक्षण तुरंत लागू करने की मांग

Women's Reservation Bill : सुप्रिया सुले ने केंद्र सरकार से महिलाओं के लिए 33% आरक्षण जल्द लागू करने की मांग की और स्पष्ट किया कि INDIA गठबंधन ने इसे परिसीमन से जोड़ने की कभी मांग नहीं की। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर विपक्ष साझा रणनीति के साथ संसद में अपना पक्ष रखेगा।
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महिला आरक्षण को परिसीमन से न जोड़ें
Supriya Sule on Women’s Reservation: संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले महिला आरक्षण और परिसीमन का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने केंद्र सरकार से संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को बिना किसी देरी के लागू करने की मांग की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ‘इंडिया’ गठबंधन ने कभी भी महिला आरक्षण को परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ने की मांग नहीं की है और सरकार को दोनों विषयों को अलग-अलग रखना चाहिए।
बारामती से सांसद सुप्रिया सुले ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उनकी पार्टी ने परिसीमन को लेकर न तो किसी राजनीतिक दल से कोई बातचीत की है और न ही सरकार ने इस विषय पर उनसे संपर्क किया है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार संसद में कोई नया विधेयक लाती है तो एनसीपी (एसपी) उस पर अध्ययन करने के बाद अपना आधिकारिक रुख सामने रखेगी।
परिसीमन और सीटों के पुनर्निर्धारण को लेकर चर्चा तेज
सुले ने यह भी दोहराया कि इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय ‘इंडिया’ गठबंधन के सहयोगी दलों के साथ विस्तृत चर्चा के बाद ही लिया जाएगा। उनके अनुसार गठबंधन के भीतर पहले भी इस बात पर चर्चा हो चुकी है कि महिलाओं को पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ सहयोगी दल 50 प्रतिशत आरक्षण के पक्ष में भी अपनी राय रखते रहे हैं, लेकिन फिलहाल उनकी प्राथमिक मांग यह है कि संसद पहले 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को लागू करे।
सुप्रिया सुले का सबसे महत्वपूर्ण बयान यह रहा कि विपक्षी गठबंधन ने कभी भी महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने की मांग नहीं की। उन्होंने कहा कि यह धारणा गलत है कि ‘इंडिया’ ब्लॉक परिसीमन चाहता है। उनका कहना था कि विपक्ष का स्पष्ट मत है कि महिलाओं को आरक्षण देने का संवैधानिक वादा जल्द से जल्द पूरा किया जाए। यह बयान ऐसे समय आया है जब केंद्र सरकार के स्तर पर महिला आरक्षण को लागू करने के लिए परिसीमन और सीटों के पुनर्निर्धारण को लेकर फिर चर्चा तेज हुई है। इस विषय पर सरकार और विपक्ष के बीच पहले भी मतभेद सामने आते रहे हैं।

अमित शाह को लिखा गया था पत्र
सुले ने यह भी खुलासा किया कि इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को विपक्ष की ओर से एक पत्र भेजा गया था। उन्होंने बताया कि पिछले बजट सत्र के दौरान संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने अलग-अलग विपक्षी नेताओं को चर्चा के लिए बुलाया था। उस समय उन्हें, एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी और शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत को अलग-अलग आमंत्रित किया गया था।
सुले के अनुसार, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में विपक्ष ने अमित शाह को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दे पर सभी ‘इंडिया’ गठबंधन दलों को एक साथ चर्चा के लिए बुलाया जाए ताकि सामूहिक रूप से अपनी बात रखी जा सके।
अप्रैल 2026 में क्यों अटक गया था विधेयक?
- महिला आरक्षण को शीघ्र लागू करने और परिसीमन से जुड़े प्रावधानों के लिए सरकार ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया था। लेकिन 17 अप्रैल 2026 को यह विधेयक लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका।
- सदन में मौजूद और मतदान करने वाले सदस्यों में 298 सांसदों ने विधेयक के पक्ष में मतदान किया, जबकि 230 सांसद विरोध में रहे। संविधान संशोधन पारित करने के लिए आवश्यक विशेष बहुमत नहीं मिलने के कारण विधेयक पारित नहीं हो सका। इसके बाद सरकार ने परिसीमन विधेयक और उससे जुड़े अन्य विधेयकों को भी आगे नहीं बढ़ाया।
- यही कारण है कि महिला आरक्षण को लागू करने की प्रक्रिया फिर राजनीतिक बहस का विषय बन गई है। सरकार का आरोप है कि विपक्ष ने महिला आरक्षण का समर्थन नहीं किया, जबकि विपक्ष का कहना है कि उसने महिला आरक्षण का नहीं बल्कि उसे परिसीमन से जोड़ने के तरीके का विरोध किया।
एनसीपी (एसपी) में फूट की अटकलों को किया खारिज
राजनीतिक अटकलों पर विराम लगाते हुए सुप्रिया सुले ने अपनी पार्टी में किसी भी प्रकार की अंदरूनी कलह से इनकार किया। उन्होंने कहा कि एनसीपी (एसपी) के सभी आठ सांसद और सभी विधायक पूरी तरह एकजुट हैं। उन्होंने कहा कि शरद पवार ऐसा नेतृत्व देते हैं जहां सभी नेताओं की बात सुनी जाती है और संगठन सामूहिक निर्णय लेने की परंपरा पर चलता है।
मानसून सत्र में फिर गरमा सकता है मुद्दा
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा। ऐसे में संभावना है कि महिला आरक्षण, परिसीमन और संसद में प्रतिनिधित्व का प्रश्न एक बार फिर प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनेगा। सरकार यदि इस विषय पर नया विधायी प्रस्ताव लाती है तो सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच व्यापक बहस देखने को मिल सकती है।
पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना जरूरी
Supriya Sule on Women’s Reservation: महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना लोकतंत्र को अधिक समावेशी और संतुलित बनाता है। यदि सभी प्रमुख दल सिद्धांततः 33 प्रतिशत महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, तो इसे परिसीमन या अन्य विवादित मुद्दों से अलग रखते हुए व्यापक राजनीतिक सहमति बनाने का प्रयास होना चाहिए। साथ ही, परिसीमन जैसे संवेदनशील विषय पर भी सभी राज्यों और राजनीतिक दलों के साथ पारदर्शी संवाद आवश्यक है, ताकि किसी भी क्षेत्र या वर्ग में प्रतिनिधित्व को लेकर असंतोष पैदा न हो। लोकतांत्रिक सुधार तभी सफल माने जाएंगे जब वे व्यापक सहमति, स्पष्ट प्रक्रिया और जनविश्वास के साथ लागू किए जाएं।

