जल संकट को रोकने के लिए गांवों में तेज हुए जलसंचय के काम
Maharashtra jal sanrakshan abhiyan Nagpur: नागपुर। एल-नीनो और जलवायु परिवर्तन के चलते इस वर्ष वर्षा में कमी की आशंका को देखते हुए राज्य सरकार ने जलसंधारण कार्यों में तेजी लाई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंत्रालय स्तर पर जल नियोजन की व्यापक समीक्षा बैठक कर सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इन्हीं निर्देशों के अनुपालन में राज्यभर में “गाळमुक्त धरण व गाळयुक्त शिवार” अभियान बड़े पैमाने पर चलाया जा रहा है।
सोमवार सुबह मृदा एवं जलसंधारण विभाग के सचिव जितेंद्र पापळकर ने नागपुर जिले की कुही तहसील अंतर्गत साळवा गांव में पूर्व मालगुजारी तालाब से गाद निकालने के कार्य का स्थलीय निरीक्षण किया। इसके साथ ही उन्होंने भिवकुंड के मामा तालाब और टटोली के केटी-वेयर कार्यों का भी जायजा लिया।


निरीक्षण के दौरान अपर आयुक्त एवं मुख्य अभियंता अनंत जगताप, प्रादेशिक जलसंधारण अधिकारी हनुमंत खटके, जिला जलसंधारण अधिकारी विपीन साखरकर, सरपंच नितीन मेश्राम तथा नाम फाउंडेशन के प्रतिनिधि उमेश बेदरे उपस्थित रहे।
तालाबों से निकाली गई गाद किसानों के लिए बनी लाभ का साधन
सचिव पापळकर ने कहा, “मई और जून के महीने जलसंधारण कार्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। बारिश शुरू होने से पहले तालाबों की सफाई और गाद निकालने के कार्य समय पर पूरे करना जरूरी है।” उन्होंने बताया कि शासन ने मृदा व जलसंधारण, कृषि, वन, ग्रामविकास विभाग और जिला प्रशासन का संयुक्त एक्शन प्लेटफॉर्म तैयार किया है। जिन गांवों को किसी प्रकार की समस्या हो, वे सीधे शासन से संपर्क कर सकते हैं।
किसानों से संवाद करते हुए सचिव पापळकर ने कहा, “तालाबों से निकाली गई गाद खेतों की उर्वरता बढ़ाने और उत्पादन सुधारने के लिए प्रकृति का वरदान है — किसान इसका अधिक से अधिक लाभ उठाएं।”
मृदा एवं जलसंधारण विभाग के सचिव ने सभी ग्राम पंचायतों और सरपंचों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की है। मानसून से पहले राज्यभर में इस अभियान को और गति देने की योजना है।

रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र