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सीवान के डीएवी महाविद्यालय में ‘महाकाल कंप्यूटर’ विवाद: शिक्षकों का धरना, प्राचार्य पर तानाशाही के आरोप

DAV PG College Siwan teacher protest Mahakal Computer controversy: सीवान के डीएवी पीजी कॉलेज में कंप्यूटर कोर्स को लेकर विवाद, शिक्षकों का धरना

DAV PG College Siwan teacher protest Mahakal Computer controversy: सीवान के डीएवी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में महाकाल कंप्यूटर को लेकर विवाद सामने आया है। शिक्षकों ने छात्रों से वसूली और प्रशासन की मनमानी के आरोप लगाते हुए कॉलेज परिसर में धरना शुरू किया है। प्राचार्य ने सभी आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि कॉलेज में अनुशासन और पारदर्शिता लाने के लिए कदम उठाए गए हैं। फिलहाल मामला चर्चा में है।

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Asfi Shadab
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सीवान के डीएवी पीजी कॉलेज में महाकाल कंप्यूटर को लेकर विवाद

DAV PG College Siwan teacher protest Mahakal Computer controversy: सीवान। बिहार के सीवान स्थित डीएवी स्नातकोत्तर महाविद्यालय इस समय एक बड़े विवाद के केंद्र में है। शिक्षक संघ के बैनर तले दर्जनों शिक्षकों ने कॉलेज परिसर में धरना शुरू कर दिया है। धरने पर बैठे शिक्षकों के हाथों में ‘महाकाल कंप्यूटर’ लिखी तख्तियां हैं – और यही नाम इस पूरे विवाद की जड़ बना हुआ है।

क्या है महाकाल कंप्यूटर विवाद?

शिक्षकों का आरोप है कि कॉलेज परिसर में संचालित ‘महाकाल कंप्यूटर’ कोर्स की आड़ में छात्रों से अवैध वसूली की जा रही है। सवाल उठ रहे हैं – इस संस्था का असली संचालक कौन है? और छात्रों से वसूली गई राशि का कमीशन किसे मिलता है?

महाकाल कंप्यूटर के नाम पर वसूली के आरोप, शिक्षकों का कॉलेज परिसर में धरना

शिक्षकों के अन्य आरोप

धरना स्थल पर लगे बैनरों में प्राचार्य रामानन्द राम पर मनमानी, तानाशाही रवैया और शिक्षकों के साथ दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिक्षकों के अनुसार:

  • मनमाने तरीके से वेतन काटा जा रहा है
  • महिला शिक्षिकाओं को विशेष अवकाश नहीं दिया जा रहा
  • SC/ST केस में फंसाने की धमकियां दी जा रही हैं
  • सेवानिवृत्त शिक्षकों को पेंशन लाभ से वंचित किया जा रहा है
  • कॉलेज के वित्तीय मामलों में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही

प्राचार्य का पक्ष

हालांकि प्राचार्य रामानन्द राम ने सभी आरोपों को सिरे से नकार दिया है। उनका कहना है कि 2025 में कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने कॉलेज में अनुशासन लागू किया। जो शिक्षक समय पर उपस्थित नहीं होते थे, उनकी हाजिरी काटकर वेतन रोका गया और रिपोर्ट विश्वविद्यालय को भेजी गई। प्राचार्य का यह भी कहना है कि पारदर्शिता के लिए ठेकेदारी प्रथा बंद कर टेंडर व्यवस्था लागू की गई – जिससे कुछ लोग नाराज़ हैं और इसी कारण यह आंदोलन खड़ा किया जा रहा है।

आगे क्या?

फिलहाल धरना जारी है और शिक्षक प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। महाकाल कंप्यूटर से जुड़े वित्तीय सच और शिक्षक-प्राचार्य टकराव का असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। सभी की नजरें अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।


रिपोर्ट: अकाश श्रीवास्तव, बिहार

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