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मालदा के तालतला में कंटीले तार के पार रह रहे 24 भारतीय परिवार, 21 साल बाद पुनर्वास की जगी उम्मीद

मालदा के तालतला में कंटीले तार के पार रह रहे 24 भारतीय परिवार, 21 साल बाद पुनर्वास की जगी उम्मीद
Malda Taltala Border 24 Families Rehabilitation: मालदा के तालतला में कंटीले तार के पार रह रहे 24 भारतीय परिवार, 21 साल बाद पुनर्वास की जगी उम्मीद (Photo: RB / Ekbal)

Malda Taltala Border 24 Families Rehabilitation: मालदा के तालतला गांव के 24 भारतीय परिवार करीब 21 साल से भारत-बांग्लादेश सीमा पर कंटीले तार के पार रह रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आने-जाने, रात में इलाज और सुरक्षा को लेकर उन्हें परेशानी होती है। उन्होंने कंटीले तार के इस पार पुनर्वास की मांग की है। मंत्री जुएल मुर्मू ने प्रशासन से बात करने का भरोसा दिया।

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Asfi Shadab
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कंटीले तार के पार 21 साल से रह रहे 24 भारतीय परिवार

Malda Taltala Border 24 Families Rehabilitation: मालदा के बामनगोला ब्लॉक स्थित चांदपुर-8 ग्राम पंचायत की सीमावर्ती तालतला गांव में 24 परिवार पिछले करीब 21 साल से भारतीय होकर भी ‘पराधीन’ जैसी जिंदगी जीने को मजबूर हैं। 2005 में भारत-बांग्लादेश सीमा पर कांटातार की बाड़ लगाए जाने के समय ये परिवार बाड़ के उस पार रह गए थे। ग्रामीणों का दावा है कि भारतीय पहचान-पत्र होने के बावजूद उनका जीवन व्यावहारिक रूप से किसी सुधारगृह जैसा है।

तालतला गांव के एक ओर भारत है तो दूसरी ओर बांग्लादेश। पुनर्भवा नदी इस इलाके में दोनों देशों की प्राकृतिक सीमारेखा (जीरो लाइन) का काम करती है। नदी के उस पार बांग्लादेश के नौगांव जिले के सापाहार थाना अंतर्गत आदातला गांव है, जबकि इस पार भारत के मालदा जिले के बामनगोला थाना अंतर्गत तालतला गांव स्थित है।

बाड़ के पार रहने वाले इन 24 परिवारों को तय समय पर बीएसएफ को पहचान-पत्र दिखाकर आना-जाना पड़ता है। दिन में दो-तीन बार आवाजाही संभव है, लेकिन रात में बीमारी या आपात चिकित्सा जरूरत पड़ने पर उन्हें गंभीर परेशानी झेलनी पड़ती है। ग्रामीणों के अनुसार, नदी पार से दुष्कृतियों द्वारा गबादि पशु ले जाने की घटनाएं भी होती रहती हैं, जिससे वे लगातार असुरक्षा में जीते हैं।

Malda Taltala Border 24 Families Rehabilitation: मालदा के तालतला में कंटीले तार के पार रह रहे 24 भारतीय परिवार, 21 साल बाद पुनर्वास की जगी उम्मीद
Malda Taltala Border 24 Families Rehabilitation: मालदा के तालतला में कंटीले तार के पार रह रहे 24 भारतीय परिवार, 21 साल बाद पुनर्वास की जगी उम्मीद (Photo: RB / Ekbal)
Malda Taltala Border 24 Families Rehabilitation: मालदा के तालतला में कंटीले तार के पार रह रहे 24 भारतीय परिवार, 21 साल बाद पुनर्वास की जगी उम्मीद
Malda Taltala Border 24 Families Rehabilitation: मालदा के तालतला में कंटीले तार के पार रह रहे 24 भारतीय परिवार, 21 साल बाद पुनर्वास की जगी उम्मीद (Photo: RB / Ekbal)
Malda Taltala Border 24 Families Rehabilitation: मालदा के तालतला में कंटीले तार के पार रह रहे 24 भारतीय परिवार, 21 साल बाद पुनर्वास की जगी उम्मीद
Malda Taltala Border 24 Families Rehabilitation: मालदा के तालतला में कंटीले तार के पार रह रहे 24 भारतीय परिवार, 21 साल बाद पुनर्वास की जगी उम्मीद (Photo: RB / Ekbal)
Malda Taltala Border 24 Families Rehabilitation: मालदा के तालतला में कंटीले तार के पार रह रहे 24 भारतीय परिवार, 21 साल बाद पुनर्वास की जगी उम्मीद
Malda Taltala Border 24 Families Rehabilitation: मालदा के तालतला में कंटीले तार के पार रह रहे 24 भारतीय परिवार, 21 साल बाद पुनर्वास की जगी उम्मीद (Photo: RB / Ekbal)
Malda Taltala Border 24 Families Rehabilitation: मालदा के तालतला में कंटीले तार के पार रह रहे 24 भारतीय परिवार, 21 साल बाद पुनर्वास की जगी उम्मीद
Malda Taltala Border 24 Families Rehabilitation: मालदा के तालतला में कंटीले तार के पार रह रहे 24 भारतीय परिवार, 21 साल बाद पुनर्वास की जगी उम्मीद (Photo: RB / Ekbal)

