Nitin Nabin Jharkhand Visit: भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 6 और 7 जून को दो दिवसीय झारखंड दौरे पर रांची पहुंचेंगे। राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद यह उनका पहला झारखंड दौरा होगा, जिसे पार्टी संगठन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान वह प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं, सांसदों, विधायकों और संगठन पदाधिकारियों के साथ कई दौर की बैठक करेंगे। इसके अलावा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात का कार्यक्रम तय किया गया है। आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों के साथ उनकी विशेष बैठक भी प्रस्तावित है।
तय होगी राजनीतिक रणनीति
भाजपा फिलहाल झारखंड में विपक्ष की भूमिका में है और विधानसभा चुनाव में अभी करीब तीन वर्ष का समय बाकी है। ऐसे में राष्ट्रीय अध्यक्ष का यह दौरा भविष्य की राजनीतिक रणनीति तय करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व 2029 के विधानसभा चुनाव में सत्ता में वापसी के लक्ष्य को लेकर संगठन को मजबूत करने और बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की योजना पर चर्चा करेगा। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदित्य साहू पहले ही कह चुके हैं कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे को लेकर कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह है और पार्टी आने वाले वर्षों के आंदोलन तथा जनसंपर्क अभियान का खाका तैयार करेगी।
राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन की रणनीति
दौरे के दौरान राज्य की झारखंड मुक्ति मोर्चा-कांग्रेस गठबंधन सरकार के खिलाफ आंदोलन की रणनीति भी प्रमुख एजेंडे में शामिल रहेगी। भाजपा का आरोप है कि राज्य सरकार बिजली, पानी, किसानों की समस्याओं, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर विफल रही है। पार्टी पिछले दिनों कई जनआंदोलन चला चुकी है और अब भ्रष्टाचार तथा कानून-व्यवस्था को लेकर राज्यव्यापी अभियान शुरू करने की तैयारी में है। बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष की मौजूदगी में आगामी आंदोलन की रूपरेखा और तारीखों को अंतिम रूप दिया जा सकता है। इस अभियान में केंद्रीय नेताओं की भागीदारी भी सुनिश्चित करने की योजना है।
राज्यसभा की एक सीट पर उम्मीदवार उतारेगी भाजपा
नितिन नवीन के रांची प्रवास के दौरान राज्यसभा चुनाव को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज रहने की संभावना है। भाजपा ने राज्यसभा की एक सीट पर उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है, लेकिन एनडीए के पास वर्तमान में 24 विधायक ही हैं, जबकि जीत के लिए 28 मतों की आवश्यकता है। ऐसे में पार्टी अतिरिक्त समर्थन जुटाने के विकल्पों पर भी विचार कर सकती है। माना जा रहा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष की मौजूदगी में संगठनात्मक बैठकों के साथ-साथ राज्यसभा चुनाव को लेकर भी महत्वपूर्ण रणनीतिक चर्चा होगी।