Nagpur News: पेंच टाइगर रिजर्व में मादा बाघिन का सफल बचाव, स्वास्थ्य जांच के बाद सुरक्षित कोर क्षेत्र में छोड़ा गया

Pench Tiger Reserve tigress TUI-21 rescued: नागपुर के पेंच टाइगर रिजर्व में मादा बाघिन टीयूआई-21 (TUI-21) का सफल बचाव किया गया। वन विभाग के अनुसार वह कई बार मानव बस्तियों की ओर पहुंच रही थी और मवेशियों के शिकार की घटनाएं भी सामने आई थीं। स्वास्थ्य जांच में स्वस्थ पाए जाने के बाद एनटीसीए (NTCA) के तय नियमों के अनुसार उसे सिल्लारी रेंज के सुरक्षित कोर क्षेत्र में छोड़ दिया गया।
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मादा बाघिन के सुरक्षित बचाव से टला मानव और वन्यजीव टकराव
Pench Tiger Reserve tigress TUI-21 rescued: नागपुर, 7 जुलाई 2026: पेंच टाइगर रिजर्व पीटीआर (PTR) प्रशासन ने मंगलवार को मादा बाघिन टीयूआई-21 (TUI-21) का सफल रेस्क्यू अभियान चलाया। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उसे सुरक्षित कोर क्षेत्र में छोड़ दिया गया। यह कार्रवाई राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण एनटीसीए (NTCA) के दिशा-निर्देशों के अनुसार की गई।
वन विभाग के मुताबिक, बाघिन बार-बार मानव आबादी वाले क्षेत्रों की ओर भटक रही थी और मवेशियों के शिकार की घटनाएं भी दर्ज हुई थीं। मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका को देखते हुए रेस्क्यू जरूरी समझा गया।
मंगलवार को पाउनी यूसी रेंज के उसरीपार बीट में बाघिन को सफलतापूर्वक पकड़ा गया। पशु चिकित्सकों की टीम ने विस्तृत जांच की, जिसमें वह पूरी तरह स्वस्थ और जंगल में छोड़े जाने के लिए फिट पाई गई।
विशेषज्ञों की जांच के बाद बाघिन को प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया
अभियान प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक एम. एस. रेड्डी, फील्ड डायरेक्टर एस. रमेशकुमार और उप निदेशक अक्षय गजबिये के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। मैदानी स्तर पर नेतृत्व सहायक वन संरक्षक पूजा लिंबगांवकर ने किया। टीम में रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर अभिजीत माने (पाउनी यूसी), निलेश गावंडे (ईस्ट पेंच), पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. रोहिणी बावस्कर और सहायक पराग भुते शामिल रहे।
जांच के बाद एनटीसीए (NTCA) प्रोटोकॉल का पालन करते हुए बाघिन को सिल्लारी रेंज के कोर क्षेत्र में छोड़ा गया, जहां वह मानव बस्तियों से दूर प्राकृतिक आवास में रह सकेगी।
पेंच प्रशासन ने कहा कि यह अभियान वन्यजीव संरक्षण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता दर्शाता है और भविष्य में भी मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए ऐसे कदम उठाए जाते रहेंगे।
रिपोर्ट: जस्सी, महाराष्ट्र

