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Nagpur News: ऑरेंज सिटी वॉटर वर्क्स के 42 संविदा कर्मचारियों को फिर से काम पर रखने की मांग तेज

Nagpur News: ऑरेंज सिटी वॉटर वर्क्स के 42 संविदा कर्मचारियों को फिर से काम पर रखने की मांग तेज
Nagpur Orange City Water Works 42 contract workers reinstatement demand: ऑरेंज सिटी वॉटर वर्क्स के 42 संविदा कर्मचारियों को फिर से काम पर रखने की मांग तेज (Photo: RB / Jassi)

Nagpur Orange City Water Works 42 contract workers reinstatement demand: नागपुर में ऑरेंज सिटी वॉटर वर्क्स के शेष 42 संविदा कर्मचारी पिछले छह महीनों से बेरोजगार हैं। भारतीय मजदूर संघ ने मनपा आयुक्त को ज्ञापन देकर उन्हें तुरंत फिर से काम पर रखने की मांग की है। प्रशासन ने आठ दिनों के भीतर पुनर्नियुक्ति का भरोसा दिया है। समय पर कार्रवाई नहीं होने पर संगठन ने आमरण अनशन की चेतावनी दी है।

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Asfi Shadab
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शेष 42 संविदा कर्मचारियों की पुनर्नियुक्ति की मांग तेज

Nagpur Orange City Water Works 42 contract workers reinstatement demand: नागपुर की ऑरेंज सिटी वॉटर वर्क्स (ओसीडब्ल्यू) में काम कर रहे 42 संविदा मीटर रीडर कर्मचारी पिछले छह महीनों से बेरोजगार हैं। इनकी पुनर्नियुक्ति की मांग को लेकर भारतीय मजदूर संघ के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मनपा आयुक्त विपिन इटनकर को ज्ञापन सौंपा।

दिसंबर 2025 में ओसीडब्ल्यू प्रशासन ने न्यूनतम वेतन की मांग करने पर 100 संविदा मीटर रीडर कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया था। ये कर्मचारी पिछले 10 से 15 वर्षों से यहां कार्यरत थे। इसके विरोध में भारतीय मजदूर संघ के नेतृत्व में विधायक प्रवीण दटके, ओमप्रकाश यादव और गजानन गटलेवार ने अनिश्चितकालीन धरना, उपवास और मोर्चा निकाला था।

इस पर महापौर रीता ठाकरे और मनपा आयुक्त ने विधायक प्रवीण दटके की उपस्थिति में बैठक कर एक माह के भीतर सभी कर्मचारियों को पुनर्नियुक्त करने के निर्देश दिए थे। लेकिन दो माह बीतने के बावजूद अब तक केवल 58 कर्मचारियों को ही वापस लिया गया है। शेष 42 कर्मचारी बेरोजगार हैं और आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। बच्चों के नए शैक्षणिक सत्र का खर्च भी इन परिवारों के लिए चुनौती बन गया है।

आठ दिनों में कार्रवाई का प्रशासन ने दिया भरोसा

ओसीडब्ल्यू संविदा कर्मचारी संघ के अध्यक्ष ओमप्रकाश यादव और भारतीय मजदूर संघ के नेता गजानन गटलेवार के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने आयुक्त इटनकर को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की। आयुक्त ने तुरंत ओसीडब्ल्यू प्रशासन से संपर्क कर निर्देश दिए, जिस पर प्रशासन ने आठ दिनों के भीतर शेष 42 कर्मचारियों को पुनर्नियुक्त करने का आश्वासन दिया।

भारतीय मजदूर संघ ने चेतावनी दी है कि यदि आठ दिनों में कर्मचारियों को काम पर नहीं लिया गया, तो वे परिवारों सहित सिविल लाइंस स्थित मनपा मुख्यालय के सामने अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू करेंगे।


रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र

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असफ़ी शादाब वरिष्ठ पत्रकार और संवाददाता हैं, जो राष्ट्र भारत में महाराष्ट्र और कोलकाता से क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से जुड़े विषयों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं। उन्हें जमीनी पत्रकारिता, प्रशासनिक मामलों और समसामयिक घटनाक्रमों की गहरी समझ है। उनकी रिपोर्टिंग तथ्यपरक, शोध आधारित और आधिकारिक स्रोतों पर आधारित होती है, जिससे पाठकों को विश्वसनीय और स्पष्ट जानकारी प्राप्त होती है। अनुभव : पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है। प्रशासनिक कार्यवाहियों, सरकारी नीतियों, राजनीतिक घटनाक्रम और अपराध से जुड़े मामलों की फील्ड कवरेज उनकी प्रमुख पहचान रही है। वर्तमान भूमिका : राष्ट्र भारत में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में वे क्राइम, राजनीति, खेल और सरकारी नीतियों से संबंधित खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं। वे जमीनी सच्चाई को सरल और आम पाठक की भाषा में प्रस्तुत करने को प्राथमिकता देते हैं। भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस महाराष्ट्र और कोलकाता रहा है, जहां वे स्थानीय प्रशासन, राजनीतिक गतिविधियों, अपराध और खेल जगत से जुड़े विषयों को करीब से कवर करते हैं। उनकी क्षेत्रीय समझ और फील्ड अनुभव उनकी रिपोर्टिंग को अधिक प्रामाणिक बनाते हैं। मुख्य विशेषज्ञता (Core Expertise) : • क्राइम रिपोर्टिंग : अपराध, पुलिस जांच, प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों की तथ्यपरक कवरेज। • राजनीति और शासन : सरकारी नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग। • खेल पत्रकारिता : खेल जगत की प्रमुख घटनाओं, खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग। • ग्राउंड रिपोर्टिंग : फील्ड विजिट, स्थानीय स्रोतों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर जमीनी सच्चाई सामने लाना। • जनहित पत्रकारिता : आम लोगों से जुड़े मुद्दों और प्रशासनिक प्रभावों को सरल एवं स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करना। विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तथ्यों की सटीकता, आधिकारिक स्रोतों पर आधारित रिपोर्टिंग और जमीनी अनुभव ने असफ़ी शादाब को एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है। क्राइम, राजनीति और प्रशासनिक विषयों पर उनकी निरंतर फील्ड रिपोर्टिंग पाठकों के बीच उनकी विश्वसनीयता को मजबूत बनाती है।