Khushishala Rajasthan: ‘खुशीशाला’ से बच्चों के चेहरे पर लौटेगी मुस्कान, अब स्कूलों में पढ़ाई के साथ खुश रहना भी सीखेंगे बच्चे

School Happiness Program : राजस्थान सरकार ने 'खुशीशाला' पहल शुरू की है, जिसके तहत सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाई के साथ मानसिक और भावनात्मक रूप से मजबूत बनाने पर भी जोर दिया जाएगा। खेल, कहानियों और गतिविधियों के जरिए बच्चों का आत्मविश्वास, व्यवहार और सीखने की क्षमता विकसित की जाएगी, जबकि शिक्षकों को भी विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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पढ़ाई के साथ मन का भी होगा ख्याल
Khushishala Rajasthan: अगर कोई बच्चा स्कूल में चुप-चुप रहने लगे, छोटी-सी बात पर गुस्सा करने लगे या पढ़ाई में मन न लगाए, तो अक्सर इसे उसकी आदत समझ लिया जाता है। लेकिन कई बार इसके पीछे तनाव, डर या मन की कोई परेशानी होती है। अब राजस्थान सरकार चाहती है कि स्कूल ऐसे बच्चों को सिर्फ पढ़ाएं ही नहीं, बल्कि उन्हें समझें भी। इसी सोच के साथ राज्य में ‘खुशीशाला’ नाम की नई पहल शुरू की गई है। इस कार्यक्रम का मकसद बच्चों को ऐसी जगह देना है, जहां वे खुलकर हंस सकें, अपनी बात कह सकें और बिना किसी डर के सीख सकें।
1,500 सरकारी स्कूलों से हुई है शुरुआत
शुरुआत फिलहाल करीब 1,500 सरकारी स्कूलों से हुई है, लेकिन आने वाले समय में इसे 12 हजार से ज्यादा स्कूलों तक पहुंचाने की तैयारी है। आज बच्चों की जिंदगी पहले जैसी आसान नहीं रही। छोटी उम्र में ही पढ़ाई का दबाव, प्रतियोगिता, मोबाइल की लत और बदलती पारिवारिक परिस्थितियां उनके व्यवहार पर असर डाल रही हैं। कई बच्चे अपनी परेशानियां किसी से कह नहीं पाते और धीरे-धीरे तनाव में रहने लगते हैं। यही वजह है कि अब स्कूलों में सिर्फ किताबें नहीं पढ़ाई जाएंगी, बल्कि बच्चों को अपनी भावनाओं को समझना, गुस्से को संभालना, दोस्ती निभाना और मुश्किल समय में खुद को मजबूत रखना भी सिखाया जाएगा।
दो जिलों में किया गया था पहला प्रयोग
इस योजना को सीधे पूरे राज्य में लागू नहीं किया गया। सबसे पहले साल 2024 में सिरोही और बांसवाड़ा के सरकारी स्कूलों में इसका ट्रायल किया गया। यहां शिक्षकों ने बच्चों के साथ खेल, कहानियां, समूह गतिविधियां और बातचीत के जरिए काम किया। कुछ महीनों बाद जो नतीजे सामने आए, उन्होंने सभी को हैरान कर दिया। बच्चों में पहले से ज्यादा आत्मविश्वास दिखा। वे कक्षा में खुलकर बोलने लगे और पढ़ाई में भी उनकी रुचि बढ़ी। आंकड़ों के मुताबिक 53 फीसदी बच्चों के सामाजिक और भावनात्मक व्यवहार में सुधार हुआ, जबकि बालिकाओं में यह सुधार 69 फीसदी तक पहुंच गया।
अब हर स्कूल में होगा एक ऐसा शिक्षक जो बच्चों को समझेगा
सरकार चाहती है कि हर सरकारी स्कूल में कम से कम एक ऐसा शिक्षक हो, जो बच्चों की मानसिक और भावनात्मक जरूरतों को समझ सके। इसके लिए 11,305 शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे पहले 165 शिक्षक प्रशिक्षित किए जा चुके हैं। राज्य के 33 डाइट संस्थानों में भी शिक्षकों को तैयार किया जा रहा है, ताकि वे आगे दूसरे शिक्षकों को भी प्रशिक्षित कर सकें।
खेल-खेल में सीखेंगे जरूरी बातें
खुशीशाला की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें बच्चों पर किसी तरह का अतिरिक्त पढ़ाई का बोझ नहीं डाला जाएगा। वे खेल खेलेंगे, कहानियां सुनेंगे, चित्र बनाएंगे, दोस्तों के साथ मिलकर गतिविधियां करेंगे और इसी दौरान सीखेंगे कि अपनी भावनाओं को कैसे समझना है, दूसरों की बात कैसे सुननी है और छोटी-छोटी समस्याओं का हल कैसे निकालना है। यानी सीखने का तरीका पूरी तरह बच्चों की दुनिया के मुताबिक होगा।
शिक्षकों की सोच भी बदलेगी
इस कार्यक्रम में सिर्फ बच्चों को नहीं, बल्कि शिक्षकों को भी नई तरह की ट्रेनिंग दी जाएगी। उन्हें तीन दिन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद 21 दिन का ऑडियो लर्निंग प्रोग्राम होगा, जिसमें उन्हें बताया जाएगा कि अगर कोई बच्चा उदास रहता है, गुस्सा करता है या खुद में सिमटने लगता है तो उसे कैसे समझें और उसकी मदद कैसे करें।
राजस्थान ने उठाया नई सोच वाला कदम
Khushishala Rajasthan: राजस्थान सरकार का कहना है कि स्कूल सिर्फ अच्छे अंक लाने की जगह नहीं होने चाहिए। स्कूल ऐसी जगह होने चाहिए, जहां बच्चा सुरक्षित महसूस करे, अपनी बात खुलकर कह सके और हर दिन खुशी के साथ सीखने आए। अगर यह पहल सफल रही, तो आने वाले समय में 12 हजार से ज्यादा स्कूलों और लाखों बच्चों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है। आखिरकार, एक खुश बच्चा ही बेहतर तरीके से सीख सकता है। शायद इसी सोच को सच करने की कोशिश है ‘खुशीशाला’, जहां पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों की मुस्कान को भी उतनी ही अहमियत दी जाएगी।

