Mayor Krishna Chakraborty: पश्चिम बंगाल की राजनीति खासकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में इन दिनों सियासी हलचल काफी तेज हो गयी है। दरअसल कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम के इस्तीफे के एक दिन बाद ही बिधाननगर नगर निगम की मेयर कृष्णा चक्रवर्ती ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। लगातार दूसरे बड़े नगर निगम से मेयर के इस्तीफे ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, कृष्णा चक्रवर्ती ने अपना इस्तीफा बिधाननगर नगर निगम के कमिश्नर को सौंप दिया। इसके साथ ही उन्होंने इस्तीफे की प्रति राज्य के शहरी विकास विभाग और संबंधित अधिकारियों को भी भेजी है। शुरुआत में उन्होंने अपने इस्तीफे का कारण निजी बताया, लेकिन बाद में उन्होंने नगर निगम की कार्यप्रणाली को लेकर खुलकर नाराजगी जाहिर की।
कृष्णा चक्रवर्ती ने बताई इस्तीफे की वजह
कृष्णा चक्रवर्ती ने कहा कि वह जिस तरह से जनता के लिए काम करना चाहती थीं, उस तरह काम नहीं कर पा रही थीं। उनके अनुसार, बोर्ड की नियमित बैठकें नहीं हो रही थीं, कई पार्षद बैठकों में शामिल नहीं होते थे और अधिकारी भी अन्य कार्यों में व्यस्त रहते थे। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में वह जनता की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पा रही थीं और लोगों को भ्रम में नहीं रखना चाहती थीं।
आठ महीने बाकी था कार्यकाल
बिधाननगर नगर निगम में कृष्णा चक्रवर्ती का कार्यकाल अभी करीब आठ महीने बाकी था। वह दो कार्यकाल तक मेयर रहीं और लंबे समय से स्थानीय राजनीति में सक्रिय हैं। इस्तीफे के दौरान वह भावुक भी नजर आईं और कहा कि पद छोड़ने के बाद भी वह पार्षद के रूप में जनता की सेवा करती रहेंगी।
भाजपा हुई हमलावर
वहीं, इस इस्तीफे के बाद विपक्षी भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस पर हमला तेज कर दिया है। भाजपा नेताओं ने इसे टीएमसी के भीतर बढ़ते असंतोष और प्रशासनिक विफलता का परिणाम बताया है। बिधाननगर से भाजपा विधायक शरद्वत मुखर्जी ने भी कृष्णा चक्रवर्ती को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए और पूरे मामले की जांच की मांग की।
लगातार बढ़ रहा इस्तीफे का सिलसिला
गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार के बाद राज्य के कई नगर निकायों में राजनीतिक अस्थिरता देखने को मिल रही है। इससे पहले चंदननगर नगर निगम के मेयर राम चक्रवर्ती भी इस्तीफा दे चुके हैं। वहीं बुधवार को कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने भी अपना पद छोड़ दिया था। लगातार हो रहे इन इस्तीफों ने बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और टीएमसी के सामने संगठनात्मक चुनौतियां बढ़ा दी हैं।