Soil Health App for Farmers: अब मोबाइल बताएगा आपके खेत की सेहत, किसानों के लिए जल्द आएगा नया ऐप

Agriculture Technology : केंद्र सरकार जल्द किसानों के लिए सॉइल हेल्थ ऐप लॉन्च करेगी। इस ऐप से किसान खेत की मिट्टी की सेहत, पोषक तत्वों की कमी और सही खाद की जानकारी मोबाइल पर ही प्राप्त कर सकेंगे। इससे उर्वरकों का संतुलित उपयोग, लागत में कमी और बेहतर फसल उत्पादन के साथ प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा मिलेगा।
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खेती में सबसे बड़ी जरूरत अच्छी मिट्टी
Soil Health App for Farmers: खेती में सबसे बड़ी जरूरत होती है अच्छी मिट्टी की। अगर मिट्टी स्वस्थ है तो फसल भी अच्छी होती है, लेकिन कई बार किसान बिना जांच के ज्यादा खाद और दवाइयों का इस्तेमाल कर देते हैं, जिससे धीरे-धीरे जमीन की ताकत कम होने लगती है। अब सरकार किसानों की इस परेशानी को दूर करने के लिए एक नई पहल करने जा रही है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया है कि सरकार जल्द ही किसानों के लिए एक ऐसा मोबाइल ऐप लाने वाली है, जिससे किसान अपने खेत की मिट्टी की जानकारी आसानी से हासिल कर सकेंगे। किसान खेत में खड़े होकर ही पता कर पाएंगे कि मिट्टी में कौन-से पोषक तत्व कम हैं और फसल के लिए कितनी खाद की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस ऐप का उद्देश्य किसानों को सही जानकारी देना है, ताकि वे जरूरत के हिसाब से ही खाद का इस्तेमाल करें और बेवजह खर्च से बच सकें।
मिट्टी की जांच के आधार पर उर्वरकों का इस्तेमाल
कृषि मंत्री ने यह बात हरियाणा के रेवाड़ी जिले के बावल में आयोजित ‘खेत बचाओ अभियान’ के समापन कार्यक्रम में कही। यह अभियान एक महीने पहले मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से शुरू हुआ था। इसका उद्देश्य किसानों को मिट्टी की सेहत बचाने, संतुलित खेती और प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम के दौरान चौहान ने कहा कि आज कई जगह किसान ज्यादा उत्पादन की उम्मीद में जरूरत से ज्यादा यूरिया और डीएपी का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसका असर धीरे-धीरे खेत की मिट्टी पर पड़ रहा है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अंधाधुंध खाद डालने की बजाय मिट्टी की जांच के आधार पर ही उर्वरकों का इस्तेमाल करें।
ज्यादा खाद डालना हमेशा फायदेमंद नहीं
कृषि मंत्री ने कहा कि अधिक मात्रा में रासायनिक खाद और कीटनाशकों के इस्तेमाल से जमीन की प्राकृतिक ताकत कमजोर हो रही है। लंबे समय तक इसका नुकसान खेती और किसानों दोनों को उठाना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि अच्छी खेती के लिए जरूरी है कि किसान अपनी मिट्टी को समझें। किस खेत में किस पोषक तत्व की कमी है, इसकी जानकारी होने पर किसान सही फैसला ले पाएंगे।
मृदा स्वास्थ्य कार्ड के बाद अब डिजिटल सुविधा
अभी किसानों को मिट्टी की जानकारी देने के लिए सरकार की ओर से मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जाते हैं। इसमें खेत की मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों और जरूरत के हिसाब से खाद की सलाह दी जाती है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2026 तक देशभर में करीब 26 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जा चुके हैं। अब सरकार इसी व्यवस्था को और आसान बनाने के लिए मोबाइल ऐप पर काम कर रही है। इस ऐप के आने के बाद किसानों को मिट्टी की जांच और सलाह के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
प्राकृतिक खेती अपनाने पर जोर
शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि सही तरीके से की गई प्राकृतिक खेती से उत्पादन कम नहीं होता, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है। उन्होंने कहा कि खेती सिर्फ आज की फसल के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी है। इसलिए जमीन की सेहत बचाना बेहद जरूरी है।
हरियाणा के किसानों की सराहना
कार्यक्रम में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी मौजूद रहे। इस दौरान कृषि मंत्री ने हरियाणा के किसानों की मेहनत की सराहना की। उन्होंने कहा कि हरियाणा देश के खाद्यान्न उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। राज्य में किसानों को कई फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि कभी भारत को विदेशों से गेहूं मंगाना पड़ता था, लेकिन आज देश अपने खाद्यान्न भंडार भरने में सक्षम है। इसमें हरियाणा जैसे राज्यों के किसानों का बड़ा योगदान है।
खेती को तकनीक से जोड़ने की कोशिश
Soil Health App for Farmers: सरकार अब खेती को ज्यादा आसान और आधुनिक बनाने पर जोर दे रही है। मौसम की जानकारी, ड्रोन तकनीक, डिजिटल सलाह और अब मिट्टी की जानकारी देने वाला ऐप इसी दिशा में कदम हैं। किसानों का मानना है कि अगर उन्हें समय पर सही जानकारी मिल जाए तो वे कम खर्च में बेहतर खेती कर सकते हैं। नया ऐप आने के बाद किसान अपनी जमीन की जरूरत समझकर खेती कर पाएंगे। इससे मिट्टी की सेहत भी बचेगी और फसल उत्पादन को भी फायदा मिल सकता है। यही वजह है कि सरकार इस पहल को किसानों के लिए एक बड़ी सुविधा के रूप में देख रही है।

