Indian Mangoes in Washington: वॉशिंगटन में छाया भारतीय आमों का जादू, एक-एक फांक के लिए उमड़ी हजारों की भीड़

Indian Mangoes in Washington : वॉशिंगटन डीसी में आयोजित ‘टेस्ट द ट्रॉपिकल मैजिक’ कार्यक्रम में भारतीय आमों का जबरदस्त क्रेज देखने को मिला। 8,000 से अधिक लोगों ने आम, बिरयानी और भारतीय व्यंजनों का स्वाद लिया। बढ़ती मांग के साथ अमेरिका में भारतीय आमों का निर्यात भी लगातार नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है।
विषयसूची
8 हजार से ज्यादा लोगों ने चखा ‘भारत का स्वाद’
Indian Mangoes in Washington: अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी के प्रसिद्ध ड्यूपॉन्ट सर्कल में इस बार भारतीय आमों का ऐसा जादू चला कि हजारों लोग सिर्फ एक फांक चखने के लिए घंटों कतार में खड़े रहे। भारतीय दूतावास की ओर से आयोजित वार्षिक ‘टेस्ट द ट्रॉपिकल मैजिक’कार्यक्रम में भारतीय आमों के साथ बिरयानी, लस्सी, आम का हलवा, भारतीय चाय और कॉफी का स्वाद लेने के लिए रिकॉर्ड भीड़ उमड़ी। आयोजन में शामिल होने के लिए 8,000 से अधिक लोगों ने पहले ही पंजीकरण कराया था, जबकि वास्तविक संख्या इससे भी अधिक रही। करीब तीन घंटे तक चले इस आयोजन में कार्यक्रम समाप्त होने तक लोगों की लंबी-लंबी कतारें लगी रहीं। पिछले वर्ष भारी भीड़ को देखते हुए इस बार भारतीय दूतावास ने तैयारियों का दायरा बढ़ाते हुए एक की जगह पांच स्टॉल लगाए, लेकिन फिर भी लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ। हर स्टॉल पर भारतीय आमों के साथ लस्सी, स्वादिष्ट बिरयानी, आम का हलवा और भारतीय चाय-कॉफी परोसी गई।
भारतीय आमों ने ताजा कर दी बचपन की यादें
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के अमेरिकी वर्जीनिया और मैरीलैंड से पहुंचे। उनके लिए यह केवल स्वाद का नहीं बल्कि भावनाओं का भी उत्सव था। भारतीय मूल की अमेरिकी नागरिक दिशा ने केसर आम का स्वाद लेते हुए कहा कि गर्मियों में उनकी दादी उन्हें आम खिलाया करती थीं और वही स्वाद फिर से महसूस करने के लिए वह इस कार्यक्रम में आई हैं। वहीं पहली बार भारतीय आम खाने वाले एंड्रयू ने कहा कि उन्होंने आज तक इतना स्वादिष्ट आम कभी नहीं खाया।
हर साल बढ़ रहा आयोजन का दायरा
‘टेस्ट द ट्रॉपिकल मैजिक’ कार्यक्रम पिछले कई वर्षों से वॉशिंगटन के ग्रीष्मकालीन आयोजनों का हिस्सा रहा है, लेकिन हर साल इसका आकार और लोकप्रियता बढ़ती जा रही है। अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कहा कि यह केवल आम चखाने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि भारत की समृद्ध खाद्य संस्कृति और विविध स्वादों की झलक दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि आम के साथ भारतीय चावल, चाय, कॉफी और अन्य खाद्य उत्पाद भी लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। क्वात्रा ने बताया कि इस बार मिले अभूतपूर्व उत्साह को देखते हुए भारतीय दूतावास अब ऐसे खाद्य प्रचार कार्यक्रम साल में एक से अधिक बार आयोजित करने की योजना बना रहा है ताकि अधिक से अधिक अमेरिकी नागरिक भारत के स्वाद से परिचित हो सकें।
तेजी से बढ़ रहा भारतीय आमों का निर्यात
भारतीय आमों की बढ़ती लोकप्रियता का असर भारत-अमेरिका व्यापार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष अभिषेक देव ने बताया कि वर्ष 2025 में भारत ने अमेरिका को लगभग 2,300 टन आम निर्यात किए थे, जबकि 2026 में यह आंकड़ा एक महीने पहले ही पार हो चुका है। इससे स्पष्ट है कि अमेरिकी बाजार में भारतीय आमों की मांग लगातार बढ़ रही है। वहीं के बी एक्सपोर्ट्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कौशल खाखर ने बताया कि आम जल्दी खराब होने वाला फल है। इसलिए तेज़ और आधुनिक लॉजिस्टिक्स की मदद से भारत से अमेरिका तक कम समय में आम पहुंचाए जा रहे हैं ताकि गुणवत्ता और स्वाद दोनों बरकरार रहें।
2006 में खुला था अमेरिकी बाजार
भारतीय आमों की अमेरिका तक पहुंच की कहानी लगभग दो दशक पुरानी है। वर्ष 2006 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के कार्यकाल में भारतीय आमों के आयात का रास्ता साफ हुआ। इससे पहले अमेरिका ने मैंगो सीड वीविल नामक कीट के खतरे के कारण भारतीय आमों पर प्रतिबंध लगा रखा था। बाद में विकिरण तकनीक से उपचारित आमों के आयात की अनुमति मिलने के बाद भारतीय आमों की पहली खेप अमेरिका पहुंची और उसे शानदार प्रतिक्रिया मिली। उसी के बाद से भारतीय आम धीरे-धीरे अमेरिकी बाजार में अपनी मजबूत पहचान बनाने लगे।
भारतीय स्वाद की बढ़ती वैश्विक पहचान
Indian Mangoes in Washington: भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है और यहां सैकड़ों किस्मों के आम उगाए जाते हैं। हालांकि निर्यात के लिए सीमित किस्में ही भेजी जाती हैं। अमेरिका में केसर, लंगड़ा, मालदा, अल्फांसो, दशहरी और बंगनपल्ली जैसी प्रीमियम किस्मों की मांग लगातार बढ़ रही है। भारतीय दूतावास का यह आयोजन केवल आमों के प्रचार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने भारतीय खानपान, संस्कृति और कृषि उत्पादों को वैश्विक मंच पर नई पहचान भी दिलाई। वॉशिंगटन के ड्यूपॉन्ट सर्कल में उमड़ी रिकॉर्ड भीड़ इस बात का संकेत है कि भारतीय आम अब केवल प्रवासी भारतीयों की पसंद नहीं रहे, बल्कि अमेरिकी उपभोक्ताओं के बीच भी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। बढ़ते निर्यात, बढ़ती मांग और ऐसे सफल आयोजनों से आने वाले वर्षों में अमेरिकी बाजार में भारतीय आमों की हिस्सेदारी और मजबूत होने की उम्मीद है।

