बांग्लादेश में शेख हसीना पर न्यायाधिकरण का ऐतिहासिक निर्णय छात्र आंदोलन से उभरते राजनीतिक तूफ़ान की शुरुआत बांग्लादेश में वर्ष 2024 के मध्य में आरम्भ हुए छात्र आंदोलन ने अचानक ही राष्ट्रीय राजनीति की दिशा बदल दी। सरकारी नौकरी में आरक्षित कोटे, विशेष रूप से मुक्ति योद्धाओं के वंशजों के लिए एक-तिहाई पद निर्धारित रहने के विरुद्ध छात्रों का आक्रोश धीरे-धीरे उग्र रूप लेता गया। छात्रों ने तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना से कोटा व्यवस्था में व्यापक सुधार और उनकी नीतिगत भूमिका पर स्पष्टीकरण की माँग की।सरकार द्वारा आंदोलन को रोकने हेतु किए गए बलप्रयोग ने स्थिति को और अधिक विस्फोटक