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नागपुर सेंट्रल जेल में बंदी माता-पिता और बच्चों की भावुक मुलाकात, परिवारों को मिला साथ रहने और खुलकर बातचीत करने का अवसर

नागपुर सेंट्रल जेल में बंदी माता-पिता और बच्चों की भावुक मुलाकात, परिवारों को मिला साथ रहने और खुलकर बातचीत करने का अवसर
Nagpur Central Jail prisoner family reunion program: नागपुर सेंट्रल जेल में बंदी माता-पिता और बच्चों की भावुक मुलाकात, परिवारों को मिला साथ रहने और खुलकर बातचीत करने का अवसर (Image: AI)

Nagpur Central Jail prisoner family reunion program: नागपुर सेंट्रल जेल में आयोजित ‘गला-भेट’ कार्यक्रम के तहत बंदी माता-पिता को अपने बच्चों और परिवार से आत्मीय माहौल में मिलने का अवसर मिला। इस दौरान परिवारों ने खुलकर बातचीत की और एक-दूसरे का हौसला बढ़ाया। जेल प्रशासन के अनुसार, इस तरह की पहल बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक पुनर्वास को मजबूत बनाने में सहायक होती है।

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Asfi Shadab
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परिवारों को मिला आत्मीय माहौल में मिलने का अवसर

Nagpur Central Jail prisoner family reunion program: नागपुर के मध्यवर्ती कारागृह (सेंट्रल जेल) में विशेष ‘गला-भेट’ कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें बंदी माता-पिता को अपने बच्चों और परिवार के सदस्यों से आत्मीय वातावरण में मिलने का अवसर मिला। इस पहल का उद्देश्य बंदियों और उनके परिवारों के बीच भावनात्मक जुड़ाव मजबूत करना, रिश्तों में आई दूरी कम करना और पुनर्वास प्रक्रिया को प्रभावी बनाना है।

कार्यक्रम के दौरान लंबे समय बाद परिजनों से मिलकर कई बंदी और उनके बच्चे भावुक हो उठे। वर्षों बाद एक-दूसरे को गले लगाते हुए परिवारों की आंखें नम हो गईं। सामान्य मुलाकात के विपरीत, इस विशेष कार्यक्रम में परिवारों को साथ बैठकर खुलकर बातचीत करने, सुख-दुख साझा करने और पारिवारिक अपनापन महसूस करने का मौका मिला।

बच्चों ने अपने माता-पिता का हालचाल जाना, वहीं बंदी माता-पिता ने बच्चों को मन लगाकर पढ़ाई करने, अनुशासित जीवन जीने और अच्छे संस्कार अपनाने की सीख दी। परिवार के सदस्यों ने एक-दूसरे का हौसला बढ़ाया और बेहतर भविष्य की उम्मीद जताई।

पुनर्वास को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

जेल प्रशासन के अनुसार, ऐसे कार्यक्रम बंदियों के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। परिवार का स्नेह मिलने से उनमें जीवन के प्रति नई आशा जागती है और समाज की मुख्यधारा में लौटने की प्रेरणा मिलती है।

प्रशासन ने बताया कि ‘गला-भेट’ जैसे कार्यक्रम बंदियों का मनोबल बढ़ाने के साथ-साथ परिवारों में यह विश्वास भी पैदा करते हैं कि कठिन परिस्थितियों में भी रिश्ते मजबूत बने रह सकते हैं। भविष्य में भी ऐसे संवेदनशील कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि बंदियों के सामाजिक पुनर्वास को और मजबूती मिल सके।


रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र

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