पश्चिम बंगाल चुनाव की घोषणा के बाद प्रशासनिक बदलाव पर भाजपा का सवाल, दिलीप घोष ने सरकार को घेरा
Dilip Ghosh BJP West Bengal election secretary transfer Election Commission: कोलकाता | पश्चिम बंगाल चुनाव की तारीखें घोषित होते ही चुनाव आयोग ने दो अहम सचिवों का तबादला कर दिया। इस कदम पर बीजेपी नेता दिलीप घोष ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। इको पार्क में मौजूद घोष ने साफ कहा:
“हम तो पूरी सरकार बदलना चाहते हैं। OC, DM, SP या चीफ सेक्रेटरी बदलने से कोई फायदा नहीं होगा। हम मुख्यमंत्री का बदलाव चाहते हैं।”
चुनाव आयोग ने हिंसामुक्त चुनाव कराने की प्रतिबद्धता जताई है और पर्यवेक्षक अभी से मैदान में आने लगे हैं। लेकिन घोष को आयोग की कार्रवाई पर भरोसा नहीं:
चुनाव की तारीख घोषित होते ही सचिवों के तबादले और डीए घोषणा पर तेज हुई राजनीतिक बहस
“इस तरह की जो समस्याएं हम झेलते हैं, वो चुनाव आयोग को बताते हैं। लेकिन बार-बार यह बदलो, वो बदलो — असल में कुछ होता नहीं। कोलकाता में हमारी पार्टी की गाड़ी पर हमला हुआ, मंत्री घायल हुए, पुलिस पर ईंट पड़ी — फिर भी केंद्रीय बल को सक्रिय नहीं किया गया। सेंट्रल फोर्स को काम करते नहीं देखता। यह बार-बार होता है।”
तृणमूल कांग्रेस के जनता के नाम पर सड़क पर उतरने पर घोष ने व्यंग्य किया:
“चुनाव में सबकी हवा निकल जाएगी। अभी दिव्य तेल-जल में हैं इसलिए उछल रहे हैं। मोदी हैं इसलिए ठीक हैं। कोविड में भी जिन्होंने सबको बचाया, आगे भी वही सबको देखेंगे। राजनीति के लिए झूठ मत बोलिए।”
वोटर लिस्ट से 60 लाख नाम हटाए जाने के मामले में नवशाद का ममता से वोट बहिष्कार की अपील करने का आग्रह सामने आया है। इस पर घोष ने कहा:
“बहिष्कार करें। हम भी चाहते हैं कि एक भी सही वोटर न छूटे। हम चाहते हैं 60 लाख का वेरिफिकेशन हो।”
चुनाव की तारीख घोषणा से कई घंटे पहले ममता बनर्जी ने बकाया DA की घोषणा कर दी। घोष ने इसे चुनावी चाल बताया:
“ममता बनर्जी का हर मामले में मरते वक्त हरि का नाम जपना है। इतना सोचती थीं तो सुप्रीम कोर्ट क्यों गईं? अब देख रहे हैं कुर्सी नहीं बचेगी, इसलिए आखिरी वक्त में फेंक रहे हैं। पहले क्यों नहीं किया? यह सब चुनाव के लिए खेल है।”
पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल गरमा चुका है और आने वाले दिनों में सभी दलों की सक्रियता और तेज होने की उम्मीद है।
रिपोर्ट: एकबाल, पश्चिम बंगाल