पुनर्वास की मांग पर मंत्री जुएल मुर्मू ने दिया कदम उठाने का भरोसा

इस समस्या के समाधान की मांग को लेकर ग्रामीण कई बार सरकार से पुनर्वास की अपील कर चुके हैं। राज्य में सरकार बदलने के बाद हबीबपुर के विधायक तथा राज्य के सिंचाई एवं आदिवासी उन्नयन विभाग के प्रतिमंत्री जुएल मुर्मू तालतला गांव पहुंचे और ग्रामीणों से मुलाकात कर समस्या समाधान की पहल की।

मंत्री जुएल मुर्मू ने बताया कि वे यह मामला राज्य सरकार के समक्ष रखने के साथ ही जिला प्रशासन से भी बातचीत करेंगे। 24 परिवारों को बाड़ के इस पार लाकर पुनर्वास दिया जा सकता है या नहीं, इस पर भी प्रशासन से चर्चा होगी।

आगे यह देखना अहम होगा कि प्रशासनिक स्तर पर बातचीत कब शुरू होती है और इन परिवारों को वास्तविक राहत कब मिल पाती है।

Malda Taltala Border 24 Families Rehabilitation: मालदा के तालतला में कंटीले तार के पार रह रहे 24 भारतीय परिवार, 21 साल बाद पुनर्वास की जगी उम्मीद
Malda Taltala Border 24 Families Rehabilitation: मालदा के तालतला में कंटीले तार के पार रह रहे 24 भारतीय परिवार, 21 साल बाद पुनर्वास की जगी उम्मीद (Photo: RB / Ekbal)
Malda Taltala Border 24 Families Rehabilitation: मालदा के तालतला में कंटीले तार के पार रह रहे 24 भारतीय परिवार, 21 साल बाद पुनर्वास की जगी उम्मीद
Malda Taltala Border 24 Families Rehabilitation: मालदा के तालतला में कंटीले तार के पार रह रहे 24 भारतीय परिवार, 21 साल बाद पुनर्वास की जगी उम्मीद (Photo: RB / Ekbal)
Malda Taltala Border 24 Families Rehabilitation: मालदा के तालतला में कंटीले तार के पार रह रहे 24 भारतीय परिवार, 21 साल बाद पुनर्वास की जगी उम्मीद
Malda Taltala Border 24 Families Rehabilitation: मालदा के तालतला में कंटीले तार के पार रह रहे 24 भारतीय परिवार, 21 साल बाद पुनर्वास की जगी उम्मीद (Photo: RB / Ekbal)
Malda Taltala Border 24 Families Rehabilitation: मालदा के तालतला में कंटीले तार के पार रह रहे 24 भारतीय परिवार, 21 साल बाद पुनर्वास की जगी उम्मीद
Malda Taltala Border 24 Families Rehabilitation: मालदा के तालतला में कंटीले तार के पार रह रहे 24 भारतीय परिवार, 21 साल बाद पुनर्वास की जगी उम्मीद (Photo: RB / Ekbal)
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Malda Taltala Border 24 Families Rehabilitation: मालदा के तालतला में कंटीले तार के पार रह रहे 24 भारतीय परिवार, 21 साल बाद पुनर्वास की जगी उम्मीद
Malda Taltala Border 24 Families Rehabilitation: मालदा के तालतला में कंटीले तार के पार रह रहे 24 भारतीय परिवार, 21 साल बाद पुनर्वास की जगी उम्मीद (Photo: RB / Ekbal)

रिपोर्ट: एकबाल, पश्चिम बंगाल

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असफ़ी शादाब राष्ट्र भारत में कंटेंट एडिटर और न्यूज़ राइटर हैं। वे क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं, खेल, राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय घटनाओं से संबंधित समाचारों का संपादन, तथ्य सत्यापन और प्रकाशन कार्य संभालते हैं। उनकी जिम्मेदारी विभिन्न राज्यों से प्राप्त समाचारों को आधिकारिक स्रोतों, उपलब्ध दस्तावेजों और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर व्यवस्थित एवं स्पष्ट रूप में पाठकों तक पहुंचाना है। राष्ट्र भारत में वे महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों से प्राप्त समाचारों का संपादन करते हैं तथा उन्हें सरल, सटीक और पाठक-केंद्रित भाषा में प्रस्तुत करने का कार्य करते हैं। वे यह सुनिश्चित करते हैं कि प्रकाशित सामग्री संपादकीय मानकों, तथ्यात्मक शुद्धता और विश्वसनीय स्रोतों के अनुरूप हो। मुख्य कार्यक्षेत्र (Core Responsibilities): क्राइम, राजनीति, सरकारी योजनाओं और समसामयिक समाचारों का संपादन। विभिन्न संवाददाताओं और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से प्राप्त सामग्री का तथ्य सत्यापन। आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी दस्तावेजों एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समाचारों का संपादन। स्पष्ट, संतुलित और पाठक-अनुकूल भाषा में समाचार प्रस्तुत करना। राष्ट्र भारत की संपादकीय नीतियों और पत्रकारिता मानकों के अनुरूप सामग्री प्रकाशित करना। संपादकीय दृष्टिकोण (Editorial Approach): असफ़ी शादाब का उद्देश्य पाठकों तक तथ्यात्मक, संतुलित और स्पष्ट समाचार पहुंचाना है। वे प्रकाशित होने वाली प्रत्येक सामग्री की भाषा, संदर्भ और उपलब्ध स्रोतों की समीक्षा करते हैं ताकि समाचार संपादकीय गुणवत्ता और विश्वसनीयता के मानकों पर खरा उतर सके।