
कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य अधीर रंजन चौधरी ओडिशा के संबलपुर जिले का दौरा करने वाले हैं। यह दौरा बंगाली प्रवासी मजदूरों पर हो रहे हमलों और अत्याचारों के खिलाफ विरोध दर्ज करने के लिए किया जा रहा है। कांग्रेस नेता ने साफ कर दिया है कि अगर जरूरत पड़ी तो वह इस मुद्दे को लेकर बड़ा आंदोलन शुरू करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। अधीर रंजन चौधरी 3 जनवरी 2026 की शाम को संबलपुर पहुंचेंगे। इसके बाद 4 जनवरी को वह स्थानीय बंगाली प्रवासी मजदूरों से मुलाकात करेंगे। इस मुलाकात का मकसद उनकी समस्याओं को सुनना और उन पर

कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य अधीर रंजन चौधरी ओडिशा के संबलपुर जिले का दौरा करने वाले हैं। यह दौरा बंगाली प्रवासी मजदूरों पर हो रहे हमलों और अत्याचारों के खिलाफ विरोध दर्ज करने के लिए किया जा रहा है। कांग्रेस नेता ने साफ कर दिया है कि अगर जरूरत पड़ी तो वह इस मुद्दे को लेकर बड़ा आंदोलन शुरू करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। अधीर रंजन चौधरी 3 जनवरी 2026 की शाम को संबलपुर पहुंचेंगे। इसके बाद 4 जनवरी को वह स्थानीय बंगाली प्रवासी मजदूरों से मुलाकात करेंगे। इस मुलाकात का मकसद उनकी समस्याओं को सुनना और उन पर

बजरिया प्रभाग 19 में भारतीय जनता पार्टी को एक बड़ा झटका लगा है। पार्टी के लंबे समय से जुड़े कार्यकर्ता दिनेश पापा यादव ने 350 से अधिक कार्यकर्ताओं के साथ भाजपा छोड़ने का फैसला किया है। यह घटना पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और टिकट वितरण को लेकर नाराजगी को दर्शाती है। दिनेश पापा यादव ने कहा कि उन्होंने 6 वर्ष की उम्र से आरएसएस की सेवा शुरू की और पिछले 40 वर्षों से भारतीय जनता पार्टी के लिए निस्वार्थ भाव से काम किया। लेकिन जब पार्टी टिकट देने की बारी आई तो उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। इससे आहत

बजरिया प्रभाग 19 में भारतीय जनता पार्टी को एक बड़ा झटका लगा है। पार्टी के लंबे समय से जुड़े कार्यकर्ता दिनेश पापा यादव ने 350 से अधिक कार्यकर्ताओं के साथ भाजपा छोड़ने का फैसला किया है। यह घटना पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और टिकट वितरण को लेकर नाराजगी को दर्शाती है। दिनेश पापा यादव ने कहा कि उन्होंने 6 वर्ष की उम्र से आरएसएस की सेवा शुरू की और पिछले 40 वर्षों से भारतीय जनता पार्टी के लिए निस्वार्थ भाव से काम किया। लेकिन जब पार्टी टिकट देने की बारी आई तो उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। इससे आहत

घुग्घुस नगर परिषद में चुनावी प्रक्रिया चल रही है और इस दौरान आदर्श आचार संहिता पूरी तरह लागू है। ऐसे में सरकारी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा की जाती है कि वे नियमों का पालन करें और चुनावी निष्पक्षता को बनाए रखें। लेकिन हाल ही में घुग्घुस में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने चुनाव की पवित्रता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारियों और भाजपा विधायक किशोर जोरगेवार पर आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने के गंभीर आरोप लगे हैं। विवादित बैठक और निधि की घोषणा 14 दिसंबर 2025 को घुग्घुस में एक

घुग्घुस नगर परिषद में चुनावी प्रक्रिया चल रही है और इस दौरान आदर्श आचार संहिता पूरी तरह लागू है। ऐसे में सरकारी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा की जाती है कि वे नियमों का पालन करें और चुनावी निष्पक्षता को बनाए रखें। लेकिन हाल ही में घुग्घुस में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने चुनाव की पवित्रता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारियों और भाजपा विधायक किशोर जोरगेवार पर आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने के गंभीर आरोप लगे हैं। विवादित बैठक और निधि की घोषणा 14 दिसंबर 2025 को घुग्घुस में एक

गीता से प्रेरित राष्ट्रीय सुरक्षा नीति और सामाजिक कल्याण के आयाम भारतीय राजनीति और आध्यात्मिकता के बीच का रिश्ता कभी-कभी ऐसे पल देता है जो सिर्फ समाचार नहीं होता, बल्कि राष्ट्र के दर्शन को परिभाषित करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उडुपी में दिया गया भाषण बिल्कुल ऐसा ही एक क्षण था। जब एक लाख लोग श्रीमद्भगवद्गीता का सामूहिक पाठ कर रहे थे, तब प्रधानमंत्री ने न केवल आध्यात्मिकता का जिक्र किया, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, ऑपरेशन सिंदूर और सामाजिक कल्याण को एक सूत्र में बांधने का प्रयास किया। यह विडंबना है, लेकिन एक सार्थक विडंबना है। धर्म के मंच से

गीता से प्रेरित राष्ट्रीय सुरक्षा नीति और सामाजिक कल्याण के आयाम भारतीय राजनीति और आध्यात्मिकता के बीच का रिश्ता कभी-कभी ऐसे पल देता है जो सिर्फ समाचार नहीं होता, बल्कि राष्ट्र के दर्शन को परिभाषित करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उडुपी में दिया गया भाषण बिल्कुल ऐसा ही एक क्षण था। जब एक लाख लोग श्रीमद्भगवद्गीता का सामूहिक पाठ कर रहे थे, तब प्रधानमंत्री ने न केवल आध्यात्मिकता का जिक्र किया, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, ऑपरेशन सिंदूर और सामाजिक कल्याण को एक सूत्र में बांधने का प्रयास किया। यह विडंबना है, लेकिन एक सार्थक विडंबना है। धर्म के मंच से