
Ramadan 2026: रमजान का महीना इबादत, सब्र और आत्मसंयम का महीना होता है। सुबह सहरी से लेकर शाम इफ्तार तक रोजेदार बिना कुछ खाए-पिए खुदा की इबादत करते हैं। पूरे दिन की भूख और प्यास के बाद जब इफ्तार का समय होता है, तो लगभग हर मुस्लिम घर में एक चीज सबसे पहले सामने आती है—खजूर। अक्सर लोग यह सवाल पूछते हैं कि आखिर खजूर से ही रोजा क्यों खोला जाता है? क्या यह सिर्फ परंपरा है या इसके पीछे कोई खास वजह भी है? सच यह है कि इसके पीछे धार्मिक आस्था भी है और विज्ञान भी। रमजान में

Ramadan 2026: रमजान का महीना इबादत, सब्र और आत्मसंयम का महीना होता है। सुबह सहरी से लेकर शाम इफ्तार तक रोजेदार बिना कुछ खाए-पिए खुदा की इबादत करते हैं। पूरे दिन की भूख और प्यास के बाद जब इफ्तार का समय होता है, तो लगभग हर मुस्लिम घर में एक चीज सबसे पहले सामने आती है—खजूर। अक्सर लोग यह सवाल पूछते हैं कि आखिर खजूर से ही रोजा क्यों खोला जाता है? क्या यह सिर्फ परंपरा है या इसके पीछे कोई खास वजह भी है? सच यह है कि इसके पीछे धार्मिक आस्था भी है और विज्ञान भी। रमजान में

रोजे की शुरुआत और महत्व Ramadan 2026 fasting hours: इस्लामिक कैलेंडर का सबसे पवित्र महीना रमजान साल 2026 में 18 या 19 फरवरी से शुरू होने वाला है। इसकी शुरुआत चांद दिखने पर निर्भर करती है। यह महीना 29 या 30 दिनों तक चलता है। इस दौरान दुनियाभर के मुसलमान सुबह से शाम तक रोजा रखते हैं। रोजे की अवधि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में 12 से 15 घंटे तक होती है। मुसलमानों का मानना है कि रमजान वह महीना है जब 1400 साल पहले पैगंबर मुहम्मद पर कुरान की पहली आयतें नाजिल हुई थीं। इस पवित्र महीने में रोजा

रोजे की शुरुआत और महत्व Ramadan 2026 fasting hours: इस्लामिक कैलेंडर का सबसे पवित्र महीना रमजान साल 2026 में 18 या 19 फरवरी से शुरू होने वाला है। इसकी शुरुआत चांद दिखने पर निर्भर करती है। यह महीना 29 या 30 दिनों तक चलता है। इस दौरान दुनियाभर के मुसलमान सुबह से शाम तक रोजा रखते हैं। रोजे की अवधि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में 12 से 15 घंटे तक होती है। मुसलमानों का मानना है कि रमजान वह महीना है जब 1400 साल पहले पैगंबर मुहम्मद पर कुरान की पहली आयतें नाजिल हुई थीं। इस पवित्र महीने में रोजा