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14.2 किलो वाले गैस सिलेंडर में मिलेगा केवल 10 kg गैस! जानिए क्या है पूरी सच्चाई?

14.2 किलो वाले गैस सिलेंडर में मिलेगा केवल 10 kg गैस! जानिए क्या है पूरी सच्चाई?
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क्या सच में अब गैस सिलेंडर में कम LPG मिलने वाली है? इस खबर ने देशभर में हलचल मचा दी है। सरकार ने इसे अफवाह बताया है, लेकिन इसके पीछे की असली वजह क्या है? जानिए संकट, सप्लाई और इस वायरल दावे की पूरी सच्चाई, जो आपको चौंका सकती है।

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Dipali Kumari
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LPG Cylinder News: देश में एलपीजी (LPG) की उपलब्धता को लेकर पिछले कुछ दिनों से लोगों के बीच चिंता का माहौल बना हुआ है। खासकर सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा था कि घरेलू 14.2 किलो वाले गैस सिलेंडर में कम गैस भरकर सप्लाई की जा सकती है। इस खबर ने आम लोगों के बीच असमंजस और डर पैदा कर दिया था। लेकिन अब सरकार ने इन सभी अटकलों पर साफ शब्दों में विराम लगा दिया है।

क्या है पूरी सच्चाई?

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने इन खबरों को पूरी तरह अफवाह बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 14.2 किलो के सिलेंडर में कम गैस भरने जैसी कोई योजना फिलहाल लागू नहीं की जा रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि बिना पुष्टि के ऐसी खबरों पर भरोसा न करें। हालांकि, यह जरूर सामने आया है कि इस तरह का प्रस्ताव विचाराधीन हो सकता है, लेकिन इस पर अंतिम निर्णय सरकार ही लेगी।

दरअसल, इस पूरी स्थिति की जड़ पश्चिम एशिया में चल रहा तनाव है। खासकर ईरान से जुड़े हालात और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते तेल और गैस सप्लाई में आ रही रुकावट ने भारत के लिए चुनौती बढ़ा दी है। इसका असर एलपीजी के आयात पर पड़ा है, जिससे घरेलू स्टॉक पर दबाव महसूस किया जा रहा है।

देश में एलपीजी सप्लाई सामान्य

सरकार का कहना है कि इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है। यही वजह है कि कमर्शियल गैस सप्लाई में कुछ कटौती की गई है, ताकि घरों में गैस की कमी न हो। राहत की बात यह है कि फिलहाल देश में एलपीजी सप्लाई सामान्य बनी हुई है और ‘ड्राई आउट’ जैसी स्थिति नहीं है।

PNG की ओर तेजी से बढ़ रहे लोग

दिलचस्प बात यह भी है कि लोग अब वैकल्पिक विकल्पों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। पिछले 10 दिनों में करीब 2 लाख उपभोक्ताओं ने पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को अपनाया है, जबकि 3.5 लाख नए कनेक्शन जारी किए गए हैं। यह बदलाव भविष्य की ऊर्जा जरूरतों की दिशा भी दिखाता है।

सरकार ने यह भी बताया कि अब देश की 50–60% एलपीजी मांग घरेलू उत्पादन से पूरी हो रही है, जो पहले करीब 40% थी। इससे आयात पर निर्भरता कुछ कम हुई है।

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Dipali Kumari

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।