देश की सर्वोच्च अदालत ने शुक्रवार 30 जनवरी को एक ऐसा फैसला सुनाया है जो लाखों स्कूली छात्राओं के जीवन में बदलाव लाने वाला है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया है कि वे सरकारी और निजी दोनों तरह के स्कूलों में पढ़ने वाली लड़कियों को नि:शुल्क सैनिटरी पैड उपलब्ध कराएं। इस फैसले के साथ ही कोर्ट ने मासिक धर्म स्वास्थ्य को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के मौलिक अधिकार का हिस्सा माना है। जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने इस मामले में सुनवाई करते हुए कहा