
Atmanirbhar Bharat : एएमसीए भारत का महत्वाकांक्षी पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट प्रोजेक्ट है, लेकिन जीई F414 इंजन की बढ़ती कीमत और विदेशी निर्भरता इसकी सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। भारत अब स्वदेशी इंजन तकनीक विकसित करने और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।

Atmanirbhar Bharat : एएमसीए भारत का महत्वाकांक्षी पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट प्रोजेक्ट है, लेकिन जीई F414 इंजन की बढ़ती कीमत और विदेशी निर्भरता इसकी सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। भारत अब स्वदेशी इंजन तकनीक विकसित करने और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।

IAF aircraft : पुणे एयरपोर्ट पर IAF विमान की हार्ड लैंडिंग से रनवे कुछ समय के लिए बंद रहा। सभी क्रू सुरक्षित हैं और उड़ान संचालन धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है।

IAF aircraft : पुणे एयरपोर्ट पर IAF विमान की हार्ड लैंडिंग से रनवे कुछ समय के लिए बंद रहा। सभी क्रू सुरक्षित हैं और उड़ान संचालन धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है।

26 जनवरी 2026 को देश के 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को देश के सर्वोच्च शांतिकाल वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया। यह सम्मान उन्हें नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित भव्य समारोह में दिया गया। शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है। वे अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर कदम रखने वाले पहले भारतीय बन गए हैं। भारत के अंतरिक्ष इतिहास में नया अध्याय शुभांशु शुक्ला ने पिछले साल जून महीने में इतिहास रच दिया जब

26 जनवरी 2026 को देश के 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को देश के सर्वोच्च शांतिकाल वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया। यह सम्मान उन्हें नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित भव्य समारोह में दिया गया। शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है। वे अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर कदम रखने वाले पहले भारतीय बन गए हैं। भारत के अंतरिक्ष इतिहास में नया अध्याय शुभांशु शुक्ला ने पिछले साल जून महीने में इतिहास रच दिया जब

नागपुर में एक नया अध्याय शुरू हुआ है जब एयर मार्शल यल्ला उमेश ने भारतीय वायु सेना के रखरखाव कमान की कमान संभाली। 1 दिसंबर 2025 को उन्होंने 39वें एयर ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ के रूप में यह जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली। यह नियुक्ति भारतीय वायु सेना के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है क्योंकि रखरखाव कमान देश की हवाई ताकत को चुस्त और दुरुस्त रखने में अहम भूमिका निभाता है। एयर मार्शल यल्ला उमेश का सफर एयर मार्शल यल्ला उमेश की यात्रा एक साधारण अधिकारी से शुरू होकर इस बड़े पद तक पहुंची है। उन्होंने एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग (मैकेनिकल) ब्रांच

नागपुर में एक नया अध्याय शुरू हुआ है जब एयर मार्शल यल्ला उमेश ने भारतीय वायु सेना के रखरखाव कमान की कमान संभाली। 1 दिसंबर 2025 को उन्होंने 39वें एयर ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ के रूप में यह जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली। यह नियुक्ति भारतीय वायु सेना के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है क्योंकि रखरखाव कमान देश की हवाई ताकत को चुस्त और दुरुस्त रखने में अहम भूमिका निभाता है। एयर मार्शल यल्ला उमेश का सफर एयर मार्शल यल्ला उमेश की यात्रा एक साधारण अधिकारी से शुरू होकर इस बड़े पद तक पहुंची है। उन्होंने एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग (मैकेनिकल) ब्रांच