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पहले 40-45 दिन रहते थे बाबा बर्फानी, अब सिर्फ 5 दिन में ही क्यों पिघल गया शिवलिंग?

पहले 40-45 दिन रहते थे बाबा बर्फानी, अब सिर्फ 5 दिन में ही क्यों पिघल गया शिवलिंग?
पहले 40-45 दिन रहते थे बाबा बर्फानी, अब सिर्फ 5 दिन में ही क्यों पिघल गया शिवलिंग?

अमरनाथ यात्रा शुरू होने के महज पांच दिन के भीतर बाबा बर्फानी का प्राकृतिक हिम शिवलिंग करीब 90 प्रतिशत तक पिघल गया है। इस घटना ने श्रद्धालुओं और विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। आखिर ऐसा क्यों हुआ और इसके पीछे क्या संभावित कारण हैं, जानिए पूरी जानकारी।

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Dipali Kumari
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Baba Barfani: अमरनाथ यात्रा शुरू होने के महज पांच दिन के भीतर पवित्र बर्फ का शिवलिंग, जिसे श्रद्धालु बाबा बर्फानी के नाम से जानते हैं, करीब 90 प्रतिशत तक पिघल चुका है। इस घटना ने श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यावरण विशेषज्ञों की भी चिंता बढ़ा दी है। अब इस मुद्दे पर प्रशासन से लेकर राजनीतिक दलों तक सवाल उठने लगे हैं।

जम्मू-कश्मीर में 3 जुलाई से शुरू हुई अमरनाथ यात्रा के दौरान इस बार रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। लेकिन यात्रा शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद पवित्र बर्फ का शिवलिंग तेजी से पिघलने लगा है। कई रिपोर्टों के अनुसार, पांच दिन के भीतर शिवलिंग करीब 90 प्रतिशत तक पिघल चुका है, जबकि कुछ लोगों का दावा है कि यह लगभग पूरी तरह समाप्त हो गया है।

हर साल बनता है बर्फ का शिवलिंग

अमरनाथ गुफा समुद्र तल से करीब 3,888 मीटर की ऊंचाई पर अनंतनाग जिले में स्थित है। यहां हर साल प्राकृतिक रूप से बर्फ का शिवलिंग बनता है, जिसे लाखों श्रद्धालु भगवान शिव का स्वरूप मानकर पूजा करते हैं। श्रद्धालु यहां पहलगाम के 48 किलोमीटर लंबे मार्ग या बालटाल के 14 किलोमीटर छोटे लेकिन कठिन रास्ते से पहुंचते हैं।

शुरुआती चार दिनों में 93 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने किये दर्शन

इस साल यात्रा कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आयोजित की जा रही है। पिछले वर्ष पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सुरक्षा को और मजबूत किया गया है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ है। शुरुआती चार दिनों में ही 93 हजार से अधिक श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। दूसरे दिन ही 20 हजार से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे, जो पिछले कई वर्षों में दूसरे दिन की सबसे अधिक संख्या मानी जा रही है।

आखिर क्यों इतनी जल्दी पिघल गया शिवलिंग ?

विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते तापमान, यात्रा मार्ग पर बढ़ते निर्माण कार्य, सड़क चौड़ीकरण, गुफा के पास अस्थायी शिविर, लंगर और भारी मशीनों के उपयोग का असर स्थानीय वातावरण पर पड़ रहा है। हालांकि अभी तक किसी एक वजह को शिवलिंग के जल्दी पिघलने का आधिकारिक कारण नहीं माना गया है।

पहले 40 से 45 दिन तक होते थे बाबा बर्फानी के दर्शन

श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले बाबा बर्फानी का प्राकृतिक हिम शिवलिंग लगभग 40 से 45 दिनों तक सुरक्षित रहता था और पूरी अमरनाथ यात्रा के दौरान श्रद्धालु इसके दर्शन कर पाते थे। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में इसकी अवधि लगातार कम होती जा रही है। इस बार यात्रा शुरू होने के महज पांच दिन के भीतर ही शिवलिंग का बड़ा हिस्सा पिघल गया।

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दीपाली कुमारी सक्रिय पत्रकार और हिंदी कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का अनुभव है। उन्होंने रांची के गोस्सनर कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। सामाजिक सरोकारों, जन-जागरूकता और जमीनी मुद्दों पर तथ्यपरक एवं संवेदनशील लेखन उनकी प्रमुख पहचान है। आम लोगों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाना और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना उनकी पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य है। अनुभव : पिछले तीन वर्षों से वे सक्रिय पत्रकारिता और डिजिटल कंटेंट लेखन से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों, जनहित विषयों और स्थानीय समस्याओं पर लगातार लेखन किया है। उनकी रिपोर्टिंग और लेखन शैली जमीनी समझ, स्पष्ट प्रस्तुति और पाठक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है। वर्तमान फोकस : वे समाज, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, जन-जागरूकता और सामाजिक बदलाव से जुड़े विषयों पर लेखन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी खबरें और लेख तैयार करना है, जो आम लोगों से सीधे जुड़ाव बनाएं और सकारात्मक सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करें। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • सामाजिक मुद्दों पर लेखन : जनहित, सामाजिक बदलाव और आम लोगों से जुड़े विषयों पर संवेदनशील और प्रभावशाली रिपोर्टिंग। • जमीनी रिपोर्टिंग : स्थानीय समस्याओं और वास्तविक परिस्थितियों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। • जन-जागरूकता आधारित कंटेंट : शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर जानकारीपूर्ण लेखन। • हिंदी कंटेंट निर्माण : पाठकों के लिए सहज, विश्वसनीय और प्रभावी हिंदी कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञता। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : जमीनी मुद्दों की गहरी समझ, निष्पक्ष दृष्टिकोण और समाज-केंद्रित लेखन शैली ने दीपाली कुमारी को एक संवेदनशील और भरोसेमंद हिंदी पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। जनहित से जुड़े विषयों पर उनकी निरंतर सक्रियता और तथ्यपरक लेखन उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाते हैं।