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शाहपुर भीम मेले में अमृता फडणवीस पर अपमानजनक टिप्पणी, डॉ. नितिन राऊत ने जताया विरोध

Amruta Fadnavis Insult: भंडारा भीम मेले में अपमानजनक टिप्पणी पर नितिन राऊत का विरोध
Amruta Fadnavis Insult: भंडारा भीम मेले में अपमानजनक टिप्पणी पर नितिन राऊत का विरोध (Image Source: IG/@amruta.fadnavis)

भंडारा जिले के शाहपुर में आयोजित भीम मेले में अंजली भारती द्वारा अमृता फडणवीस पर की गई अपमानजनक टिप्पणी पर पूर्व मंत्री डॉ. नितिन राऊत ने कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि यह बाबासाहेब आंबेडकर के महिला सम्मान के विचारों के विपरीत है। राजनीतिक मतभेद स्वीकार्य हैं लेकिन महिलाओं की गरिमा पर हमला किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

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भंडारा जिले के शाहपुर में हाल ही में आयोजित भीम मेले के दौरान एक विवादास्पद घटना सामने आई है जिसने पूरे महाराष्ट्र में राजनीतिक और सामाजिक बहस को जन्म दिया है। इस कार्यक्रम में अंजली भारती नामक व्यक्ति ने महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस के खिलाफ अत्यंत अपमानजनक और निम्न स्तर की व्यक्तिगत टिप्पणी की। इस घटना पर पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. नितिन राऊत ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।

महिला सम्मान पर सवाल

डॉ. नितिन राऊत ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि इस प्रकार की भाषा का प्रयोग न केवल असंवेदनशील है बल्कि समाज में महिलाओं के सम्मान के बिल्कुल विरुद्ध भी जाता है। उन्होंने कहा कि भले ही राजनीतिक विचारधाराएं अलग हों लेकिन किसी भी महिला के सम्मान से खिलवाड़ करना किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। यह घटना केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि सामाजिक मर्यादा और संस्कारों का सवाल है।

भंडारा जैसे छोटे जिले में आयोजित इस मेले में हजारों लोग मौजूद थे। ऐसे सार्वजनिक मंच पर किसी भी महिला के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का प्रयोग समाज में गलत संदेश देता है। यह न केवल उस व्यक्ति की मानसिकता को दर्शाता है बल्कि उन मूल्यों पर भी सवाल खड़े करता है जिन्हें हम सामाजिक विकास के नाम पर बढ़ावा देते हैं।

बाबासाहेब के विचारों का उल्लंघन

डॉ. राऊत ने अपने वक्तव्य में एक महत्वपूर्ण बिंदु यह उठाया कि यह घटना डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के नाम पर आयोजित कार्यक्रम में हुई जो और भी चिंताजनक है। बाबासाहेब ने अपने पूरे जीवन में महिलाओं के सम्मान स्वाभिमान और समानता के मूल्यों का सतत समर्थन किया था। उन्होंने स्त्रियों को समान अधिकार दिलाने के लिए ऐतिहासिक संघर्ष किया और उन्हें सामाजिक न्याय की मुख्यधारा में लाने का कार्य किया था।

बाबासाहेब ने हिंदू कोड बिल के माध्यम से महिलाओं को संपत्ति में अधिकार तलाक का अधिकार और विधवा पुनर्विवाह जैसे मौलिक अधिकार दिलाए थे। उन्होंने कहा था कि किसी भी समाज की प्रगति इस बात से आंकी जाती है कि उस समाज में महिलाओं की स्थिति कैसी है। ऐसे महान विचारक के नाम पर किसी भी महिला के खिलाफ व्यक्तिगत अपमानजनक या अशोभनीय टिप्पणी करना उनके विचारों और मूल्यों के बिल्कुल विपरीत है।

