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Kharagpur Election: खड़गपुर से दिलीप घोष का ऐलान 1 लाख वोट का टारगेट, खुद तोड़ेंगे अपना रिकॉर्ड

Kharagpur Election: खड़गपुर से दिलीप घोष का ऐलान 1 लाख वोट का टारगेट, खुद तोड़ेंगे अपना रिकॉर्ड
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Dilip Ghosh Kharagpur BJP candidate West Bengal Assembly Election: खड़गपुर में चुनाव को लेकर पार्टी ने मजबूत तैयारी का संकेत दिया है। इस बार लक्ष्य पिछले रिकॉर्ड को तोड़ने का है। उम्मीदवार चयन और रणनीति पूरी तरह पार्टी के हाथ में है। टिकट के बाद असंतोष को सामान्य बताया गया। प्रशासनिक बदलाव और प्रचार योजना पर भी स्पष्ट रुख सामने आया है।

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Asfi Shadab
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खड़गपुर में चुनावी तैयारी तेज, पार्टी ने रखा बड़ा लक्ष्य

Dilip Ghosh Kharagpur BJP candidate West Bengal Assembly Election: खड़गपुर – भाजपा के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष को पार्टी ने खड़गपुर सदर सीट से उम्मीदवार बनाया है। सीट मिलने पर उन्होंने साफ कहा।

“खड़गपुर में हमेशा हमें लीड मिली है – कभी ज़्यादा, कभी कम। इस बार हमारा टारगेट है कि हम खुद अपना पिछला रिकॉर्ड तोड़ें और 1 लाख वोट हासिल करें।”

हिरण के भविष्य पर क्या बोले?

उम्मीदवार चयन और रणनीति पर पार्टी का साफ संदेश

घोष ने कहा कि किसे कहाँ उपयोग करना है, यह पार्टी तय करती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा:

“राहुल सिन्हा किसी पद पर नहीं थे, उन्होंने भी नाराज़गी दिखाई – पार्टी ने उन्हें सम्मान देकर राज्यसभा भेजा। पार्टी पर भरोसा रखें।”

उन्होंने यह भी कहा कि तालिका अभी पूरी नहीं हुई है और घोषणा के बाद हिरण से उनकी कोई बात नहीं हुई।

शुभेंदु अधिकारी का दो सीटों से लड़ना – नज़ीर या नई बात?

घोष ने कहा कि इस राज्य में पहले ऐसा नहीं हुआ, लेकिन भाजपा में इसके कई उदाहरण हैं। उन्होंने नरेंद्र मोदी और राहुल गाँधी का हवाला देते हुए कहा, “यह पार्टी का फैसला है, मैं निर्णायक नहीं हूँ।”

भाजपा में असंतोष के सवाल पर:

“कौन सी पार्टी में असंतोष नहीं? जीतने की जितनी संभावना होती है, उतना ही ज़्यादा असंतोष होता है। CPM में कोई गड़बड़ी नहीं – क्योंकि कोई उम्मीद ही नहीं।”

भाजपा ने पहले सूची क्यों जारी की?

घोष ने कहा, “भाजपा स्मार्ट हो रही है। पहले घोषणा कर दी – इससे ममता बनर्जी पर दबाव पड़ेगा।”

प्रशासनिक फेरबदल पर ममता की नाराज़गी:

घोष ने पलटवार करते हुए कहा:

“जब इनके हाथ में प्रशासन था, तब ये अधिकारियों को कपड़ों की तरह बदलती थीं। जिन अधिकारियों की निष्ठा संविधान के प्रति नहीं बल्कि मुख्यमंत्री के प्रति थी, उन्हें हटाया गया है।”

मुख्यमंत्री की ‘जान का खतरा’ वाली बात पर:

“उनके अपने घर में ही उन्हें धक्का लगता है। यह सहानुभूति बटोरने की कोशिश है। एक दिन बाघ की बच्ची, अगले दिन अबला महिला – यह नाटक काम नहीं आएगा।”

घोष ने कहा कि कल से वे खड़गपुर में कार्यकर्ताओं से मिलना शुरू करेंगे और पुराने कार्यकर्ताओं को सक्रिय करेंगे। अन्य उम्मीदवारों के प्रचार के लिए बुलाए जाने पर ही कोलकाता आएंगे।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखें अभी घोषित होनी बाकी हैं।


रिपोर्ट: एकबाल, पश्चिम बंगाल

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