राजनीतिक मतभेद और मर्यादा

पूर्व मंत्री डॉ. नितिन राऊत ने यह भी स्पष्ट किया कि राजनीति में मतभेद होना स्वाभाविक है और लोकतंत्र में विचारों का टकराव स्वीकार्य भी है। हर पार्टी की अपनी विचारधारा होती है और उसे अपने विचार रखने का पूरा अधिकार है। लेकिन मतभेद व्यक्त करते समय मर्यादा और भाषा की सीमा बनाए रखना आवश्यक है।

राजनीतिक बहस में नीतियों कार्यक्रमों और विचारों पर चर्चा होनी चाहिए न कि किसी व्यक्ति विशेषकर महिलाओं की व्यक्तिगत गरिमा पर हमला किया जाना चाहिए। यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और सभ्य समाज में इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

महाराष्ट्र में राजनीतिक संस्कृति

महाराष्ट्र की राजनीतिक संस्कृति हमेशा से ही विचारों के आदान प्रदान पर आधारित रही है। यहाँ छत्रपति शिवाजी महाराज महात्मा फुले और बाबासाहेब आंबेडकर जैसे महान व्यक्तित्वों ने सम्मान और गरिमा की परंपरा स्थापित की है। लेकिन हाल के वर्षों में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में व्यक्तिगत हमले बढ़ते दिख रहे हैं जो चिंता का विषय है।

इस तरह की घटनाएं न केवल उस व्यक्ति की छवि खराब करती हैं जो ऐसे शब्दों का प्रयोग करता है बल्कि पूरे समाज को नीचे गिराती हैं। युवा पीढ़ी जो अपने नेताओं से प्रेरणा लेती है उन्हें गलत संदेश मिलता है।

समाज की जिम्मेदारी

डॉ. राऊत ने समाज से अपेक्षा जताई कि वह डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों के अनुरूप सम्मान समानता और गरिमा की रक्षा करे। केवल राजनीतिक नेताओं की ही नहीं बल्कि आम नागरिकों की भी यह जिम्मेदारी है कि वे ऐसी घटनाओं का विरोध करें और महिलाओं के सम्मान को बनाए रखने में सहयोग दें।

समाज में महिलाओं की स्थिति सुधारने के लिए केवल कानून बनाना ही काफी नहीं है बल्कि मानसिकता में बदलाव लाना भी जरूरी है। जब तक हम महिलाओं को सम्मान से नहीं देखेंगे तब तक वास्तविक समानता संभव नहीं है।

भंडारा में राजनीतिक प्रतिक्रिया

इस घटना के बाद भंडारा में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विभिन्न राजनीतिक दलों ने इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। कुछ नेताओं ने अंजली भारती के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है जबकि कुछ ने इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश की है।

स्थानीय महिला संगठनों ने भी इस घटना की निंदा की है और कहा है कि ऐसे लोगों को सार्वजनिक मंचों पर बोलने का अवसर नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि चाहे किसी भी पार्टी या विचारधारा की महिला हो उसके सम्मान की रक्षा करना हर किसी का कर्तव्य है।

आगे की राह

डॉ. नितिन राऊत का यह बयान एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में भी मानवीय मूल्यों को बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वे ऐसी प्रवृत्तियों का स्पष्ट दृढ़ और बिना किसी संकोच के विरोध करते हैं।

यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम वाकई में एक सभ्य समाज की ओर बढ़ रहे हैं या फिर पीछे जा रहे हैं। महिलाओं के सम्मान की रक्षा केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं है बल्कि यह हमारी सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी है।

इस घटना से सबक लेते हुए सभी राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों को मिलकर एक ऐसा माहौल बनाना होगा जहां महिलाओं को सम्मान मिले और उनकी गरिमा बनी रहे। तभी हम बाबासाहेब के सपनों के भारत का निर्माण कर सकते हैं जहां समानता न्याय और सम्मान के मूल्य सर्वोपरि हों।

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Asfi Shadab

एक लेखक, चिंतक और जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता, जो खेल, राजनीति और वित्त की जटिलता को समझते हुए उनके बीच के रिश्तों पर निरंतर शोध और विश्लेषण करते हैं। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को सरल, तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध।